तहलका न्यूज,बीकानेर।संविदा पर काम करने वाले कार्मिकों को समय पर वेतन मिलने की समस्या जस की तस बनी हुई है।अभी पीबीएम अस्पताल में संविदाकर्मियों को नियमित सैलरी को लेकर हुए आन्दोलन को पखवाड़ा भी नहीं बीता की फिर गंगाशहर सैटेलाइट अस्पताल में लगे संविदाक र्मियों ने वेतन नहीं मिलने पर आन्दोलन का बिगुल बजा दिया है और धरना देकर पन्नाधाय कंपनी के खिलाफ आवाज बुलंद की है।बताया जा रहा है कि गंगाशहर सैटेलाइट अस्पताल के कंप्यूटर ऑपरेटर,फार्मासिस्ट व सिक्योरिटी गार्ड सहित 37 कर्मचारियों को सैलरी ना मिलने का मामला गर्मा गया।परेशान इन कर्मचारियों ने अस्पताल परिसर में धरना लगाया है।ये सभी कर्मचारी पन्नाधाय नाम की कंपनी के मार्फत नौकरी पर लगे हुए हैं।

पीएफ में गड़बड़ी, सैलरी रुकी पड़ी
कर्मचारियों का कहना है कि वे सब अभी ठेकेदार कंपनी पन्नाधाय के अंतर्गत काम कर रहे हैं।ऐसे में उनकी सैलरी आदि पन्नाधाय द्वारा दी जानी होती है।मगर इस ठेकेदार कंपनी ने पिछले चार माह से सैलरी नहीं दी है।इसके अतिरिक्त इन कर्मचारियों का पीएफ भी आठ माह से नहीं काटा गया है।जिसके चलते कार्मिक आर्थिक मंदी की मार झेल रहे है और उन्हें श्रमिक कानून का कोई लाभ नहीं मिल रहा है।

प्रिंसिपल ने दे रखा है नोटिस
उदयपुर की पन्नाधाय कंपनी जिसे सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज की ओर से कुछ समय पहले सिक्योरिटी व मैन पावर के कुल 27 करोड़ के ठेके पन्नाधाय को दे दिए गए। तब से ही बवंडर मचा हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि विभिन्न केन्द्रों पर लगे क र्मचारियों की सैलरी को लेकर शिकायतें लगातार मिल रही है। जिसके उपरान्त कंपनी को अब तक तीन नोटिस जारी कर चुके हैं लेकिन क ंपनी ने कोई समाधान नहीं किया है।आज सभी पीडि़त कर्मचारियों को व कंपनी के प्रबंधन को बुलाया है।

एक ही कंपनी को अधिक ठेके बढ़ाते हैं तानाशाही
पिछले पीबीएम अधीक्षक डॉ पीके सैनी के समय से पीबीएम का ढर्रा ही खराब हो चुका है। तब से पीबीएम ने एक ही आदमी को अधिकतर ठेके देने का खेल शुरू कर रखा है। एक ही आदमी के पास अधिकतर ठेके आने से उसकी तानाशाही बढ़ती है। पन्नाधाय से पहले गजेन्द्र एटरप्राइजेज को इकतरफा बड़े बड़े ठेके दे दिए गए थे। उस दौरान खूब तानाशाही हुई। काम में गड़बडिय़ां रहीं। अब यही कहानी पन्नाधाय के साथ शुरू कर दी गई है। हालात यह है कि अब भी पीबीएम के अनेक कार्मिक जो गजेन्द्र एंटरप्राइजेज व पन्नाधाय कंपनी के अधीन कार्यरत है। उन्हें नियमित रूप से वेतन का भुगतान नहीं हो रहा है।