तहलका न्यूज,बीकानेर। महिलाओं की इज्जत का ढिढोरा पिटने और 33 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी के जिम्मेदार मंत्री महिलाओं के प्रति कितने मानवीय है। इसका जीता जागता उदाहरण गुरूवार को बीकानेर में देखने को मिला। जब कलक्टर सभागार में पत्रकारों से रूबरू होते हुए प्रदेश के चिकित्सा मंत्री व जिले के प्रभारी गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ सुरेन्द्र वर्मा से यह प्रश्न कर डाला कि बताएं प्रिसिंपल साहब जिन 5 प्रसूताओं का पीबीएम के आईसीयू में इलाज चल रहा है। वो नाचते आई थी या पैदल चलकर। प्रभारी मंत्री के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। अब विपक्ष प्रभारी मंत्री पर आरोप लगा रहा है कि मानवीय संवेदनाओं की बातें करने वाले गजेन्द्र सिंह खींवसर सता के मद में यह भूल गये है कि प्रसूताएं इस परिस्थितियों नाचते कैसे आ सकती है। सतापक्ष के मंत्री और विधायकों के बड़बोलेपन उनके अंहकार को उजागर कर रहे है। जब मौजूद संवाददाताओं ने खी ंवसर को इस प्रकार के प्रश्न का जबाब देने को कहा तो वे प्रश्न को टाल गये और मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को आगे करते हुए इस पूरे प्रकरण पर सफाई देने को कहा। इतना ही नहीं इस दौरान उन्होंने यहां तक कह दिया कि शुक्र मानों की वे पीबीएम अस्पताल पहुंच गये तब उनकी जान बच गई। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि ग्रामीण अंचलों की अधिकांश प्रसूताएं थी। जहां उनका अच्छा इलाज नहीं हुआ। इसी वजह से गंभीर हालात में वे पीबीएम रैफर होकर आई।
मैं रहूं या न रहूं……..बोले डॉ सुरेन्द्र वर्मा
उधर जब प्रेस वार्ता के दौरान जब मंत्री ने इस पूरे मामले पर चिकित्सकीय बीमारियों के चलते सफाई देने को कहा तो उन्होंने मंत्री के सामने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि मैं इस पद पर रहूं या ना रहूं…….। इस प्रकार के संदेश की गूंज भी कलक्टर के गलियारों में खूब गूंजी। प्रेस वार्ता के बाद अनेक पत्रकार उनको यह पूछते नजर आएं कि इस संदेश का क्या भावार्थ था। जिस पर उन्होंने हंसकर बात टाल दी। ऐसे में अब मेडिकल क ॉलेज प्राचार्य के इस स्टेटमेंट को किन अर्थों में लिया जाना चाहिए यह भी सवाल उठने लगे है।
किडनी फेल मामले में डॉक्टर्स को क्लीन चिट! पीबीएम
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि जोधपुर से मंगलवार को बीकानेर पहुंची 6 डॉक्टर्स की टीम ने अपनी जांच पूरी कर ली है। भर्ती सभी 5 महिलाओं की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। कुछ महिलाओं को यूरिनल इश्यूज हुए थे,लेकिन अब उनकी तबीयत में सुधार है। सिर्फ प्रीति नाम की मरीज की हालत अभी तक गंभीर है, जिसकी प्रॉपर मॉनिटरिंग की जा रही है और हर ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। जांच टीम ने सैंपल भी कलेक्ट किए है, उनकी रिपोर्ट का इंतजार है। हॉस्पिटल प्रशासन की ओर से अभी तक लापरवाही सामने नहीं आई है।सिजेरियन डिलीवरी के बाद प्रसूताओं को बाजार से मंगवाए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन लगाए थे। इसके बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ती गई। मामले में राज्य सरकार के स्तर पर 2 जांच कमेटी भी बनाई गई है,जिसमें जोधपुर मेडिकल कॉलेज की टीम पीबीएम हॉस्पिटल में जांच कर बुधवार को लौट गई। वहीं ड्रग कंट्रोलर की कमेटी फिलहाल जांच कर रही है। ऐसे में क्या अब ये माना जाएं कि इस मामले में चिकित्सकों को सरकार की ओर से क्लीन चिट दे दी गई।
5 महिलाओं की किडनी हुई फेल
हॉस्पिटल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 5 महिलाओं की किडनी फेल हो गई थी। हालात इतने बिगड़े कि प्रसूताओं की कई बार डायलिसिस की गई। सभी को आईसीयू में शिफ्ट किया गया है। इनमें तारा देवी (27),शारदा (26),राहिला (19) और इमरती (20) की हालत में सुधार है,जबकि प्रीति (20) की हालत अभी भी गंभीर है।
जांच टीमें बनाई गई
