तहलका न्यूज,बीकानेर। जिला पुलिस ने साइबर थाना पुलिस टीम के साथ बड़ी कार्रवाई करते हुए गोल्ड लोन का झांसा देकर लोगों के साथ फ्रॉड करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया है।पकड़ा गया आरोपी बज्जू निवासी सुनील ज्याणी पुत्र रोशन लाल है।दौराने पुछताछ में बताया कि साईबर ठगी गिरोह के साथ मिलकर देश के आमजन के साथ ठगी की राशि को अपने व अपने अन्य साथियों के द्वारा खुलवाये गये मणप्पुरम गोल्ड लोन अकाउंट मे प्राप्त करते थे और मणप्पुरम गोल्ड लोन कम्पनी से प्राप्त रूपये का अपने लिंक बैंक खाते मे प्राप्त कर अपने-अपने कमीशन को प्राप्त करते थे।
तरिका ए-वारदात ठगी के पैसे खपाने का नया और अनूठा तरीका
एसपी मृदुल कच्छावा ने बताया कि आरोपी साईबर ठगी गिरोह के सदस्यो के साथ मिलकर अलग-अलग राज्यों व जिलों में बैठे लोगो से साईबर फ्राड कर राशि को मणप्पुरम गोल्ड लोन अकाउंट में भुगतान कर मणप्पुरम लोन अकाउंट मे लिंक बैंक खाते मे सेफ तरीके से रूपयों को प्राप्त करता।वह साईबर ठगी गिरोह के साथ मिलकर अपने व अपने अन्य साथियों के द्वारा खुलवाये गये मणप्पुरम गोल्ड लोन अकाउंट मे प्राप्त करते थे। साइबर पुलिस थाना बीकानेर ने देश की पहली अनूठी कार्रवाई करते हुए एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है,जो आम लोगों से साइबर ठगी कर प्राप्त की गई फ्रोड की राशि को ‘मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड’ जैसी प्रतिष्ठित गोल्ड लोन कंपनी के ऑनलाइन बैंकिंग सिस्टम का गलत तरीके से उपयोग कर सुरक्षित रूप से ठिकाने लगा रहा था। अब तक साइबर ठग देश भर में आम लोगों से ठगे गए पैसों को म्युल बैंक खातों में ट्रांसफर करते थे,जिन्हें पुलिस तुरंत फ्रीज करवा देती थी। इस तकनीकी बाधा से बचने के लिए इस गिरोह ने एक बेहद शातिर और नया तरीका ईजाद किया। गिरोह के सदस्य सबसे पहले मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड की शाखा में जाकर कानूनी और वास्तविक रूप से अपना या अन्य भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके नाम से सोना (गोल्ड) गिरवी रखते थे। इसके बदले कंपनी के नियमों के अनुसार उनके वैध बैंक खातों में लोन की राशि (लाखों रुपये) प्राप्त हो जाती थी। इस तरह उनके पास बैंक खाते में ‘वैध रूप से अर्जित’ पैसा आ जाता था।दूसरी तरफ,गिरोह के तकनीकी एक्सपर्ट्स देश के किसी भी हिस्से में मासूम नागरिकों को ‘पुलिस’ या ‘सरकारी एजेंसी’ का डर दिखाकर,डिजिटल अरेस्ट’ जैसी गंभीर साइबर ठगी को अंजाम देते थे और पीड़ितों को डरा-धमकाकर करोड़ों रुपये ट्रांसफर करवा लेते थे। ठगी की यह अवैध राशि जैसे ही जालसाजों के पास पहुंचती थी, वे अपने स्वयं के बैंक खातों का उपयोग न करके,सीधे साइबर ठगी के पैसों को मणप्पुरम फाइनेंस लिमिटेड के “ऑनलाइन गोल्ड लोन”मोबाइल एप्लिकेशन पर ट्रांसफर कर देते थे। ठगी के इन रुपयों से वे तुरंत अपने ऊपर चल रहे गोल्ड लोन को ऑनलाइन चुकता कर देते थे।लोन चुकता होने के बाद,गिरवी रखा गया वास्तविक सोना कंपनी से वापस छुड़ा लिया जाता था या फिर दोबारा नया लोन जनरेट कर लिया जाता था।पुलिस जब तक पीड़ित की शिकायत पर ठगी वाले बैंक खातों को ट्रैक या फ्रीज करती,तब तक वह पैसा मणप्पुरम कंपनी के सिस्टम के माध्यम से ‘लोन रीपेमेंट’ के रूप में सेटल हो चुका होता था।
