तहलका न्यूज,बीकानेर।परिवार न्यायालय संख्या 3 के पीठासीन अधिकारी अशोक चौधरी ने नाबालिग बालिका की अभिरक्षा को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।न्यायालय ने सुनवाई करते हुए बालिका की शरीरिक अभिरक्षा प्रार्थीनी लीला एवं पुष्पा देवी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश बालिका के सर्वोपरि हित और कल्याण को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया।परिवार न्यायालय में प्रस्तुत याचिका के अनुसार,प्रार्थीनी लीला बालिका की माता तथा पुष्पा देवी उसकी नानी हैं।याचिका में बताया गया कि 29 नवंबर 2024 को अप्रार्थी सुरजाराम कथित रूप से जबरन उसके घर में घुसकर नाबालिग बालिका को अपने साथ ले गया था।इसके बाद बालिका की अभिरक्षा को लेकर न्यायालय की शरण ली गई।मामले की सुनवाई के दौरान सुरजाराम न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ,जिस पर उसके विरुद्ध एकपक्षीय कार्यवाही की गई।न्यायालय ने मां-नानी की ओर से प्रस्तुत तर्कों और पत्रावली के अवलोकन के बाद याचिका को स्वीकार करते हुए आदेश पारित किया।न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नाबालिग बालिका का कल्याण सर्वोपरि है और वर्तमान परिस्थितियों में उसकी अभिरक्षा मां और नानी को सौंपना न्यायोचित है।मामले की गंभीर प्रवृत्ति को देखते हुए कोर्ट ने गंगाशहर थानाधिकारी को नोटिस जारी करते हुए सुरजाराम से बालिका को बरामद कर 15 दिवस के भीतर बालिका की अभिरक्षा मां-नानी को सौंपने को कहा।जिस पर गंगाशहर पुलिस बालिका को बरामद करने के लिए सुरजाराम के जोधपुर स्थित ठिकानों पर दबिश दी लेकिन पुलिस को चकमा देकर सुरजाराम बच्ची को लेकर फरार हो गया। जिस पर मां ओर नानी ने शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक कावेंद्र सिंह सागर से मिलकर बालिका को बरामद करने की गुहार लगाई है।अब देखना है कि आखिर पुलिस बालिका को कब तक बरामद करती है। मां-नानी की ओर से पैरवी अधिवक्ता अनिल सोनी ने की।