तहलका न्यूज,बीकानेर। जीरो प्रतिशत भ्रष्टाचार मुक्त शासन की बात करने वाली भगवा सरकार के राज में बीकानेर तकनीकी विवि में करोड़ों रूपये का घालमेल कर अपात्रों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। जिसको लेकर विवि के वीसी व रजिस्ट्रार आमने सामने है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस प्रकरण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट का कानूनी नोटिस भी तकनीकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एड मुकुल कृष्ण व्यास की ओर से दिया गया है। इस नोटिस के उपरान्त आनन फानन में राजनेताओं के दबाव में अपात्र सहायक आचार्यों को नियम विरूद्व कैरियर एडवांसमेंट स्कीम की प्रक्रिया के तहत लाभ पहुंचाने की कोशिश में विवि प्रशासन लगा हुआ है।बताया जा रहा है कि बोम की बैठक में भी इस एजेण्ड को टेबल एजेण्डे के रूप में रखकर करोड़ों रूपये की अनियमितता दी जा सकती है। इस संदर्भ में सुरेश कि राडू ने एक ज्ञापन के जरिये कुलगुरू व कुलाधिपति के प्रतिनिधि को आगाह भी किया है। जिसमें किराडू ने स्पष्ट किया है कि विवि प्रशासन द्वारा संचालित पदोन्नित की प्रक्रिया अत्यंत विवादास्पद व विधिक विरूद्व है।क्योंकि जिन सहायक आचार्यों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जारहा है,जिनकी नियुक्तियां और शैक्षणिक योग्यताएं स्वयं में गंभीर विवाद के घेरे में है। उसका बड़ा कारण था कि विवि के वे सहायक आचार्य जो न्यूनतम योग्यता को पूरा नहीं करते थे और बोम में यह अनुमोदित नहीं है।

ये दिया गया है कानूनी नोटिस
उधर राजीव नगर निवासी राजूराम चौधरी ने हाईकोर्ट में एक वाद दायर कर विवि की इस प्रक्रिया पर सवाल उठाएं है। जिसके बाद उनके अधिवक्ता मुकुल कृष्ण व्यास की ओर से कानूनी नोटिस जारी कर विवि के संविधान के विरूद्व की जा रही इस प्रक्रिया का स्पष्टीकरण देने और विधिसम्मत कार्रवाई विवि को करने के लिये कहा है। प्रकरण के अनुसार 2004 में ईसीबी बीकानेर को विभाग की ओर से संविदा पर शैक्षणिक स्टाफ रखने के दिशा निर्देश दिए। जिनकी नियुक्ति अवधि भी तीन वर्ष तय की। जिसके बाद ईसीबी ने सहायक आचार्य पद पर विज्ञापन निकाल कर आवेदन मांगे। तय तिथि के उपरान्त करीब 35 जनों को सहायक आचार्य पद पर नियुक्ति संविदा पर दी गई और उनका कार्यकाल तीन वर्ष रखा गया। मजे की बात तो यह है कि 2009 को इन सभी सहायक आचार्यों का कार्यकाल समाप्त भी हो चुका है। उसके उपरान्त भी विवि की ओर से अपने चेहतों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार को गलत तथ्य देकर करोड़ों रूपयों का चूना लगाया जा रहा है।

ये है बोम बैठक का नियम
पता चला है कि बोम में जिन एजेण्डों पर चर्चा होनी होती है। उनके बिन्दुओं को सात दिन पूर्व तय कर सदस्यों को भेज दिया जाता है। लेकिन विवि प्रशासन ने अप्रात्र सहायक आचार्यों को परिलाभ देने के बिन्दु को इसमें शामिल ही नहीं किया। जब जनवरी में बैठक रखी गई। उसमें टेबल एजेण्डें के रूप में इस बिन्दु को शामिल कर अपत्रों को लाभ का प्रयास किया। किन्तु रजिस्ट्रार की ओर से आपति दर्ज करवाने पर मामला अटक गया। रजिस्ट्रार ने तर्क दिया कि संविदा वालों और लंबित कानूनी प्रक्रिया वालों को इसका लाभ देना संवैधानिक नहीं है। जिसके बाद इसको लेकर पेच फंस गया और अब रजिस्ट्रार पर दबाव बनाकर अपात्रों को लाभ देने की तैयारी की जा रही है।

बोम मिनट्स अब तक नहीं आना,सवालों के घेरे में
सूत्र बताते है कि जनवरी में हुई बैठक को तीन सप्ताह बीत जाने के बाद भी बोम बैठक के मिनट्स अब तक तैयार नहीं किये गये। जो कही न कही सवालों के घेरे में आ रहा है। जो राजनीतिक दबाव के जरिये अपात्रों को लाभ देने की ओर इशारा कर रहा है। बताया जा रहा है कि इसमें वितिय सलाहकार की भूमिका को भी संदिग्ध माना जा रहा है।

अन्य कार्मिकों को पीएफ नहीं,अपात्रों को पदोन्नति
हैरत वाली बात तो यह है कि अन्य संविदा पर लगे अशैक्षणिक कर्मचारियों को विवि प्रशासन की ओर से पीएफ का लाभ नहीं दिया जा रहा है और अपात्रों को पदोन्नति की जल्दबाजी कर रहा है। मंजर यह है कि अनेक बार अशैक्षणिक कर्मचारी अपनी गुहार विवि प्रशासन को लगा चुके है। किन्तु उनके वेतन और पीएफ को लेकर विवि प्रशासन गंभीरता नहीं दिखा रहा। बल्कि अपात्रों के प्रति मेहरबान है।

क्या कहता है नियम
नियमनुसार किसी भी प्रबंध बैठक के सभी प्रमुख मुद्दे,बैठक से पहले ही सभी सदस्यों को भेजे जाते हैं। किसी भी विश्वविद्यालय के व्याख्याताओं को प्रमोशन देना भी एक प्रमुख आइटम था,यह जानते हुए भी कुलपति ने यह मुद्दा आखिरी समय में टेबल एजेंडा में रखते हुए उन व्याख्याताओं को प्रमोशन का लाभ दे दिया जिनकी नियुक्ति ही 3 साल के अनुबंध पर थी और कुछ व्याख्याताओं की नियुक्ति 2013 में एंटी करप्शन ब्यूरो बीकानेर में एफआईआर दर्ज होते हुए 2015 में तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा अभियोजन स्वीकृति जारी हो चुकी हैं।मामला यह हैं कि तकनीकी शिक्षा विभाग,राजस्थान सरकार ‌द्वारा जारी आदेश क्रमांक प.20 (2) त.शि./2003 जयपुर 25 अगस्त 2004 के तहत 3 साल की अनुबंध पर नियुक्ति करने की अनुमति प्रदान की गई थी ।तकनीकी शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा जारी आदेश के तहत अभियांत्रिकी महावि‌द्यालय बीकानेर ‌द्वारा दिनांक 08.07.2005 को विज्ञापन जारी कर उक्त कार्मिकों का 3 साल के अनुबंध पर चयन किया गया था,जिस में अभियांत्रिकी महाविद्यालय बीकानेर में सन 2005 एवं 2006 में अनुबंध के आधार पर व्याख्याताओं की 3 साल के लिए नियुक्ति की गई थी। उस अनुबंध को महावि‌द्यालय एवं सरकार ने 3 साल के बाद आगे नहीं बढ़ाया। जिस के कारण यह अनुबंध स्वत ही खारिज हो गया। खारिज अनुबंध के उपरांत भी अनुबंधित शैक्षणिक कर्मचारियों को आज दिनांक तक नियमित शैक्षणिक कर्मचारियों की तरह पूर्ण वेतनमान एवं सभी वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं। यही नहीं राज्य सरकार द्वारा वेतन मद में अभियांत्रिकी महावि‌द्यालय बीकानेर को एवं अनुबंधात्मक व्याख्याताओं को वेतन मद से दी जा रही ब्लॉक ग्रांट का महावि‌द्यालय ‌द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है।यही नहीं,संघटक कॉलेज यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग-टेक्नोलॉजी, कॉलेज के ऐसे शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ दे दिया हैं। जिनकी वर्तमान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो बीकानेर में मुकदमा दर्ज है (एफआईआर 32/2014,35/2014) मुकदमा ही नहीं इन शिक्षकों की तकनीकी शिक्षा विभाग दुवारा अभियोजन स्वीकृति भी हो चुकी है। इस मामले को ले कर स्थानीय निधि अनक्येशन विभाग ने इस का ऑडिट का परा भी बनाया और रिकवरी के आदेश भी दिए हैं,जो आज दिनाक तक अमल में नहीं लाया गया हैं।