
तहलका न्यूज,बीकानेर।लगातार कार्मिकों के कियाक्रलापों से विवादों में आ रही पीबीएम अस्पताल में लापरवाही का एक ओर मामला सामने आया है। जिसमें मरीज की जान पर बन आई है।मंजर यह है कि इस मामले में चिकित्सक अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे है। बताया जा रहा है कि 19 दिसम्बर को सुजानदेसर निवासी दिव्या गहलोत को दो माह प्रेगेन्सी के चलते रक्त स्त्राव की शिकायत के बाद जनाना अस्पताल में परिजन दिखाने ले गये।जहां डॉ संतोष खजोटिया ने सोनोग्राफी के बाद परिजनों को बताया बच्चे की धड़कन नहीं होने की वजह से प्रसूता की डीएमसी करनी पड़ेगी।परिजनों की सहमति के बाद दिव्या के ऑपरेशन कर दिया गया। एक दिन भर्ती रखने के बाद दिव्या को छुट्टी दे दी गई। लेकिन एक जनवरी को फिर से दिव्या के रक्त स्त्राव की शिकायत हुई। बाद में फिर डॉ खजोटिया को चैक करवाया गया। जांच के बाद दिव्या को घर भेज दिया गया।परिजनों के अनुसार रविवार को एक बार फिर दिव्या के रक्तस्त्राव हुआ। तो डॉ खजोटिया से स ंपर्क कर जांच की गई।जिस पर डॉ खजोटिया ने परिजनों को गर्भ में एक ओर भू्रण होने की बात कही। इस पर परिजन नाराज हो गये और शिकायत करने लगे कि पहली बार में आप को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी।अब पन्द्रह दिनों में दोबार ऑपरेशन करना मरीज की जान पर बन जाएगा।परिजनों ने इसकी शिकायत पीबीएम अधीक्षक डॉ बी सी घीया से की तो मामला सामने आया। पता चला है कि अब चिकित्सक डॉ खजोटिया इस बात को स्वीकार नहीं कर रही है और लापरवाही को छिपाने के लिये परिजनों को दबाव बना रही है।इस घटना का जैसे ही भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ भगवान सिंह मेड़तिया,युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष वेद व्यास, जसराज सिंवर, विक्रम सिंह राजपुरोहित, भव्यदत्त भाटी को पता चला तो वेद व्यास,ने तुरंत इस विषय का संज्ञान लेते हुए डॉ संतोष ख़जौटियां से फोन पर वार्ता की तो डॉ के द्वारा कोई संतुष्ट प्रद जवाब नहीं दिया गया और फोन काट दिया गया।भाजपा पूर्व जिला उपाध्यक्ष डॉ भगवान सिंह मेड़तिया ने पीबीएम प्रिंसिपल डॉ सुरेन्द्र वर्मा से वार्ता की ओर कहां को 15 दिन में दो बार सर्जरी कहा तक मुमकिन है साथ ही इस विषय को गंभीरता से लेने और लापरवाही करने वाले डॉ पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने और मरीज को अच्छा इलाज करने को कहा।
आखिर कब तक होती रहेगी मरीजों के जान से खिलवाड़
पीबीएम अस्पताल में विगत एक माह में गंभीर लापरवाही का यह तीसरा मामला है।कैंसर अस्पताल में मरीज के गलत ग्रुप का खून चढ़ाने के बाद एक विवाहिता के कीमो के उपरान्त तबीयत बिगडऩे जैसे मामले पहले भी हो चुके है। उसके बाद भी न तो जिला प्रशासन और न ही पीबीएम प्रशासन इसको लेकर गंभीर है। ऐसे में आखिर कब तक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होता रहेगा।
