​तहलका न्यूज,बीकानेर। गोचर को बचाने के लिये शहर में चल रही मुहिम के तहत अब श्री सिद्ध स्याऊ बाबा गौ सेवा समिति भी आगे आई है और समिति से जुड़े गौ भक्तों ने भी सरकार व प्रशासन को खुले मंच से चुनौती दी है कि यदि गोचर संरक्षण को लेकर सरकार जल्द लिखित फैसला नहीं लेगी तो आने वाले समय पर उसके परिणाम सरकार व प्रशासन को भोगने पड़ेगें।पत्रकार वार्ता के दौरान समिति के संरक्षक पं नथमल पुरोहित ने कहा कि गोचर सरकार की बापौती नहीं है।इससे नथानिया की ओर से खरीदा गया है।अब विकास के नाम पर बीडीए ने इसका अधिग्रहण कर इंतकाल अपने नाम चढ़ा लिया है।जो न्यायसंगत नहीं है।इससे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।उन्होंने गोचर भूमि पर भी अतिक्रमण करने वालों दुष्परिणाम भुगतने की बात कही। पं पुरोहित ने कहा कि स्याऊ बाबा की जमीन और गोचर की जमीन पर किसी का भी निजी कब्जा नहीं होना चाहिए।यह पाप है और अगर कोई ऐसा करेगा तो उसे इसका फल भुगतना पड़ेगा गोचर में बने मंदिर से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन उसकी आड़ में जो कब्जे हो रहे है वो स्वीकार नही होंगे।पंडित राजेंद्र किराडू ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा सरकार अब तक सिर्फ आश्वासन दे रही है। हमें लिखित में ठोस कार्यवाही चाहिए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो 27 जनवरी को विशाल प्रदर्शन करेंगे और यह धरना अनिश्चितकालीन चलेगा।आगामी चुनावों में सरकार को इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।पं जुगल किशोर ओझा (पुजारी बाबा) ने कहा की सरकार हमें गोचर भूमि दान नहीं दे रही है ये हमारे पूर्वजों ने सरकार को पैसे देकर खरीदी हुई है।गायों के लिए जिसके हमारे पास सारे कागज पड़े है। प्रेस वार्ता में शिव शंकर पुरोहित,सुशील किराडू रोड़ा महाराज,सीन महाराज और श्री सिद्ध स्याऊ बाबा गौ सेवा समिति के समस्त पदाधिकारी व सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में गोचर संरक्षण का संकल्प लिया।

स्याऊ बाबा गोचर पर कब्जे का आरोप
गोचर पर अवैध कब्जो के मामले में पैरवी कर रहे एडवोकेट बृजमोहन पुरोहित ने बताया कि स्याऊ बाबा परिसर में बने नए मंदिर की आड़ में कुछ प्रभावशाली और राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोग गोचर भूमि पर कब्जा कर रहे हैं।अदालत के रुख से साफ़ है कि यह अवैध निर्माण जल्द ही सरकारी नियमों के तहत ध्वस्त होने की कगार पर है।उन्होंने अदालत के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि स्याऊ बाबा परिसर में मंदिर की आड़ ने हो रहे अवैध कब्जों पर सरकारी स्वीकृति का कोई सबूत नहीं है।प्रेस वार्ता के दौरान स्थाई लोक अदालत (जनोपयोगी सेवा), बीकानेर के एक ताज़ा आदेश (मुकदमा नं. 729/25) का हवाला दिया गया। 15.01.2026 को जारी आदेश में अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिला कलेक्टर द्वारा पेश रिपोर्ट के अनुसार,विवादित परिसर में सांसद/विधायक या किसी अन्य निधि से निर्माण के लिए कोई वित्तीय या प्रशासनिक स्वीकृति जारी नहीं की गई है।अदालत ने प्रार्थी (अतिक्रमणकर्ताओं) को 27 फरवरी 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि वे यह साबित नहीं कर पाते कि निर्माण वैध टेडर या सरकारी पैसे से हुआ है,तो 16.10.2025 का स्थगन आदेश स्वत: ही खारिज माना जाएगा।