तहलका न्यूज,बीकानेर। सुनकर भी बड़ा अजीब सा लगता है कि सोने के कड़े से खुदा ऐसा तालाब जो कभी नहीं सुखेगा और वास्तव में ऐसा हुआ भी है। कि इसके निर्माण के बाद से बरसात के बिना भी इस तालाब में हमेशा पानी भरा रहा। लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि यह तालाब बिल्कुल सुख गया है। जी हां हम बात कर रहे है कि बीकानेर से 30 किमी दूर स्थित कोडमदेसर तालाब की।रानी कोडमदे के कड़े से खुदे यह तालाब आज अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। नगर स्थापना के समय से निर्मित इस तालाब को आज तक किसी ने सुखा नहीं देखा। यह पहला मौका है,जब तालाब में एक बूंद पानी तक नहीं है। लोगों को दैनिक पानी की जरूरतें और निराश्रितों की प्यास बुझाने में मदद वाले सुखे तालाब के कारण निराश्रित जीव जंतुओं का जीवन भी संकट में पड़ गया है। जबकि अभी तक अकाल की स्थिति भी नहीं है।तालाब की दुर्दशा का मंजर यही खत्म नहीं होता। यहां तालाब के किनारे बनी दीवारें भी क्षतिग्रस्त हो रही है और कुछ दीवारे तो झुक तक गई है। हालात यह है कि बेजुबान पशु-पक्षियों की प्यास बुझाने के लिये कम्युनिटी वेलफेयर सोसायटी की टीम ने तालाब में पाल बनाकर टैकरों के जरिये निराश्रित पशु पक्षियों के लिये जल की अस्थाई व्यवस्था की है। मंजर यह है कि देखभाल के अभाव में इनमें कचरा,गंदगी के साथ झाडिय़ां उगी हुई है। बरसात का पानी तालाब में आने के रास्ते अवरूद्ध हो चुके है।
कम्यूनिटी वेलफेयर सोसायटी ने उठाया बीडा
जब तालाब सुखने की सूचना कम्यूनिटी वेलफेयर सोसाटी के कन्हैयालाल भाटी को मिली तो उन्होंने अपने साथियों के साथ यहां पहुंच कर एक पाल बनवाई और उसमें निराश्रित पशु पक्षियों के लिये टैंकरों के जरिये पानी का भराव करवाकर अस्थाई व्यवस्था शुरू की।ताकि निराश्रित पशुधन को पीने के लिये पानी और गर्मी से बचाव का साधन मिल सकें। भाटी का कहना है कि इसको लेकर वे प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को भी अवगत करवा चुके है। ताकि इसका जीर्णोधार हो सके। वे निरन्तर पानी के टैंकरों से तालाब में बने खाले में जलापूर्ति करवा रहे है। जब तक तालाब में पानी की स्थिति नहीं बनती तब तक यह व्यवस्था सुचारू रहेगी।
प्रशासनिक अधिकारी कर चुके अवलोकन
मंदिर के पुजारी का कहना है कि इस बारे में पूर्व सरपंच,एसडीएम,तहसीलदार तक गुहार लगा चुके है।जिसके बाद उन्होंने मौका मुआयना भी किया। परन्तु आज तक जीर्णोद्वार की बात नहीं हुई।अगर मानसून सत्र से पहले इसका जीर्णोद्वार नहीं हुआ तो कोई अनहोनी की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। पुजारी ने कहा कि सरकार जल स्त्रोतों को बचाने की बातें करती है,पर धरातल पर इसकी क्रियान्विति देखने को नहीं मिलती है।
अतिक्रमण ने बिगाड़े हालात
तालाब के आस-पास आगोर और सारण के लिए छोड़ी जमीनों पर अतिक्रमण हो रहे है। प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं देता। कोई शिकायत भी करता है तो कार्रवाई नहीं होती। हालात ऐसे हो गए है कि तालाब में पानी आने के रास्ते तक बंद कर दिए गए है। यही वजह है कि बरसात के दौरान इन तालाबों में थोड़ा-बहुत पानी आता है। वही सालभर इनमें रहता है।
सोलर कंपनियों को पानी सप्लाई
ग्रामीणों का आरोप है कि आसपास सोलर कंपनियों को तालाब का पानी टैंकर के जरिये सप्लाई किया जा रहा है। ये बड़ा कारण है तालाब के सुखने का। वहीं सोलर प्लांट लगाने वाली कंपनियों ने आगोर पर अतिक्रमण कर रखे है। जिसके कारण भी बरसाती पानी तालाब तक नहीं पहु ंच पाता।
आखिर जनप्रतिनिधि देंगे ध्यान
सवाल यह उठता है कि बीकानेर स्थापना के समय से निर्मित इस ऐतिहासिक तालाब के संरक्षण के लिये क्या जनप्रतिनिधि आगे आएंगे। जल स्तोत्र की अनेक सरकारी योजनाएं अगर कागजी न होकर धरातल पर उतार आएं तो निश्चित तौर पर शहर व जिले के अनेक जल स्त्रोत के साधनों का संरक्षण भली भांति हो पाएगा और प्रति वर्ष गर्मियों में जलापूर्ति की कमी से भी आमजन को जूझना नहीं पड़ेगा।
