तहलका न्यूज,बीकानेर।गौ सेवा,गौ संरक्षण और गौ सम्मान के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ अभियान के तहत एकत्र किए गए हस्ताक्षर 27 जुलाई को राष्ट्रपति को भेजे जाएंगे।पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य गौमाता को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाना,देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगवाना है।भारतीय संस्कृति,संस्कार और कृषि व्यवस्था का आधार गौ है।यदि संस्कृति,संस्कार और कृषि को बचाना है, तो गौ संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।महाराज श्री ने कहा कि गौ के बिना अनेक वैदिक और धार्मिक अनुष्ठान अधूरे माने जाते हैं।उन्होंने गौवंश के साथ होने वाले अन्याय को समाज और संत समुदाय के लिए अत्यंत पीड़ादायक बताया।उन्होंने गौ सेवा,गौ सुरक्षा और गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ का सम्मान प्रदान किए जाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान कि या।पत्रकार वार्ता के दौरान पोस्टर का विमोचन किया गया।इस मौके पर मनोज कुमार सेवग,सूरज प्रकाश राव,मोखराम धारणिया सहित अनेक जने मौजूद रहे।

करणी सिंह स्टेडियम से रवाना होंगे गौ भक्त
27 जुलाई को सुबह 9:00 बजे डॉक्टर करणीसिंह स्टेडियम से प्रदेश भर के गौ भक्त एकत्रित होकर पैदल मार्च करते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचेंगे।जहां पर ग्यारह लाख हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन की कॉपी जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम सौंपेंगे।उन्होंने बताया कि इसके बाद 27 अक्टूबर को प्रदेश व्यापी आह्वान किया जाएगा।अगर इसके बाद भी सरकार ने गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा नहीं दिया तो गौ भक्त दिल्ली की ओर कूच करेंगे।

राजनीतिक रोटियां सेकने का आरोप
देश व प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बाद भी गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा न देना और गौ हत्या रोकने संबंधित कानून न बनने पर पूछे गये प्रश्न का जबाब देते हुए महाराज श्री ने आक्रोश जताते हुए कहा कि गाय के नाम पर वोट मांगने वाले अब इस पर राजनीति कर रहे हैं और चुनाव जीतने के लिए अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते हैं।सनातन की सरकार होने के बाद भी कानून नहीं बना दुर्भाग्यपूर्ण है।

तीसरे चरण में गौ संरक्षण का चलेगा अभियान
महाराज श्री ने बताया कि तीसरे चरण में सड़क पर विचरण कर रहे निराश्रित गौवंश को गौशालाओं में शिफ्ट करने का अभियान चलाया जाएगा।इसके अन्तर्गत गौभक्त सर्वे कर गली मोहल्लों में घूम रहे गौवंशों को भामाशाहों की मदद से गौशालाओं में अपने परिवहन पर भेजेंगे। ताकि गौवंश गलियों में प्लास्टिक युक्त सामान न खाएं और उनके साथ किसी प्रकार की क्रूरता न हो।