तहलका न्यूज,बीकानेर। बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा दिनांक 24-01-2026 को आयोजित 21 वीं प्रबंध मंडल बैठक के मिनिट्स ऑफ मीटिंग  27-02-2026 को कुलसचिव एवं कुलपति द्वारा जारी किए गए.
मिनिट्स में BTU-BOM  में यह प्रस्ताव लिया गया कि : “BTU और उसके हिस्से के कॉलेजों के फैकल्टी मेंबर्स के CAS प्रमोशन के लिए 04-01-2026 से 07-01-2026 तक हुई CAS कमेटी की मीटिंग्स की सिफारिशों को मंज़ूरी,मेंबर्स के विचार के लिए। “

उक्त प्रस्ताव के बाद प्रबंध मंडल के सदस्यों ने यह संकल्प लिया गया कि स्क्रीनिंग कम इवैल्यूएशन कमेटी की सिफारिशों वाले सीलबंद लिफाफों को कुछ शर्तों के साथ खोलने की इजाज़त दी बशर्ते कि जिन फैकल्टी मेंबर्स के नाम एनेक्सर A में दिए गए हैं, वे नीचे दी गई शर्तें पूरी करें जो इस प्रकार हैं:-
A) स्क्रीनिंग कम इवैल्यूएशन कमेटी द्वारा कमेटी की सिफारिशों में लगाई गई शर्तों को पूरा करना और उसके सिग्नेचर कमेटी के अनुसार मान्य होंगे। मीटिंग के मिनट्स और लिस्ट में बताई गई टिप्पणी के अधीन।
B) फैकल्टी मेंबर के खिलाफ कोई डिसिप्लिनरी जांच पेंडिंग नहीं होनी चाहिए, न ही उसे ऐसी सज़ा दी जानी चाहिए जिससे रिकमेन्डेशन पर बुरा असर पड़े और फैकल्टी मेंबर को सस्पेंड नहीं किया जाना चाहिए।
C) कोई क्रिमिनल केस, ACD मामला पेंडिंग नहीं होना चाहिए। कोई प्रॉसिक्यूशन सैंक्शन जारी नहीं किया जाना चाहिए और न ही पेंडिंग होना चाहिए, और फैकल्टी मेंबर को किसी क्रिमिनल केस के फैसले के नतीजे में सज़ा या सज़ा नहीं दी गई है।
D) अगर कोर्ट की तरफ से कोई रोक लगाने वाला ऑर्डर/डायरेक्शन/कानूनी रुकावट नहीं है जो स्क्रीनिंग कम इवैल्यूएशन कमेटी पर बुरा असर डालती हो। सिफारिशें।
E) कोई ऑडिट पैरा और फाइनेंशियल ऑर्डर नहीं होना चाहिए जो उस फैकल्टी मेंबर के बारे में स्क्रीनिंग कम इवैल्यूएशन कमेटी की सिफारिशों पर रोक लगाता हो या उन पर बुरा असर डालता हो।
F) संबंधित फैकल्टी मेंबर की सर्विस का कन्फर्मेशन, इस बारे में एलिजिबिलिटी के लिए तय समय से पहले लागू नियमों के अनुसार किया जाना चाहिए।

उक्त शर्तों में शर्त न F में यह शर्त लगाई गई हैं कि CAS से पहले शिक्षकों की सर्विस कन्फर्म होनी चाहिए ।

परंतु 21वीं प्रबंध मंडल के सदस्यों ने अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर के उन व्याख्याताओं को भी प्रमोशन का लाभ दे दिया जिनकी नियुक्ति का विज्ञापन ही 3 साल के अनुबंध पर लेने के लिए निकला था। उस अनुबंध को महावि‌द्यालय एवं सरकार ने 3 साल के बाद आगे नहीं बढ़ाया जिस के कारण यह अनुबंध स्वत ही खारिज हो गया था। खारिज अनुबंध के उपरांत भी अनुबंधित शैक्षणिक कर्मचारियों को आज दिनांक तक नियमित शैक्षणिक कर्मचारियों की तरह पूर्ण वेतनमान एवं सभी वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं। यही नहीं राज्य सरकार द्वारा वेतन मद में अभियांत्रिकी महावि‌द्यालय बीकानेर को एवं अनुबंधात्मक व्याख्याताओं को वेतन मद से दी जा रही ब्लॉक ग्रांट का महावि‌द्यालय ‌द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। यह सब वित्त नियंत्रक को पता होते हुए भी वे सरकार को महाविद्यालय की गलत उपयोगीता प्रमाण पत्र जारी कर रहे हैं।
इस के संबंध में पूर्व में ही कुलसचिव,वित्त नियंत्रक एवं कुलगुरु को इस पूरे मामले को ले कर एडवोकेट मुकुल कृष्ण व्यास के द्वारा लीगल नोटिस भी भेजा था जिस में स्पष्ट तथ्यों के साथ विवरण प्रस्तुत करते हुए उनको इस भ्रष्टाचार से संबंधित आगाह किया था, परंतु संबंधित अधिकारियों ने सभी तथ्यों को दर निकार करते हुए एक बहुत बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम देने में सफल हो गए हैं ।
CAS की लिस्ट में सिरिल न 84 पर अंकित डॉ अमित सोनी की भर्ती भी अनुबंध पर की गई थी,वर्तमान में अनुबंध पर लगे अमित सोनी के पास महाविद्यालय के कुलसचिव का भी चार्ज दे रखा हैं और प्राचार्य के छुट्टी जाने पर प्राचार्य का चार्ज भी इनके पास ही रहता हैं. CAS समिति ने इनके लिए तो यह भी टिप्पणी करी हैं कि 2016 में इन्होंने प्रकाशन से संबंधित झूठी सूचना दी है। कमेटी द्वार टिप्पणी के बाद भी इनको CAS का लाभ दिया जा रहा हैं जो सरकार के नियम विरुद्ध हैं।
झूठी जानकारी के आधार पर इनके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए इनको प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा हैं।
वर्तमान में अभियांत्रिकी महाविद्यालय के प्राचार्य को मामले का संज्ञान हैं और उनको पता हैं कि अब उनको इन अनुबंधात्मक शिक्षकों फिक्सेशन करना पड़ेगा जो को गलत हैं, इसलिए प्राचार्य लम्बी छुट्टी पर गए और चार्ज अमित सोनी को दे गए ।
अमित सोनी अब युद्ध स्तर पर अपना और बाकी अनुबंध पर लगे शिक्षकों का फिक्सेशन करने में लगे हुए हैं ।
अमित सोनी एवं अन्य अनुबंध पर लगे शिक्षक प्रबंध मंडल द्वारा लगाए गई शर्तों में से शर्त न F पूरी नहीं करते हैं ।
उक्त शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही करने के बजाए उनको गलत तथ्यों के आधार पर CAS का लाभ दिया जा रहा ।
संपूर्ण मामला वित्त नियंत्रक,कुलसचिव एवं कुलगुरु के संज्ञान में हैं फिर भी कार्यवाही करने के बजाए भ्रष्टाचार कर रहे हैं ।
इस CAS में भरी वित्तीय लेन देन हुआ हैं इसलिए इसकी इंडिपेंडेंट गहन जांच SOG से करवानी चाहिए जिस से कि सरकार द्वारा दी जा रही ब्लॉक ग्रांट का दुरूपयोग रोका जा सके।