


तहलका न्यूज,बीकानेर।महात्मा ज्योतिबा फूले तथा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक समरसता के प्रतीक,नारी शिक्षा के अग्रदूत तथा समता एवं समानता की अलख जगाने वाले ऐसे महापुरूष थे,जिनके सिद्धांत आज भी प्रासंगिक हैं।भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दोनों महापुरूषों की जयंती एक साथ मनाकर नई शुरूआत की गई है। ये उद्गार केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने पालिटेक्निक कॉलेज मैदान में भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट की ओर से बाबा साहेब डॉ बी आर अम्बेडकर की 135 वीं जयंती और महात्मा ज्योतिबा फुले की 199 वीं जंयति के उपलक्ष में आयोजित समरसता सम्मेलन के दौरान व्यक्त किये।मेघवाल ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा फूले का निधन 28 नवंबर 1890 को हुआ तथा बाबा साहेब 14 अप्रैल 1891 को इस दुनिया में आए। उन्होंने ज्योतिबा फूले के विचारों को आगे बढ़ाया तथा समाज में नई चेतना पैदा की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब का बनाया संविधान आज हमें एक सूत्र में बांधता है।दोनों महापुरूषों के सिद्धांतों का आज भी हमारे जीवन में प्रभाव है। उन्होंने कहा कि भावना मेघवाल मेमोरियल ट्रस्ट ने नई शुरूआत कर समाज के समक्ष एक मिसाल रखी है।मेघवाल ने कहा कि आने वाले समय में महात्मा ज्योतिबा फूले के विचारों को लेकर देशभर में कार्यक्रम होंगे।बीकानेर में इनकी शुरूआत हो चुकी है।उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में अनेक धर्म, जातियां और वर्ग हैं।सभी में आपसी समरसता हो,यही दोनों महापुरूषों का ध्येय था। खाजूवाला विधायक डॉ.विश्वनाथ मेघवाल ने कहा कि बाबा साहेब को सदियों तक ‘सिंबल ऑफ नॉलेज के रूप में याद रखा जाएगा। उन्होंने देश को दुनिया का सबसे बड़ा लिखित संविधान देने के साथ आधुनिक भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रीडूंगरगढ़ विधायक श्री ताराचंद सारस्वत ने कहा कि दोनों विभूतियों ने अत्यंत प्रतिकूल समय में देश को दिशा दिखाई। दोनों दूरदृष्टा थे तथा देश में समानता के भाव पैदा करने के पक्षधर थे।श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री रामगोपाल सुथार ने कहा कि दोनों महापुरूषों के जीवन में अनेक समानताएं थी।दोनों ने मानव धर्म को सबसे बड़ा धर्म माना और देश को आगे बढ़ाने में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।श्रीमती सुमन छाजेड़ ने कहा कि समाज को महात्मा ज्योतिबा फूले और बाबा साहेब जैसे महापुरूषों के प्रति कृतज्ञ होना चाहिए।उनके दिखाए आदर्शों का अनुसरण करना उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम संयोजक रवि शेखर मेघवाल ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में बताया।राजस्थान प्रशासनिक सेवा की वरिष्ठ अधिकारी तथा भावना मेघवाल ट्रस्ट की पदाधिकारी श्रीमती सुशीला वर्मा ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने ट्रस्ट की गतिविधियों के बारे में बताया तथा दोनों महापुरूषों के जीवन से जुड़े प्रसंग साझा किए।इस दौरान हाल ही में सिविल सेवा परीक्षा में चयनित हुई नमिता सोनी का अभिनंदन किया गया। केन्द्रीय मंत्री ने शॉल ओढ़ाकर और साफा पहनाकर नमिता सोनी को आशीर्वाद दिया।इस अवसर पर पूर्व विधायक श्रीमती शिमला बावरी,डॉ.सत्यप्रकाश आचार्य,श्याम सुंदर पंचारिया,नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष महावीर रांका,चंपालाल गेदर,मोहन सुराणा,पूर्व प्रधान कन्हैया लाल सियाग,पूर्व उप महापौर राजेन्द्र पंवार,मुमताज अली भाटी,दिलीप पुरी,श्याम सिंह हाडला,विनोद गिरि गुसाई,रामेश्वर पारीक सहित अनेक विशिष्टजन अतिथि के रूप में मौजूद रहे।
