तहलका न्यूज,बीकानेर। राज्य सरकार कितनी पारदर्शिता से काम कर रही है। इसकी बानगी राजभवन और सीएमओ में पहुंची शिकायतों के निस्तारण से ही पता चलता है। जिसके प्रत्यक्ष उदाहरण महाराजा गंगासिंह विवि और बीकानेर तकनीकी विवि है। जिनकी अनेक जायज शिकायतें राजभवन व सीएमओ तक पहुंचने के बाद भी संबंधित दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मजे की बात तो यह है कि महाराजा गंगासिंह विवि को तो कुलगुरू का निजी व्यक्ति चला रहा है। जिसके खिलाफ बोम सदस्य व श्रीडूंगरगढ़ के विधायक ताराचंद सारस्वत और भाजपा के युवा नेता डॉ भगवान सिंह मेडतिया ने भी लिखित पत्रावली राज्यपाल व सीएम को दी है और भाजपा विधायक ने तो सदन में यह मुद्दा उठाकर न केवल सरकार के भ्रष्टाचार मुक्त शासन की मंशा को स्पष्ट किया था। परन्तु ऐसा लगता है कि राज्यपाल व मुख्यमंत्री अपनों की शिकायतों को सुनने की बजाय विवि के कुलगुरू व उनके निर्देशन में विवि में मनमर्जी करने वाले अमित पांडे को शह दे रहे है। चहीं दूसरी ओर तकनीकी विवि में भ्रष्टाचार की परतेें खुलने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई न होना अपने आप में सरकार के उच्चाधिकारियों की क ार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाता है।
क्या सरकार का ध्यान भ्रमित करने के लिये हुई शिकायत
विश्वस्त सूत्रों से जानकारी मिली है कि पांडे की ओर से एक शिकायत किसी श्याम सिंह बीका द्वारा करवा कर अपने व कुलगुरू पर लगे भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से सरकार का ध्यान भ्रमित करवाना चाह रहे है। सूत्र ने बताया है कि इस शिकायत में उप कुलसचिव परीक्षा,अतिरिक्त कुलसचिव व कुलगुरू के निजी सचिव की नियुक्ति,पदौन्नति को नियम विरूद्ध बताया है। जबकि ये सारी प्रक्रियाएं उच्च शिक्षा विभाग के नियमों से होकर गुजरती है। जिसकी प्रक्रिया के कुलगुरू भी हिस्सा होते है। अब सवाल यह उठता है कि यदि ये नियुक्तियां व पदोन्नति नियम विरूद्ध हुई है तो इसमें कुलगुरू भी भागीदार है। जिनके खिलाफ भी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
परीक्षार्थी की आपात स्थिति में दे सकते है राहत
तहलका न्यूज संवाददाता ने जब परीक्षा नियंत्रक राजाराम चोयल से किसी परीक्षार्थी को मनमर्जी के परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा दिलाने के बारे में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार मेें मेडिकल अनफिट या विशेष परिस्थितियों में परीक्षार्थी को राहत देने का प्रावधान है। विवि प्रबंधन द्वारा परीक्षार्थी की परीक्षा महत्वपूर्ण होती है। उसके लिये आपात स्थिति में नजदीकी परीक्षा केन्द्र पर परीक्षा दिलवाई जा सक ती है। ताकि परीक्षार्थी के भविष्य के साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न हो। वैसे किसी भी विवि में काम करने वाले कार्मिकों के बच्चे भी अध्ययन तो करते ही है।
