तहलका न्यूज,बीकानेर।निर्जला एकादशी गुरुवार को श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उपवास रखा।जगह-जगह शीतल जल,पेयजल पदार्थ का वितरण किया जाएगा।नगर के प्रमुख वैष्वव मंदिरों में सुबह से लेकर शाम तक दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा।लक्ष्मीनाथजी मंदिर में सुबह से ही दर्शनार्थियों की कतारें लगी रही।बाजारों में शीतल पेय ही स्टालें लगाकर श्रद्धालु दिन भर राहगीरों को शरबत,ज्यूस,शीतल जल आदि पिलाते रहे।पर्व को लेकर बाजारों में दिनभर भीड़ रही।आम,चीणी से बने ओळों व सिंगाड़ा आटे व चीनी से निर्मित सेवइयों की खरीदारी जमकर हुई।शहरी क्षेत्र में बहन बेटियों के यहां मिठाई (सगार),आम,ओळें आदि भेजने की परम्परा निभाई गई।मिठाइयों की दुकानों पर भी खरीदारों की भीड़ रही।निर्जला एकादशी पर दानपुण्य करने का महत्व बताया गया है। ऐसे में महिलाएं इस दिन विशेष तौर पर दान करती है।लक्ष्मीनाथ मंदिर के आगे सुबह पांच बजे से कतार लगनी शुरू हो गई।बड़ी संख्या में दान देने वाले भी पहुंचे।इस दौरान किसी ने अन्न का दान किया तो किसी ने साड़ी और अन्य कपड़ों का।बड़ी संख्या में लोगों ने चीनी और मटकी भी दान में दी।न सिर्फ मंदिरों के आगे बल्कि परिवार में भी दानपुण्य का सिलसिला चला।लोगों ने अपनी बेटियों और बहनों के घर मटकी, चीनी से बनी सेवईयां, मिठाई भी पहुंचाई।इतना ही नहीं बड़ी संख्या में लोग गर्मी से जुड़े महंगे इलेक्ट्रानिक आइटम भी इस दौरान देते हैं।
राहगीरों की सेवा की
निर्जला एकादशी पर शहर में विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाई जाकर राहगीरों को ठंडे पानी,शिकंजी,लस्सी,आमरस,कुल्फी का वितरण एवं शरबत की सेवा की गई।लक्ष्मीनाथ मंदिर परिसर के पास,जोशीवाड़ा,दाउजी रोड,जस्सूसर गेट,विश्वकर्मा गेट,नत्थूसर गेट,सेटेलाइट अस्पताल रोड,मोहता चौक,फड़बाजार,केईएम रोड,गंगाशहर,बंगलानगर आदि स्थानों पर दिन भर राहगीरों को रोक कर शीतल पेय पिलाया।कहीं शरबत तो कहीं ठंडे पानी का दौर पूरे दिन चलता रहा।
आमों की हुई जबरदस्त बिक्री
निर्जला एकादशी पर आम की बिक्री जोरों पर रही।इस पर्व पर दान पुण्य के साथ आम की विशेष महत्ता है। बाजारों में आमों की बिक्री उच्चतम स्तर पर रही।व्यापारियों ने निर्जला एकादशी के लिए पहले से तैयारियां कर ऑर्डर दे दिए थे। जिसके चलते शहर के अनेक स्थानों पर आम के ठेले व अस्थाई दुकानें भी लगाई गई।आमतौर पर 100 रूपये किलो बिकने वाला आम 100 रूपये के डेढ़ किलों के भाव से बिका। वहीं लंंगड़ा आम के साथ आम की अनेक किस्मों की बिक्री भी जमकर हुई।
यह है महत्व
निर्जला एकादशी का शास्त्रों में भी खास महत्व बताया गया है।पंचागकर्ता पंडित राजेन्द्र किराड़ू के अनुसार महाभारत काल में भीम ने इस उपवास को रखा था। इस कारण इसे भीमसेन एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए निर्जल (बिना पानी) के उपवास कि या जाता है।
