तहलका न्यूज,बीकानेर। मानस प्रचार समिति,लखोटिया चौक की ओर से पुरूषोत्तम मास के पहले ही दिन यानी 17 मई से नृसिंह सत्संग उद्यान में नवाह्न पारायण पाठ शुरू होंगे। शनिवार शाम को 6 बजे एमएम ग्राउंड के पास स्थित राम मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। जो करीब डेढ़ किलोमीटर एरिया में घूमते हुए कथास्थल तक पहुंची। डीजे पर बजते भजनों पर महिलाएं एक कलर की साडिय़ां पहने सिर पर रामचरित मानस की पुस्तकें रखकर एमएम ग्राउंड के पास स्थित राम मंदिर से नयाशहर थाने के आगे से होते हुए धर्म नगर द्वार के रास्ते कथा स्थल नृसिंह सत्संग उद्यान तक पहुंची।रास्ते में शोभायात्रा पर पुष्प वर्षा होती रही।शोभायात्रा में करीब एक सी वेशभूषा में करीब 350 महिलाएं और नवाह्न पारायण पाठ क रने वाली टीम के साथ पुरुषों की टोलियां चल रही थी।शोभायात्रा के रास्ते में माहौल भक्तिमय हो गया।विदित रहे कि रविवार को दोपहर एक बजे से शाम 7 बजे तक नवाह्न पारायण के पाठ होंगे। पाठ 25 मई तक चलेंगे।
चाय और शर्बत की थी व्यवस्था
शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए ठंडे पानी,चाय और शर्बत की व्यवस्था भी थी।आयोजन कमेटी के अध्यक्ष राजेश चूरा और राजेंद्र पुरोहित ने बताया कि शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए राम मंदिर के पास ही ठंडे पानी,चाय और शर्बत की व्यवस्था की गई।गर्मी को देखते हुए रास्ते में दो तीन स्थानों पर ठंडे पानी की व्यवस्था की गई।इसके अलावा कथास्थल पर पहुंचने के बाद शोभायात्रा में शामिल लोगों के लिए चाय और शर्बत की व्यवस्था की गई।
बाहर से भी पहुंचे बीकानेर पहुंचे श्रद्धालु
नवाह्न पारायण पाठ में शामिल होने के लिए श्रद्धालु बीकानेर पहुंचना शुरू हो गए हैं।शनिवार शाम तक करीब 45 लोग बीकानेर पहुंच चुके हैं।अभी भी दो दर्जन से ज्यादा लोग जोधपुर,जयपुर,आसाम,कोलकाता,दार्जिलिंग,बैंगलोर और नागपुर से आएंगे।आयोजन कमेटी के बलभद्र व्यास ने बताया कि बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने और खाने को व्यवस्था कमेटी की ओर से की गई है। नवाह्न पारायण पाठ में पहुंचने वाले लोगों के लिए बसों की निशुल्क व्यवस्था नृसिंह सत्संग उद्यान में होने वाले नवाह्न पारायण पाठ में शामिल होने वाले लोगों के लिए बसों की निशुल्क व्यवस्था की गई है।आयोजन कमेटी के राजेन्द्र पुरोहित और दिलीप दाधीच ने बताया कि गंगाशहर,भीनासर,सुजानदेसर, मुरलीधर व्यास कालोनी,मुक्ताप्रसाद,सर्वोदय बस्ती,कोडमदेसर,नाल और पूगल रोड़ आदि जगहों से बसें चलेंगी।
