तहलका न्यूज,बीकानेर। माता ए म्हारे टाबरियों रे ठंड रा झाला देवो ए सरीखे भजनों से श्रद्धालुओं ने शीतला माता से बच्चों के स्वास्थ्य की कामना की। शीतलाष्टमी पर शीतला माता का जलाभिषेक किया गया। पूजा-अर्चना के बाद घरों में बनाए गए पकवानों,खाद्य सामग्री व नमक का भोग माताजी के लगाया गया। घरों में महिलाओं ने नई मटकी का पूजन किया। मटकी के ऊपर गर्धभ की आकृति उकेर कर पूजा-अर्चना की। कई स्थानों पर गर्धभ पूजन भी किया गया। पूजन के बाद घरों में बनाए गए पकवानों(बास्योडा) का सेवन किया। इसके बाद ही चूल्हा जलाया गया। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी ने पहले बासी भोजन का ग्रास लिया इसके बाद चाय-दूध का सेवन किया।

राबड़ी-बाजरे की रोटी
मान्यता के अनुसार शीतलाष्टमी से घरों खानपान बदल जाता है। इस पर्व पर एक दिन पहले पकाए गए भोजन का सेवन दूसरे दिन करते हैं। इसमें मुख्य रूप से बाजरे के आटे से बनी राबड़ी,गुड राबड़ी,बाजरे आटे की रोटी,बेसन की पुडिय़ां,सांगरी,ग्वारपाटा की सब्जी,दही इत्यादि के सेवन का महत्व है।

यहां भरा मेला
शीतला गेट के अंदर स्थित प्राचीन शीतलाष्टमी मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रही। मंदिर के बाहर मेला भरा। जहां महिलाओं और बच्चों ने खान-पान के साथ ही झुलों का लुत्फ उठाया। इस दौरान मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ रही।शीतला गेट स्थित प्राचीन मंदिर में शीतला माता के पानी, नमक और बासी भोजन चढ़ाया गया। लोगों ने शीतला माता की प्रतिमा का जलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिर में दर्शन करने के लिए सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतारें रही।मंदिर के बाहर झूले, खाने-पीने, खिलौनों की अस्थायी दुकानें सजी। महिलओं-बच्चों ने झूलों का लुत्फ उठाया। वहीं मरुनायक चौक स्थित शीतला माता के प्राचीन मंदिर में भी पूजा-अर्चना की गई। जलाभिषेक कर बच्चों के कुशल स्वास्थ्य की कामना की।

सुन के दया करो विनय मोरी खास

शीतला अष्टमी पर शहर में तीन स्थानों पर रम्मतों का मंचन हुआ। बारह गुवाड़ चौक फूंभड़ा पाटे के समीप शीतला माता स्वांग मेहरी रम्मत का मंचन हुआ। अखाड़े में शीतला स्वरूप और गणेश स्वरूप के अवतरण और स्तुति गान के साथ रम्मत का आगाज हुआ। बोहरा-बोहरी, जाट-जाटणी पात्रों ने अच्छे जमाने की कामना की। उस्ताद बंशी महाराज और पुजारी बाबा के सानिध्य में मंचित हुई रम्मत में मां शीतला का स्तुति गान किया गया। इस दौरान कलाकारों ने शीतला माता का स्तुति गान किया। कलाकारों ने लावणी, चौमासा और ख्याल गीत गाए।

सुनारों की गुवाड़ में स्वांग मेहरी रम्मत
सुनारों की गुवाड़ में मध्यरात्रि बाद उस्ताद हीरालाल की स्वांग मेहरी रम्मत का आगाज मां भगवती स्वरूप के अवतरण के साथ हुआ। जोशी-जोशण स्वांग पात्रों ने अच्छे जमाने की कामना की। गणेश स्वरूप के अवतरण के साथ वंदना की गई। रम्मत के वरिष्ठ कलाकारा ज्ञानू मीनाकार के निर्देशन में मंचित हुई रम्मत में लावणी,चौमासा और ख्याल गीत गाए गए। मेहरी पात्रों ने नृत्य प्रस्तुत किए। जिसमें अनेक कलाकारों ने भूमिका निभाई।

अमर सिंह राठौड़ रम्मत का मंचन
लक्ष्मीनाथ घाटी स्थित सैन मण्डी में वीर रस प्रधान अमर सिंह राठौड़ रम्मत का मंचन हुआ। जोगमाया स्वरूप के अखाड़े में अवतरण के साथ रम्मत की शुरूआत हुई। उस्ताद आनन्द शंकर के सानिध्य में मंचित हुई रम्मत में राठौड से जुड़े प्रसंगों का प्रस्तुतिकरण ख्याल चौमासे के जरिये किया।