तहलका न्यूज,बीकानेर।संभाग से अब पूरे राजस्थान में उठी प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 के फर्जीवाड़े की चिंगारी अब पूरे राजस्थान में दावानल (आग) बनकर फैल चुकी है। इस पूरे महाघोटाले को दबाने में जुटे प्रशासनिक तंत्र और भ्रष्ट सिंडिकेट के खिलाफ अब योग्य अभ्यर्थियों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है।इस दफा मोर्चा किसी एक व्यक्ति ने नहीं, बल्कि किशन गोपाल छंगाणी,प्रेम कुमार,दीपक कुमार (बीकानेर),राकेश कुमार जोशी (भादरा),विष्णु और रोहित शर्मा चित्तौड़गढ़,अमर सोनगरा किशनगढ़ व अनेक जिलों से अनेकों जांबाज योग्य अभ्यर्थियों ने एकमत होकर संभाला है।इन अभ्यर्थियों ने सीधे तौर पर व्यवस्था को ललकारते हुए खुलासा किया है कि जाली हस्ताक्षरों से नौकरियां बांटने का यह खेल सिर्फ बीकानेर संभाग तक सीमित नहीं है क्योंकि इन कार्मिकों का कहना हैं कि लैब क्लीनरों को नियुक्ति मिल चुकी हैं जबकि वे भर्ती के योग्य भी नहीं हैं इस बात की आशंकाएं जताई हैं,इतना ही नहीं कहीं तीस दिनों के अनुभव तो कहीं छब्बीस दिनों का अनुभव प्रमाण-पत्र माना गया हैं बल्कि पूरे राजस्थान में इस भर्ती घोटाले की गहरी बू आ रही है और बड़े स्तर पर जालसाजी की आशंकाएं हैं!

‘आंखें मूंदकर बैठे हैं संयुक्त निदेशक
आंदोलनकारियों ने संयुक्त निदेशक,चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें (बीकानेर जोन) की कार्यप्रणाली पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि विभाग राजस्थान सम्पर्क पोर्टल की शिकायत (पंजीकरण संख्या: …8965) पर कार्रवाई करने के बजाय,जानबूझकर अपनी आंखें मूंदे बैठा है।संयुक्त निदेशक खुद अपने कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में पड़े संदिग्ध अनुभव प्रमाण-पत्रों को खंगालने की जहमत नहीं उठा रहे हैं,बल्कि उलटा पीड़ित अभ्यर्थियों से ही सबूत मांग कर मामले को लटकाने का खेल खेल रहे हैं।जबकि सच्चाई यह है कि शुरुआती जांच में ही हस्ताक्षरों के 4 अलग-अलग संदिग्ध प्रारूप (नजरें) साफ पकड़े जा चुके हैं।

8 जून को सीएमएचओ ऑफिस में हुई थी ‘काली साजिश’, सीसीटीवी में कैद है सच!
इन सजग कार्मिकों ने एक और बेहद सनसनीखेज भंडाफोड़ किया है।उन्होंने बताया कि इस पूरे महाघोटाले को दबाने और फाइलों को खुर्द-बुर्द करने के लिए 08 जून 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में सीसीटीवी कैमरों के सामने बैठकर भ्रष्ट बाबुओं ने ‘यूनियनबाजी’ की थी और आरटीआई में साबित भी हो चुका हैं कि छंगाणी के दस्तावेजों को ग़ायब किया जा रहा हैं। इस गंभीर प्रकरण को रफा-दफा करने और सच को दफन करने के लिए इन बाबुओं और भ्रष्ट तंत्र ने अनेकों हथकंडे अपनाए, धमकियां दीं और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल किया, लेकिन वे यह भूल गए कि उनके गुनाह कैमरों में दर्ज हो चुके हैं।

 ‘इस बार झुकेंगे नहीं, हक लेकर रहेंगे’
प्रशासनिक दबाव और बाबुओं की गुंडागर्दी के आगे घुटने टेकने के बजाय, इस बार ‘मुख्यमंत्री निःशुल्क जांच योजना सहायक लैब टेक्नीशियन संघ’ पूरी तरह से अपनी जिद पर अड़ गया है। संघ ने साफ कर दिया है कि वर्षों से ईमानदारी से काम कर रहे योग्य और वास्तविक अभ्यर्थियों को आज तक न्याय नहीं मिला है, जिसके कारण संविदाकर्मियों में भयंकर आक्रोश व्याप्त है।संघ ने इस बार आर-पार की विधिक और जमीनी लड़ाई का शंखनाद कर दिया है।योग्य अभ्यर्थियों और संघ ने संयुक्त निदेशक को 03 दिवस का अंतिम अल्टीमेटम देते हुए साफ चेतावनी दी है कि यदि बीकानेर,चुरू,श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के रिकॉर्ड जब्त कर इन 7 संदिग्ध सत्यापन क्रमांकों (6381, 6365, 6662, 6404, 6373 और 5793) की उच्च स्तरीय फॉरेंसिक जांच नहीं कराई गई, तो इस पूरे नेक्सस को उच्च न्यायालय,एंटी करप्शन ब्यूरो,प्रशासनिक सुधार विभाग और राज्य सतर्कता आयोग के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।इसके बाद सीएमएचओ कार्यालय के उन साजिशकर्ता बाबुओं और मूकदर्शक बने आला अधिकारियों के खिलाफ जो भी विधिक और आपराधिक कार्रवाई होगी,उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी उन्हीं की होगी।