

तहलका न्यूज,बीकानेर। रंगों का त्योहार होली की दो दिनों तक धूम रहेगी। सोमवार को जहां होलिका दहन किया जाएगा। वहीं मंगलवार को पूरा जिला सतरंगी चादर ओढ़ेगा। जिसको लेकर होली के रसियो में खासा उत्साह है। सोमवार को दिनभर में बहनें कभी भी अपने भाइयों पर माला घोल सकती है,लेकिन होलिका दहन का मुहुर्त शाम को 6.36 बजे से ही शुरू होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल की प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित काल में करना शास्त्र सम्मत है। इस वर्ष फाल्गुन चतुर्दशी सोमवार को शाम 5.56 बजे तक है। उसके बाद पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। जो तीन मार्च को शाम 5.08 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल में पूर्णिमा होने से दो मार्च को होलिका दहन किया जा सकेगा। इस दिन भद्रा शाम 5.56 बजे से देर रात 5.29 बजे तक रहेगी। जो सर्वथा ताज्य है।दो मार्च को शाम 6.36 बजे से रात नौ बजे तक होलिका दहन करना श्रेष्ठ बताया गया है। भद्रा पुच्छ काल रात 12.51 बजे से मध्य रात्रि 2.01 बजे तक रहेगा। होलिका दहन इस समय के बीच में भी किया जा सकता है। वहीं तीन मार्च अलसुबह 4 बजकर 6 मिनट के बाद भी होलिका दहन का समय बताया गया है।पंडित राजेंद्र किराडू का कहना है कि होली दो मार्च को और धुलंडी तीन मार्च को रहेगी। उन्होंने तीन तरह का विधान है। इसमें प्रदोष काल, भद्रा का पुच्छ काल और भद्रा की समाप्ति का है। तीनों ही समय में होलिका दहन हो सकता है। देश के सभी पंचांगों में तीन मार्च को ही धुलंडी रहेगी।धुलंडी के दिन चंद्रग्रहण रहेगा, लेकिन इसका होली खेलने पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ये ग्रहण दोपहर बाद शुरू होकर शाम तक रहेगा।
तीन मार्च से गणगौर पूजन
उधर 16 दिवसीय गणगौर पूजन भी मंगलवार से शुरू हो जाएगा। कुंवारी कन्याएं अच्छे वर तथा घर के लिये तथा महिलाएं परिवार की सुख समृद्धि के लिये 16 दिनों तक गणगौर का पूजन करेगी।
