तहलका न्यूज,बीकानेर। राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र गंगाशहर में आज यहां बरसों तक वैद्य रहे स्व.महावीर प्रसाद शर्मा की 7वीं पुण्यतिथि पर उनका श्रद्धामय स्मरण किया गया।इस दौरान अतिथियों ने उनकी प्रिय वन औषधि तुलसी जी का एक पौधा भी रोपा। उनके तेल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प भी लिया गया।पुष्पाजंलि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएसएस के लक्ष्मीनाथ नगर के संघचालक ब्रह्मदत्त आचार्य ने इस अवसर पर कहा कि वैद्यजी बीकानेर में प्राकृतिक चिकित्सा की अलख लगाने वाले एक संत थे।उन्होंने इस केंद्र पर बरसों तक नाना प्रकार की बीमारियों से ग्रस्त लोगों की सेवा की। इस केंद्र को जन जन की आस्था का केंद्र बनाने में उनकी भूमिका सदैव याद रहेगी।आचार्य ने इस दौरान उनके साथ बिताए दिनों को याद किया तथा अनेक संस्मरण भी सुनाए।विशिष्ट अतिथि श्रीरतन तंबोली ने कहा कि आयुर्वेद पर वैद्यजी की कमाल की पकड़ थी।वे मरीज के चेहरे से ही उसका रोग भांप लेते थे। योग के भी जानकार थे।प्राकृतिक उपचार में योग की भूमिका को सच्चे अर्थों में उन्होंने ही पहचाना था।राजस्थान प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र के सचिव बनवारी लाल शर्मा ने कहा कि वैद्य अनेक असाध्य से असाध्य रोगों को ठीक करने में सिद्धहस्त साबित हुए हैं।अनेक जैनाचार्य भी उनके पास इलाज के यहां आते थे। अनेक लोग जो बिस्तर पकड़ चुके थे वे वैद्यजी की दवा से न केवल ठीक हुए बल्कि एकदम स्वस्थ भी हुए।उन्होने इस केंद्र को एक तपोभूमि के रूप में पल्लवित किया इसलिए वैद्यजी हमारे बीच नहीं होते हुए भी सैदव हमारी यादों में बने रहेंगे।कार्यकारिणी सदस्य संपत पारीक ने कहा कि वे कई बार मरीज की मानसिकता भी समझ लेते थे और फिर उसी हिसाब से दवा देते थे।वे वास्तव में एक संत थे।कार्यकारी सदस्य संतोष व्यास ने भी अनेक संस्मरण सुनाए।प्राकृतिक चिकित्सा विशेषज्ञ तान्या जायसवाल ने कहा कि जब मैंने यह केंद्र ज्वाइन किया तो मुझे लगा कि जैसे मैं किसी मंदिर में आ गई हू।यहां आध्यात्मिक वातावरण देखने को मिला।यहां के आने के बाद प्राकृतिक चिकित्सा को मैंने भी धरातल पर देखा।लोकतंत्र सेनानी मूलचंद सोलंकी ने बताया कि वैद्य महावीर प्रसाद एक अच्छे संगठक भी थे।वे कोई काम हाथ में लेते तो उसे पूरा अवश्य करते थे। लोकतंत्र सेनानी आशुतोष रावल ने बताया कि वैद्यजी प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञ थे। वे खूब अध्ययन भी करते थे।वरिष्ठ अधिवक्ता रहे एडवोकेट ओम आचार्य ने भी उनके जीवन पर एक किताब भी प्रकाशित की थी।

ये रहे मौजूद

आयोजन में समाजसेवी धीरज पंचारिया,कविता सुथार,सुनीता प्रजापत,कुणाल तंवर,शंकरलाल पडिहार,मंयक बोथरा,सरला प्रजापत सहित अनेक लोग मौजूद रहे।