तहलका न्यूज,बीकानेर।राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में फर्जी बिलिंग और अन्य गड़बडिय़ों को रोकने के लिए सरकार अब पूरी तरह सख्त हो गई है।विभागीय ऑडिट में सामने आया है कि दावों (क्लेम) में दवा की ज्यादा एमआरपी दिखाई जा रही है।एक ही दवा के अलग-अलग क्लेम में कीमतों का अंतर है और कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाए जा रहे हैं।इन अनियमितताओं को देखते हुए सरकार ने योजना के पैनल में शामिल फार्मेसियों और अस्पतालों पर शिकंजा कसते हुए नई गाइडलाइन जारी की है।सरकार का मानना है कि इस तरह के फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने पर बिना वजह का आर्थिक बोझ पड़ रहा है।इसलिए नियमों को अब और भी कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

अस्पतालों और मरीजों के लिए नए नियम
अस्पतालों को अब मरीज के भर्ती होने से लेकर उसके डिस्चार्ज (अस्पताल से छुट्टी) होने तक का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में रखना होगा।
मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के 12 घंटे के भीतर उसकी टीआईडी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
मरीज की कोई भी जांच होने पर,उसकी रिपोर्ट को एक हफ्ते (7 दिन) के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
यदि मरीज के इलाज के पैकेज की राशि गलत पाई गई, तो क्लेम को तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
यदि संबद्ध (पैनल में शामिल) अस्पताल आरजीएचएस के मरीज का इलाज करने से मना करता है,तो उसे योजना के पैनल से हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

फार्मेसियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश
गाइडलाइन के मुताबिक,अब दवाओं के दावों की गहन जांच,ऑडिट और उनके बैच नंबर का सत्यापन किया जाएगा। अगर दवा की एमआरपी में कोई अंतर मिलता है,तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा।फार्मेसियों के लिए अब सभी खरीद बिल, जीएसटी चालान और स्टॉक रजिस्टर को सुरक्षित रखना जरूरी कर दिया गया है।बिलिंग हमेशा अनिवार्य छूट के साथ ही करनी होगी।यदि कोई फार्मेसी नकली,बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए या बिना सत्यापन वाले दावे पेश करती है,तो उससे अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जाएगी। साथ ही,उसे पैनल से बाहर भी किया जा सकता है।

आम जनता और पात्र लोगों को राहत
आरजीएचएस की अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल के अनुसार,योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।इस पूरी कवायद का सीधा फायदा पात्र लोगों और आम जनता को मिलेगा।राहत की बात यह है कि इस नई गाइडलाइन में मरीजों पर कोई सख्ती नहीं की गई है,बल्कि केवल अस्पतालों और फार्मेसियों पर शिकंजा कसा गया है।इससे फायदा यह होगा कि जिन मरीजों के दस्तावेज सही हैं,उन्हें समय पर और बिना किसी परेशानी के क्लेम मिल सकेगा।गौरतलब है कि पिछले दिनों आरजीएचएस योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था,जिसके बाद कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए थे।इसी को देखते हुए अब यह नई सख्ती लागू की गई है।

ऑनलाइन एंट्री और ई-पर्ची अनिवार्य
राजस्थान सरकार के चिकित्सा विभाग ने आरजीएचएस के तहत मुफ्त या रियायती दवाएं लेने के नियमों में एक बड़ा बदलाव किया है। 15 जून से लागू इस नए नियम के अनुसार,अब किसी भी मरीज को बिना ऑनलाइन पर्ची (ई-पर्ची) के दवाइयां नहीं मिलेंगी।यह फैसला मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए लिया गया है,जो डॉक्टरों से उनके घर पर या अस्पताल परिसर से बाहर परामर्श (चेकअप) लेते हैं।यदि कोई डॉक्टर किसी आरजीएचएस लाभार्थी को उसके घर पर या अस्पताल के बाहर देखता है,तो डॉक्टर को आरजीएचएस पोर्टल के ‘ओपीडी अट रेजिडेंस’ मॉड्यूल में मरीज की बीमारी और दवाओं की ऑनलाइन एंट्री करनी होगी। इसके बाद पोर्टल से ही ऑनलाइन ई-पर्ची जनरेट करनी होगी।

मैन्युअल पर्चियां अमान्य
हाथ से लिखी गई पुरानी कागजी पर्चियां अब मान्य नहीं होंगी। अगर कोई डॉक्टर हाथ से लिखकर पर्ची देता है,तो आरजीएचएस से जुड़ी कोई भी मेडिकल शॉप (फार्मेसी) उस पर दवा नहीं देगी।

सख्त कार्रवाई की चेतावनी
सरकार ने सभी डॉक्टरों और दवा विक्रेताओं को इन नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है।यदि कोई डॉक्टर बिना ऑनलाइन एंट्री के पर्ची देता है या कोई फार्मेसी पुरानी पर्ची पर दवा देती है,तो उनके खिलाफ आरजीएचएस नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।