तहलका न्यूज,बीकानेर। दो साल से आयोजित होने वाले पुष्करणा समाज के सामूहिक विवाह समारोह अपने अपने परवान पर है। सावे के दौरान जिन युवक-युवतियों का विवाह होने वाला है उनके हाथधान लेने के मांगलिक कार्यक्रम रविवार को हुए।मांगलिक गीतों के साथ परिवार की महिलाओं ने पीठी का लेप कर लखदख व तेल चढ़ाने की परम्परा निभाई और विवाह करने वाले युवक युवतियों को केसरिया वस्त्र धारण करवाये। इस दौरान पौराणिक परम्परा के साथ आधुनिकता की झलक भी दिखाई दी। जिसके तहत घरों में हल्दी वाले बैनर लगाक र पीले वस्त्रों के ड्रेस कोड में महिलाएं,पुरूष व बालक दिखाई दिए। पीठी लगाने के अलावा फूलों से भी बन्ना बनड़ी पर वर्षा की गई। के सरिया वस्त्र धारण करने के बाद बनड़ा व बनड़ी ने बड़े बर्जुगों का आशीर्वाद ले ननिहाल लड्डू चढ़ाने पहुंचे। सावे कार्यक्रम के अनुसार सोमवार को मातृका स्थापना व गणेश परिक्रमा छींकी निकाली जायेगी। जिसके अन्तर्गत बनड़ा व बनड़ी अपने ससुराल जायेगें और विधिवत पूजन के बाद उनकी खोल भराई की जायेगी।

पहुंचने लगे प्रवासी बीकानेरी
पुष्करणा समाज के सामूहिक विवाह समारोह को लेकर बीकानेर से बाहर रहने वाले प्रवासियों के आने का सिलसिला जारी है। रविवार को कोलकता से बड़ी संख्या में पुष्करणा जाति के लोग बीकानेर पहुंचे। इनमें हर किसी के घर में सामूहिक सावे के दिन विवाह समारोह होंगे। पुष्क रणा जाति के लोग कोलकता, मुम्बई,चैन्नई,हैदराबाद,बैंगलुरू,दिल्ली से बीकानेर आ रहे हैं। प्रत्येक दो साल से होने वाले पुष्करणा जाति के सामूहिक सावे में शामिल होने के लिए अन्य राज्यों के रहने वाले समाज के प्रवासी लोग भी बीकानेर आते हैं।

कम खर्च में विवाह
रविवार को कोलकता से बीकानेर आए विजय व्यास ने बताया कि पुष्करणा सावे में बीकानेर आते हैं। इस बार घर-परिवार,रिश्तेदारी में विवाह समारोह है। इसमें शामिल होने के लिए आए हैं। महादेव छंगाणी ने बताया कि सबसे कम खर्च में विवाह इस सावे में हो जाता है। यह सैकड़ों साल पुरानी परम्परा है,आज के समय में सामूहिक सावा प्रासंगिक है।

पुष्करणा सावा के लिए नि:शुल्क वाहन सेवा शुरू
पुष्करणा सावा समिति के सचिव अनिल कुमार पुरोहित ने बताया कि आगामी 10 फरवरी को विवाह बंधन में बंधने वाले वर-वधुओं के लिए रविवार को गुवाड़ चौक स्थित शिव शक्ति साधना पीठ एवं पुष्करणा सावा समिति के संयुक्त तत्वावधान में विशेष व्यवस्था की गई। सावा से जुड़े मायरा,खिरोड़ा,हाथधान,गणेश परिक्रमा,विवाह समारोह में आवागमन तथा भवन शिफ्टिंग के लिए बीकेईएसएल के सहयोग से कुल 14 वाहनों का संचालन किया जा रहा है,जिसमें सवारी वाहन एवं मालवाहक शामिल हैं।समिति के प्रवक्ता वीरेन्द्र किराड़ू ने बताया कि इस अवसर पर कोलकाता निवासी पूनमचंद रंगा,जोधपुर निवासी कमलेश व्यास एवं रायपुर निवासी तारणी आचार्य द्वारा हरी झंडी दिखाकर नि:शुल्क 9 सवारी टैक्सियों को रवाना किया गया।इस कार्यक्रम में श्री पुष्करणा सावा समिति के पदाधिकारी राजकुमारी व्यास,शशिकुमार,नवरतन व्यास के साथ पूर्व पार्षद दुर्गादास छंगाणी,सतु महाराज सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

छींकी:अनूठी परम्परा जिसमें गली-मौहल्लों में होता है वेद मंत्रों का उच्चारण
पुष्करणा सावा सदियों से सामूहिक एकता,समरसता और मितव्ययिता के लिए प्रसिद्ध है। बीकानेर में पुष्करणा सावे के दिन सैकड़ों शादियां एक ही दिन,एक ही मुहूर्त में घर-घर में होती है। इस सावे की खास विशेषता है विष्णुरूपी दूल्हा।सिर पर खिड़किया पाग,सूट-बूट के स्थान पर बनियान,पीतांबर धारण किए और नंगे पैर बारातियों के साथ निकलना।रथ,बाजा, घोड़ी के स्थान पर पैदल बारात,शंख ध्वनि और झालर की झंकार। पुष्करणा समाज में होने वाले विवाह आयोजनों की हर मांगलिक रस्म अनूठी और सदियों से चली आ रही है। इनमें खिरोड़ा,बडबेला,गोत्राचार,आटी,दाल,हाथधान सहित कई पारम्परिक रस्में है।इनमें सबसे अनूठी और सभी को आकर्षित करने वाली मांगलिक रस्म है-गणेश परिक्रमा। इसे स्थानीय भाषा में छींकी भी कहा जाता है।

विवाह से एक दिन पहले आयोजन
गणेश परिक्रमा अर्थात छींकी का आयोजन विवाह से एक दिन पहले होता है।सूर्यास्त के बाद निकलने वाली गणेश परिक्रमाओं में जिन युवक-युवतियों का विवाह होना है,वे बन्ना-बन्नड़ी के रूप में इसमें शामिल होते है। वर और वधू अपने-अपने ससुराल परिवारजनों के साथ जाते है। ससुराल के मुख्य द्वार पर ही दुल्हा-दूल्हन को पोखने और खोळा भरने की रस्म होती है।वर-वधू ससुराल के अंदर नहीं जाते है।मांगलिक रस्म के बाद वर-वधू पुन: अपने-अपने घर पहुंचते है।गणेश परिक्रमा में शामिल वर-वधू के परिवारजन वेद मंत्रों का उच्चारण करते है। चार स्थानों पर भगवान गणेश की पूजा-अर्चना और स्तुतीगान होता है। गणेश परिक्रमा में शामिल बच्चे,युवा,महिलाएं और पुरुष वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए गणेश परिक्रमा में शामिल होते है।ज्योतिषाचार्य पंडित राजेन्द्र किराडू के अनुसार गणेश परिक्रमा के दौरान उच्चारित होने वाला वेद मंत्र रूद्राष्टध्यायी पाठ का एक मंत्र है। इस मंत्र में भगवान गणेश से प्रार्थना की जाती है कि जिस मार्ग से बारात निकलेगी उस मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं और विघ्न को दूर करने की प्रार्थना की जाती है। पंडित किराडू के अनुसार गणेश परिक्रमा के दौरान वेद मंत्र के उच्चारण की यह सदियों पुरानी परम्परा है।

पहले पैदल व बैलगाड़ी अब वाहनों में
गणेश परिक्रमा के दौरान दशकों पहले वर-वधू पैदल अथवा बैलगाड़ी में जाते थे। कुछ वर्षो पहले तक तांगा गाड़ो में भी गणेश परिक्रमाएं निकालने का चलन रहा। वर्तमान में कार,जीप, ऑटो में दूल्हा-दुल्हन बैठकर शामिल होते है। गणेश परिक्रमा में आगे घर परिवार के सदस्य रहते है। बीच में दूल्हा-दुल्हन और अंत में घर-परिवार की महिलाएं शामिल रहती है। महिलाएं वेद मंत्रों के उच्चारण के साथ-साथ पारम्परिक मांगलिक गीतों का भी गायन करते है।