

तहलका न्यूज,बीकानेर।पुष्करणा सावा के अवसर पर स्थानीय रत्ताणी व्यासों की बगेची में बटुकों का सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार हुआ। इस दौरान 41 बटुकों का उपनयन संस्कार हुआ।पंडित पं प्रहलाद व्यास के आचार्यत्व में हुए सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार के दौरान वेदपाठी पंडि़तों के सामूहिक मंत्रोचारण के बीच भगवान गणेश,षोडश मातृका,ब्रह्मा,नवग्रह और वेद माता गायत्री माता का पूजन हुआ।अरणि मंथन से अग्नि प्रकट की गई।अग्नि देवता का पूजन हुआ।बटुकों ने मंत्रोच्चारण के बीच हवन में आहुतियां दीं।यज्ञाचार्य की ओर से नव विप्रजनों को यज्ञोपवीत एवं गुरु मंत्र दिया गया।यज्ञोपवीत संस्कार की पारंपरिक रस्मों के अनुसार बटुकों ने अपने माता-पिता सहित परिवारजनों से भिक्षा प्राप्त करने,काशी के लिए दौड़ लगाने की रस्मों का निर्वहन किया।बटुकों ने यज्ञशाला से ईदगाह बारी बाहर स्थित मुख्य द्वार तक दौड़ लगाई। दौड़ लगाने के बाद बटुकों के परिवारजन बटुकों को पुन: यज्ञोपवीत स्थल पर पारंपरिक मांगलिक गीतों का गायन करते हुए लेकर पहुंचे।यज्ञोपवीत संस्कार के दौरान महिलाओं ने मांगलिक गीतों का गायन किया। इस दौरान बटुकों के परिवारजन और समाज के लोग मौजूद रहे।आयोजन से जुड़े पं पंकज व्यास ने बताया कि कम खर्च में अधिक मांगलिक कार्य संपन्न करवाने के उद्देश्य को लेकर समिति की ओर से सामूहिक यज्ञोपवीत संस्कार का आयोजन किया जाता है। इस दौरान मायरा,देराड़ी और प्रीतिभोज नहीं करने की अपील की जाती है।इस मौके पर गौरीशंकर पुरोहित,पं राजीव व्यास,पं ब्रह्मदेव व्यास और पं मदन पुरोहित ने मंत्रोचारण किया।
फिजूलखर्ची रोकने की कोशिश
दरअसल,बीकानेर के पुष्करणा समाज में यज्ञोपवित संस्कार पर भी विवाह जितना ही खर्च करने की परम्परा चल पड़ी है।ऐसे में मायरा, देराळी सहित अनेक खर्चों पर रोक लगाते हुए सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार करवाया जा रहा है।ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार फिजूलखर्ची से बच रहे हैं।
