तहलका न्यूज,बीकानेर।आमतौर पर कोर्ट में विचाराधीन मामलों में फैसला नहीं आने तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती है। लेकिन प्रताप बस्ती स्थित वाल्मिकी समाज की श्मसान भूमि पर अवैध कब्जा नाजायज तरीके से कर लिया है।जिसकी शिकायत के बाद भी बीडीए की ओर से कोई क ार्रवाई नहीं की जा रही है।इसको लेकर सामाजिक संघर्ष समिति के मंत्री दीवान चांगरा ने जिला कलक्टर व बीडीए अध्यक्ष को ज्ञापन दिया है।जिसमें अवगत कराया है कि वाल्मिकी समाज की श्मसान भूमि पर अवैध कब्जे को लेकर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संख्या 6 में मुकदमा चल रहा है।इस प्रकरण की अपील लंबित रहने के बावजूद भी प्रताप बस्ती निवासी सलीम मोहम्मद द्वारा वाल्मिकी समाज की श्मसान भूमि पर अवैध कब्जा किया जा रहा है।इतना ही नहीं मौके पर सलीम मोहम्मद ने ईंट व पत्थर आदि पर डलवा रखे है।मजे की बात तो यह है कि यह मुकदमा स्वयं तत्कालीन नगर विकास न्यास के सचिव की ओर से दायर किया गया है।
यूआईटी ने कर रखी है कार्यालय टिप्पणी
उधर दीवान चांगरा की शिकायत के बाद 17 अगस्त 1996 को यूआईटी की ओर से तहसीलदार की रिपोर्ट के आधार पर कार्यालय टिप्पणी में स्पष्ट लिखा है कि वाल्मिकी समाज की श्मसान भूमि पर मो उस्मान ने अवैध कब्जा कर रखा है।उसके बाद चांगरा की ओर से भूखंड़ों के नियमन रद्द करने के पत्र पर भी न्यास की ओर से दोनों पक्षों को कागजात पेश करने के आदेश दिए।परन्तु दोनों पक्ष की ओर कागजात पेश नहीं करने पर फिर से कार्यालय टिप्पणी में नजीर मो,मोहम्मद शरीफ,मो उस्मान,सलीम मो,धन्नु खां व हाजी इस्माइल में से चार जनों के अवैध कब्जा करने की शिकायत सही मानी।साथ ही तहसीलदार ने अवैध कब्जों को तुरंत हटाने के आदेश देते हुए कानूनी कार्यवाही की हिदायत दी।2016 में यूआईटी तहसीलदार की ओर से पुराने रिकार्ड की पड़ताल की तो इसमें पांच बीघा श्मसान भूमि की चार दीवारी बनने की रिपोर्ट दी।
कब्जा मानने के बाद भी यूआईटी ने जारी किये पट्टे
मंजर तो यह है कि 2020 तक हुई मौका रिपोर्ट और कार्यालय टिप्पणी में बार बार वाल्मिकी समाज की श्मसान भूमि पर अवैध कब्जे की बात सामने आने के उपरान्त भी आरोपियों को नगर विकास न्यास की ओर से पट्टे जारी कर दिए गये। इसको लेकर सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने भी 2009 में जिला कलक्टर को कब्जे हटाने के लिये पत्र लिख दिया था।इतनी प्रक्रियाएं होने के बावजूद भी आज तक न तो न्यास की ओर से क ब्जे हटाएं गये और न ही पट्टे निरस्त किये गये है। जो कही न कही यूआईटी में भ्रष्टाचार को उजागर करता है।
गंगाशाही पट्टे होने का दावा
उधर चांगरा ने दावा किया है कि उनके समाज को महाराजा गंगासिंह की ओर से 1924-26 में खसरा संख्या 294,409 पर मेेहतराना नाम से पट्टा दे रखा है।जिसकी जमाबंदी खातोनी ग्राम चकग्रबी पटवार क्षेत्र बीकानेर सम्वत 2045 से 20 तक क ब्रिस्तान खसरा संख्या 409 और 4 बीघा 19 बिस्वा तहसील में दर्ज है। वहीं भूमि का नक्शा भी सन् 1924 के रिकार्ड में दर्ज किया हुआ है।
