

तहलका न्यूज,बीकानेर। होली के साथ ही पूरा शहर अब होली के उत्साह में रंगने लगा है। शनिवार को हर्ष व व्यास जाति का डोलची खेल हुआ। वहीं अलसुबह कीकाणी व्यासों के चौक में खेली गई जमनादास कल्ला की रम्मत में कृष्ण राधिका पर पुष्प वर्षा का मनोहर दृश्य का मंचन हुआ।म्हारी राय भवानी जागे जोगण जागे… लटियाल एक झाडले री रे…राय जोगण जागे। कीकाणी व्यासों के चौक में शुक्रवार को मध्य रात्रि बाद जब लटियाल माता गोपाल ओझा का अवतरण हुआ तो चहुंओर माता के जयकारे गूंज उठे। सैकड़ों लोगों ने लटियाल माता के दर्शन कर धोक लगाई। बच्चों के कुशल मंगल की कामना की।आयोजित जमनादास कल्ला की ख्याल चौमासों पर आधारित स्वांग मेहरी रम्मत के मंचन का। शनिवार सुबह लटियाल कला केन्द्र द्वारा कीकाणी व्यासों के चौक में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन उस्ताद जमना दास कल्ला के अखाड़े में किया गया,जिसमें हंसी-ठिठोली के गीत-नृत्यों की प्रस्तुतियां कलाकारों द्वारा दी गई। कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने खूब दाद बटोरी। कलाकार आशीष के अगुवाई में कृष्ण-राधा की पुष्पों की होली की सजीव झांकी ने वाही वाही लूटी। खाने-पीने व खिलौनों की अस्थाई दुकानों से चौक अट गया। ख्याल-चौमासे सुनने के लिए घरों की छतों पर बड़ी संख्या लोगों का जमावड़ा रहा। कार्यक्रम में आशीष कल्ला एंड पार्टी ने खूब दाद बटोरी। वहीं पार परिक रूप से राधा-कृष्ण की चुहलबाजी तथा पुष्प होली ने श्रद्धामय माहौल प्रदर्शित किया। की रम्मत में मदन गोपाल व्यास,रामकिशन व्यास,शत्रुघ्न ओझा,मुकेश कल्ला,सूर्यप्रकाश,ख्याल चौमासा रचयिता झम्मू मस्तान,पूनमचंद,सुनील ओझा,सत्यनारायण ओझा,प्रेमनारायण चुरा,शंकर ओझा,रवि ओझा,दिनेश ओझा,जुगल ओझा,श्यामसुंदर ओझा,नगाड़ा वादक बंटी शरद,मनोज,मनमोहन ओझा,मयूर गोवर्धन और चूचू ने अहम भूमिका निभाई।
पानी का डोलची मार खेल
हर्ष व व्यास जाति केलोगों तथा उनके सगे संबंधियों के बीच हर्षों की ढाल पर परंपरागत पानी का डोलची मार खेल खेला गया। दोनों ही जाति के लोग एक दूसरे की पीठ पर डोलची से वार कर रहे थे और उत्साह से ये मारा वो लगा का उद्ïबोधन भी करते नजर आये। इस खेल में हर आयु वर्ग के सजातीय बंधुओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। इस अनूठे आयोजन को देखने के लिये घरों पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटी। लगभग दो घंटे तक चले इस पारंपरिक खेल में व्यास जाति के लोग गेर के रूप में हर्षों की ढाल पर पहुंचे और उन्होंने हर्ष जाति के लोगों को डोलची खेल के लिए आमंत्रित किया। खेल समाप्ति पर हर्ष जाति के लोगों ने गुलाल उछाली और इस खेल के समाप्ति की घोषणा की तदपरांत गेवरियों ने पारंपरिक लोकगीत गाये।
स्वांग मैरी रम्मत का मंचन
उस्ताद बंशी महाराज ओझा के निर्देशन में मंचित हुई रम्मत में ख्याल,लावणी तथा चौमास गीतों की प्रस्तुतियां दी गई। रम्मत का शुभारंभ भगवान गणेश के अखाड़े में अवतरण के साथ हुआ। तत्पश्चात जाट-जाटणी, बोहरा-बोहरी, खाकी पात्रों द्वारा पार परिक गीतों के माध्यम से हास्य रस बिखेर गया। ख्याल गीत में बेरोजगारी,मंहगाई,भ्रष्टाचार,आतंकवाद,आरक्षण आदि पर करारे व्यंग्य किये गये। चौमासा गीत में सजनी द्वारा साजन से चौमासा ऋतु में परदेस न जाने की मनुहार तथा लावणी गीत में नारी के सौन्दर्य व श्रृंगार का विलक्षण वर्णन किया गया।

