
तहलका न्यूज,बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में निजी एजेंसी के माध्यम से लगे सुरक्षाकर्मी ने का आन्दोलन गुरूवार को भी जारी रहा। गुरूवार को आन्दोलन का समर्थन करते हुए कम्प्यूटर ऑपरेटर व अटेन्टेंट भी शामिल हुए। अपनी मांगों को लेकर जिला कलक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए इनका कहना है कि उन्हें न तो समय पर वेतन मिल रहा है और न ही अन्य सुविधाएं मिल रही है। इस संबंध में अस्पताल प्रशासन को अवगत करवाने के बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें विरोध प्रदर्शन करने पर मजबूर होना पड रहा है।सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि पिछले लंबे समय से उनके वेतन में भी कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। नई कंपनी सात हजार रुपए दे रही है जबकि इससे पहले साढ़े सात हजार रुपए मिल रहे थे। हमारी मांग है कि वेतन बढ़ाया जाए लेकिन उलटे वेतन घटाया जा रहा है। कर्मचारियों ने कहा कि निजी एजेंसी मनमर्जी से डयूटी करवा रहे हैं। पीएफ और ईएसआई भी नहीं काटा जा रहा है। गार्डों का आरोप है कि वे गजेन्द्र सिक्यूरिटीज फर्म के तहत काम कर रहे थे, लेकिन उनका वेतन अब तक बकाया है। वहीं,अप्रैल माह से ठेका नई फर्म को दिए जाने के बाद उन्हें महज 7 हजार रुपये वेतन देने की बात कही जा रही है,जिसे उन्होंने अस्वीकार्य बताया है।प्रदर्शन के दौरान गार्डों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पीबी एम अस्पताल अब पूरी तरह से राजनीति की भेंट चढ़ता जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का जल्द समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
आप ने दिया आन्दोलन को समर्थन
उधर आम आदमी पार्टी ने आन्दोलन का समर्थन करते हुए कलेक्ट्रेट पर किये प्रदर्शन में शामिल हुए। जिला महासचिव प्रोफेसर सलवीर समेजा एवं विंग जिला अध्यक्ष महावीर प्रसाद ने इस मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से उठाते हुए कहा कि यह सिर्फ वेतन का नहीं, बल्कि हर गार्ड के परिवार की रोटी, बच्चों की पढ़ाई और सम्मानजनक जीवन का सवाल है।नेताओं ने कहा कि वर्तमान में गार्ड को कागजों में 8145 रुपये वेतन दिया जाता है, लेकिन कटौतियों के बाद उनके हाथ में मात्र 7000-7010 रुपये ही आते हैं। 26 दिन की ड्यूटी,लंबी शिफ्ट और लगातार जिम्मेदारी के बावजूद इतनी कम सैलरी में एक परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल है। इन्होंने कहा कि पीबीएम में तैनात सुरक्षा गार्ड आज केवल ड्यूटी नहीं निभा रहे,बल्कि अपने परिवार के भविष्य की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। दिन-रात अस्पताल की सुरक्षा संभालने वाले ये गार्ड खुद आर्थिक असुरक्षा में जीने को मजबूर हैं।
कंपनी को लेकर सोशल मीडिया पर नेगेटिव छवि
इधर पन्नाधाय कंपनी को लेकर सोशल मीडिया पर इस कंपनी की नकारात्मक छवि बनी हुई है। पन्नाधाय सिक्योरटी सर्विसेज नाम पेज पर इस कंपनी में काम कर चुके कार्मिकों ने स्पष्ट लिखा हुआ है कि यह कंपनी सैलरी समय पर नहीं देती। हमेशा परेशान करती रहती है। हालत यह है कि फोन करने पर फोन तक नहीं उठाते है। एक कार्मिक ने लिखा है कि थर्ड क्लास का सिस्टम है इस कंपनी का। मजे की बात तो यह है कि स्थानीय भाजपा विधायक भी विधानसभा में इस कंपनी के बारे में अपना विरोध दर्ज करवा चुके है। उसके बाद भी कंपनी को ठेका मिलना सरकार के सिस्टम पर सवाल उठाता है।

