


तहलका न्यूज,बीकानेर।स्कूल एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन सेवा राजस्थान ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी उस आदेश का विरोध किया है जिसमें शिक्षा निदेशक ने लिखा है कि अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन के बीच किसी भी तरह का विवाद हो तो भी टीसी जारी करनी होगी। मुख्यतःविद्यालय प्रबंधन और अभिभावक के बीच विवाद फीस जमा करने को लेकर ही होता है। शिक्षा निदेशक के आदेश अनुसार बिना फीस कराए टीसी जारी की जाए। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अंक तालिका सीधे ऑनलाइन जारी करने का प्रावधान कर दिया है जब से प्रदान किया गया है तब से बच्चे स्कूलों से मूल अंक तालिकाएं नहीं ले जा रहे सीधे ऑनलाइन बोर्ड से मंगवा रहे। ऐसी स्थिति में अभिभावक बकाया फीस जमा नहीं करवाते है। विद्यालयों प्रबंधन और अभिभावकों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। सेवा संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कोडाराम भादू ने शिक्षा निदेशक को लिखे पत्र में मांग किया कि आदेश में संशोधन किया जाए। कि अभिभावक विद्यालय से सभी तरह का नोडयुज प्राप्त करके टीसी प्राप्त करें। सरकारी विद्यालय में अगर ₹5 की कोई किताब होती है या कोई खेल सामग्री बकाया होती है तो इसकी टीसी बिना नोडयुज के नहीं दी जा सकती। अभिभावक के आवेदन पर विद्यार्थियों को टी.सी. जारी कर दी जाए तथा किसी प्रकार के विवाद की स्थिति में भी टी.सी. नहीं रोकी जाएपरंतु वर्तमान परिस्थिति में यह आदेश यह व्यावहारिक है। निजी विद्यालयों के लिए अत्यंत एकतरफा प्रतीत होता है। एक और सरकार द्वारा आरटीई एवं अन्य देय भुगतान समय पर जारी नहीं किए जा रहे हैं, प्री प्राइमरी कक्षाओं को कोर्ट के आदेश के बावजूद आरती के तहत निशुल्क अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर विद्यालयों को बिना बकाया निपटान के टी.सी. जारी करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। इससे निजी विद्यालयों पर दोहरा आर्थिक भार पड़ता है।निजी विद्यालय अपने संसाधनों, शिक्षकों के वेतन, भवन किराया, बिजली-पानी तथा अन्य व्यवस्थाओं का संचालन शुल्क के आधार पर करते हैं। यदि अभिभावक शुल्क जमा किए बिना ही टी.सी. प्राप्त कर लेते हैं, तो विद्यालयों के लिए आर्थिक संतुलन बनाए रखना अत्यंत कठिन हो जाता है।पूर्व में पारित बजट को ट्रेजरी में फॉरवर्ड किए जाने के बाद भी 31 मार्च तक भुगतान का ईसीएस नहीं होने के कारण वह बजट लेप्स हो गया।स्वीकृत बजट होने के बावजूद राशि खातों में जमा नहीं हो सका, जिससे संबंधित निजी विद्यालयों को गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा रहा है। इस संबंध में विचार विमर्श कर आगे की रणनीति बनाने के लिए रविवार को सेवा संगठन की मीटिंग बुलाई गई है।
