
तहलका न्यूज,बीकानेर। बीकानेर तकनीकी विवि में उपाधियां बांटने आ रहे राज्यपाल के स्वागत में किसी प्रकार की कोई कमी न रहे। इसकी तैयारियां जोर शोर से की जा रही है। उनकी अगुवाई से लेकर उनके रवानगी तक की जिम्मेदारियां कुलगुरू की ओर से अलग अलग व्याख्याताओं को सौंपी भी गई है। जिसके आदेश भी निकाल दिए गये है। किन्तु दुर्भाग्य की बात तो यह है कि राज्यपाल की अगुवाई करने वालों में ऐसे व्याख्याता भी शामिल है जो स्वयं विवादों के घेरे में है और उनके खिलाफ स्वयं राज्यपाल ने आदेश देकर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हुए है। परन्तु 6 माह बीत जाने के बाद भी राज्यपाल के ये आदेश हवा हो रहे है। जिसके चलते ऐसा प्रतीत होता है कि कुलाधिपति व सरकार से उपर तकनीकी विवि के रजिस्ट्रार व वित्त नियंत्रक है। जो कुलगुरू की सरफरस्ती में करोड़ों रूपये के घोटाले पर पर्दा डाले हुए है। बताया जा रहा है कि एक अगस्त 2025 को राज भवन से अभियांत्रिक महाविद्यालय द्वारा 2005-2006 में तीन साल के अनुबंध पर भर्ती शैक्षणिक कार्मिकों को दिए जा रहे अनियमित वेतन के कारणों को स्पष्ट करने की हिदायत दी गई थी। वहीं वित्त विभाग की ओर से 22 अगस्त को एक पत्र भेजकर 31 कार्मिकों को दिए गये 70 करोड़ रूपये के अनियमित वेतन के संबंध में राजभवन को तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गये थे। परन्तु इन दोनों की पत्रों को बीकानेर तकनीकी विवि के उच्चाधिकारियों ने फाइलों में दफन कर दिया। जिसके चलते आज दिनांक तक राजभवन व तकनीकी विभाग को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है और घोटाले में शामिल लोगों पर किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
राज्यपाल लेंगे संज्ञान
अब सवाल ये उठता है कि 6 माह पहले जिन लोगों के खिलाफ शिकायती पत्र राजभवन तक पहुंचा था और जिसमें करोड़ों रूपये के घोटाले का जिक्र भी सामने आया था। क्या अब उसी घोटाले वाली संस्था के दीक्षांत समारोह में शामिल होने आ रहे राज्यपाल इस प्रकरण का संज्ञान लेकर इसमें संलिप्त रजिस्ट्रार व वित्त नियंत्रक पर एक्शन लेंगे।
अनुबंध समाप्ति के बाद भी अब तक वेतन उठा रहे कार्मिक करेंगे खुशामदीद
मजे की बात तो यह है जिन कार्मिकों की शिकायत राजभवन से लेकर न्यायालय तक विचाराधीन है। वे कार्मिक बीकानेर आगमन पर राज्यपाल की अगुवाई व सत्कार में जुटेंगे। इनमें एक तो कार्मिक ऐसा है,जिनके खिलाफ गलत तथ्य प्रस्तुत करने की बोम में टिप्पणी भी की जा चुकी है। अब उसी डॉ अमित सोनी को टिप्पणी करने वाले रजिस्ट्रार ने अहम जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में दोहरी प्रणाली से काम कामकाज कर रहे तकनीकी विवि के उच्चाधिकारी न केवल सरकार को बल्कि राजभवन को भी भ्रमित कर रहे है।
