तहलका न्यूज,बीकानेर। शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान अर्हम् इंग्लिश एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में अब वर्तमान शिक्षा पाठ्यक्रम के साथ साथ भारतीय परंपराओं,योग,आयुर्वेद,भारतीय दर्शन और वेदों की शिक्षा भी दी जायेगी।ऐसी शिक्षा पद्धति से अध्यापन करवाने वाला यह बीकानेर का पहला स्कूल होगा।जिसे भारतीय शिक्षा बोर्ड से अधिकारिक संबद्धता प्राप्त हुई है।पत्रकारों को जानकारी देते हुए स्कूल के संस्थापक सचिव सुरेन्द्र डागा ने बताया कि भारत वर्ष में 1128 स्कूल भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त है।डागा ने बताया कि विद्यार्थियों को विदेशी भाषाओं को भी पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप शामिल किये गये है।इसके साथ योग,प्राणायाम,देशी खेलों को प्राथमिकता से स्कूल गतिविधियों में शामिल किया गया है।इससे विद्यार्थियों को न केवल अकादमिक ज्ञान मिलेगा बल्कि वे अपने जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक शिक्षा भी ग्रहण कर पायेगें। इससे विद्यार्थियों को भविष्य में आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता का अहसास भी होगा।खास बात तो यह है कि भारतीय शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रमों में पुस्तकों के नाम भारतीय नक्षत्रों के नाम से,कक्षा कक्षों के नाम भारतीय ऋषियों,स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों,श्रेष्ठ विद्वानों के नाम से रखे जायेगें।भारतीय शिक्षा बोर्ड का पाठ्यक्रम इस प्रकार तैयार किया गया है कि यह विद्यार्थियों को आईएएस,आईपीएस,बैंकिंग,रेलवे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करता है। इसमें सामान्य ज्ञान,करंट अफेयर्स,तर्कशक्ति और गणित जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।इसके साथ ही भारतीय इतिहास,संविधान और सामाजिक संरचना के अध्ययन से छात्र एकमजबूत बौद्धिक आधार बना सकते हैं। इससे उन्हें न केवल प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता मिलती है,बल्कि वे अपने करियर में भी आगे बढ़ सकते हैं।पत्रकार वार्ता में रेणू चुग,जगदीश चुग,करण सिंह,आरती भी मौजूद रहे।

 विद्यार्थी ग्रहण करेगें योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन और वेदों की शिक्षा
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अर्हम् इंग्लिश एकेडमी के चेयरपर्सन सुनील रामावत ने बताया कि भारतीय शिक्षा बोर्ड भारत सरकार द्वारा स्थापित एक केंद्रीय स्तर का शिक्षा बोर्ड है,जिसका उद्देश्य देश में शिक्षा को भारतीय संस्कृति,परंपरा और नैतिक मूल्यों के अनुरूप विकसित करना है। यह बोर्ड विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जोडऩे का कार्य कर रहा है। रामावत ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा उत्तीर्ण करना नहीं,बल्कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास एवं रोजगाार मूलक शिक्षा देने को सुनिश्चित करना होना चाहिए।भारतीय शिक्षा बोर्ड इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और संस्कारयुक्त शिक्षा प्रणाली प्रदान कर रहा है।नई शिक्षा नीति के अनुरूप इसमें कौशल आधारित शिक्षा पर भी ध्यान दिया गया है। इससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास होता है। भारतीय शिक्षा बोर्ड शिक्षा को भारतीय दृष्टिकोण से मजबूत करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
मेरा सपना हुआ साकार- डागा
विद्यालय के संस्थापक सचिव डागा ने बताया कि अर्हम इंग्लिश एकेडमी बीकानेर का पहला ऐसा आधुनिक गुरुकुल बनने जा रहा है,जिसे भारतीय शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त हुई है।यह संस्था आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय परंपराओं और सा ंस्कृतिक मूल्यों को भी समान महत्व देगी। डागा ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि उनका सपना था कि उनके स्कूल के विद्यार्थियों को भारत दर्शन और सनातन संस्कारों की शिक्षा मिले,शिक्षकों में विद्यार्थियों को श्रेष्ठ से श्रेष्ठतर शिक्षा देने का जुनून हो व अविभावकों को अपने नौनिहालों को भविष्य का श्रेष्ठ नागरिक और माता-पिता व गुरुजनों का सम्मान करने वाला विद्यार्थी मिले। अर्हम इंग्लिश एकेडमी को भारतीय शिक्षा बोर्ड की सम्बंद्धता मिलने से मेरा सपना अब साकार होगा। जिस प्रकार बोर्ड ने अर्हम इंग्लिश एकेडमी प्रब ंधन पर भरोसा जताया है,वह भी बोर्ड की गाइडलाइंस को पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ बोर्ड के नियमों पर सही साबित करेंगे।उन्होनें कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड की शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को सत्य,अहिंसा,करुणा,सहनशीलता और समाज सेवा जैसे मूल्यों की शिक्षा दी जाती है,जिससे उनमें परिवार,समाज और राष्ट्र के प्रति,अपने कर्तव्यों के प्रति समपर्ण की चेतना जागृत हो सके

ये है भारतीय शिक्षा बोर्ड की विशेषता
भारतीय शिक्षा बोर्ड ‘बीएसबी का सबसे बडी खाासियत है कि बोर्ड की शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय परंपराओं और मूल्यों से भी जोड़ती है।शिक्षा बोर्ड जहां विज्ञान,गणित,सामाजिक विज्ञान और भाषा जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित करते हैं,लेकिन बीएसपी की शिक्षा प्रणाली में गुरूकुल की परंपरा का समावेश किया गया है।बीएसबी सम्बद्धता प्राप्त स्कूलों में विद्यार्थियों को योग,आयुर्वेद,भारतीय दर्शन और वेदों की शिक्षा भी दी जाती है।इससे छात्रों को न केवल अकादमिक ज्ञान प्राप्त होता है बल्कि वे अपने जीवन में नैतिक और आध्यात्मिक मूल्य भी सीखते हैं।यह शिक्षा प्रणाली विद्यार्थियों को एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है,जिससे वे दुनिया में अपने विचारों और कार्यों से एक सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।