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जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद बीजेपी और कांग्रेस में बगावत सामने आई है। इसमें कई पार्षदों के टिकट भी काटे गये है।कई नाराज दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं।निकाय चुनाव में नामांकन का दौर पूरा होते ही सियासत में असली घमासान शुरू हो गया है।टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस और बीजेपी दोनों में भीतर ही भीतर सुलग रहा असंतोष अब बगावत के रूप में सामने आ गया है।लंबे समय से वार्ड में सक्रिय और चुनाव की तैयारियों में जुटे कई दावेदारों के टिकट कटने से दोनों दलों के समीकरण प्रभावित हुए हैं।टिकट से वंचित कुछ प्रभावशाली दावेदारों ने पार्टी से किनारा कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक दी है।ऐसे में कई वार्डों में सीधा मुकाबला अब त्रिकोणीय होने के आसार बन गए हैं।दोनों दलों ने इस बार पुराने चेहरों की जगह बड़ी संख्या में युवा और नए प्रत्याशियों पर दांव खेला है।पार्टी नेतृत्व का यह प्रयोग कितना सफल रहता है,इसका फैसला मतदाता करेंगे।बगावत ने पार्टी संगठन की चिंता बढ़ा दी है।अब दोनों दलों के सामने प्रत्याशियों को जिताने के साथ ही बागियों को साधने की दोहरी चुनौती है।

कई वार्डों का परिणाम प्रभावित करेंगे बागी
नामांकन के बाद अब कई वार्डों में मुकाबला केवल कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं रह गया है। मजबूत जनाधार वाले बागी मैदान में डटे रहे तो वे दोनों प्रमुख दलों के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।खासकर उन वार्डों में जहां जीत-हार का अंतर कम रहता है,वहां बागी प्रत्याशी निर्णायक भूमिका में आ सकते हैं।यही वजह है कि अब नामांकन के बाद दोनों दलों की सबसे बड़ी परीक्षा डैमेज कंट्रोल की होगी। पार्टी नेतृत्व नाराज दावेदारों को मनाने,निर्दलीय पर्चा दाखिल कर चुके प्रत्याशियों को नाम वापस लेने के लिए तैयार करने और उनके समर्थकों को अपने खेमे में बनाए रखने की कवायद में जुटेगा।

नए चेहरों पर दांव, पुराने समीकरणों की परीक्षा
कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने इस बार कई वार्डों में नए और युवा चेहरों को मौका दिया है। कई प्रत्याशी पहली बार नगर निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रहे हैं।पार्टी नेतृत्व का मकसद नए चेहरों के जरिए बदलाव और नई उम्मीद का संदेश देना है।लेकिन चुनावी मैदान में अनुभव और व्यक्तिगत जनसंपर्क भी अहम भूमिका निभाते हैं।

इन बागियों ने ठोकी है ताल
अगर दोनों ही प्रमुख दलों की बात करें तो निवर्तमान पार्षदों ने ज्यादा ताल ठोकी है।इसमें भाजपा पार्षद प्रतीक स्वामी,विकास सियाग,प्रमोद सिंह शेखावत,पार्षद प्रत्याशी विजय बाफना,कांग्रेस से पार्षद जीते प्रफुल्ल हटीला,वसीम फिरोज,शिवशंकर बिस्सा,महेन्द्र बडगुजर शामिल है।वहीं निर्दलिय रमजान कच्छावा,पार्षद प्रतिनिधि वसीम खिलजी प्रमुख है।इसके अलावा 2019 से पहले पार्षद रह चुके दिनेश उपाध्याय,भगवती प्रसाद गौड़,गुड्डी देवी,दीन मो, शहाबुद्दीन भुट्टो,मो ताहिर भी चुनाव मैदान में है। जो टिकट कटने से नाराजगी के चलते चुनाव लड़ रहे है।

बागियों से इन प्रत्याशियों को खतरा ज्यादा
बीकानेर तहलका की टीम ने जब वार्डों का सर्वे किया तो सामने आया है कि जिन वार्डों में बागियों ने ताल ठोकी है।उनमें दोनों ही प्रमुख दलों को खतरा ज्यादा है।इन वार्डों में 2,3,8,11,13,22,23,24,25,26,32,38,43,52,53, 62,63,64, 71,72,73,79,80 प्रमुख है। जहां निर्दलिय उम्मीदवार और पार्टियों के बागी उनके लिये चुनौती बन सकते है।

दो पार्षद एक ही वार्ड से उम्मीदवार
मजे की बात तो यह है कि पिछली बार अलग अलग वार्ड से जीते दो पार्षद इस दफा एक ही वार्ड से आमने-सामने है। बताया जा रहा है कि पिछली बार वार्ड 79 से निर्दलिय चुनाव जीते रमजान कच्छावा इस बार फिर वार्ड 80 से निर्दलिय प्रत्याशी के रूप से चुनाव लड़ रहे है।कच्छावा ने निर्दलिय जीतकर कांग्रेस का समर्थन किया था और इस बार कांग्रेस से टिकट मांगा था।लेकिन उन्हें टिकट नहीं दिया गया।कांग्रेस में संगठन महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन कच्छावा की इस हरकत से पार्टी सकते में है।वहीं वार्ड 80 से कांग्रेस टिकट से विजय हुए वसीम फि रोज भी इसी वार्ड से टिकट कटने से नाराज होकर आम आदमी पार्टी से चुनाव मैदान में उतर गये है।