तहलका न्यूज,बीकानेर।शहर और आसपास के क्षेत्रों में कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियों के लगातार विकसित होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है।सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जिले में बड़ी संख्या में कॉलोनियां कृषि भूमि पर बसी हुई हैं,जबकि नई अवैध कॉलोनियां भी तेजी से काटी जा रही हैं।उनका आरोप है कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को होगा,जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर 3 से 4 लाख रुपये में प्लॉट खरीदे और मकान बना लिए हैं।गोकुलधाम एन्क्लेव,नापासर रोड सहित कई क्षेत्रों को लेकर शिकायतें सामने आई हैं।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि अवैध कॉलोनियों के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें धमकियां भी मिल रही हैं।उन्होंने प्रशासन से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।95 प्रतिशत कृषि खातेदारी भूमि है, सिर्फ पांच प्रतिशत ही वैध भूमि पर कालोनिया काटी गई फिर भी इन पर कार्रवाई नहीं हो रही है बजरंग धोरा एवं ख्वाजा कॉलोनी में आज तक पर्याप्त मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।ख्वाजा कॉलोनी में एक सरकारी विद्यालय भी संचालित है,लेकिन वहां भी अब तक स्थायी विद्युत कनेक्शन उपलब्ध नहीं कराया गया है।इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि यदि कृषि भूमि पर कॉलोनियां बस रही हैं तो संबंधित विभागों की जिम्मेदारी क्या है। आरोप है कि बिना आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए कॉलोनियां विकसित हो रही हैं।भविष्य में यदि प्रशासन या बीकानेर विकास प्राधिकरण द्वारा अतिक्र मण या अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाती है,तो सबसे अधिक नुकसान उन आम नागरिकों को होगा जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से प्लॉट खरीदे हैं।बीकानेर में अतीत में भी अवैध कॉलोनियों और सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई तथा खरीद-फरोख्त पर रोक जैसे मामले सामने आए हैं। पीडि़तों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से मांग की है कि नई अवैध कॉलोनियों पर समय रहते रोक लगाई जाए।कॉलोनी विकसित करने वाले जिम्मेदार लोगों और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।गरीब खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि भविष्य में किसी कार्रवाई का खामियाजा केवल आम नागरिकों को न भुगतना पड़े।शिकायतकर्ताओं को मिलने वाली कथित धमकियों की निष्पक्ष जांच कर उचित सुरक्षा प्रदान की जाए।

रेरा में रजिस्टर्ड नहीं
धारा 90-ए के तहत राज्य सरकार की अनुमति से कृषि भूमि को गैर-कृषि भूमि में बदलकर आवासीय,वाणिज्यिक या औद्योगिक उपयोग में लिया जा रहा है। हालांकि, अब धारा 90-बी को धारा 90-ए में शामिल कर दिया गया है। मगर 90-बी या ए कराते वक्त अधिकतर कॉलोनाजर यूआईटी या बीडीए की शर्तें पूरी नहीं करते।इन्हीं हालातों को देखते हुए 2016 में रियल एस्टेट विनियमन और विकास का गठन हुआ। सीमा भी तय हुई कि 500 वर्ग मीटर से अधिक या 8 से अधिक अपार्टमेंट वाले सभी आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं को रेरा के साथ पंजीकृत होना चाहिए। बीकानेर में 90-ए और 90-बी की 228 कॉलोनियां हैं। इनमें से 150 से ज्यादा कॉलोनियां ऐसी हैं जो रेरा में रजिस्टर्ड नहीं है।

120 कॉलोनियों में सीवरेज-सड़क, पाइपलाइन नहीं
बीकानेर में करीब 120 ऐसी निजी कॉलोनियां हैं जो पूरी तरह बस चुकी,लेकिन वहां अब तक ना तो सड़क है,ना सीवरेज। पार्क जैसी सुविधा तो दूर की बात।लोगों ने सस्ते के चक्कर में भूखंड तो लेकर मकान बना लिए मगर अब दोष बीडीए और निगम को दे रहे हैं।ये सारी सुविधाएं देने का जिम्मा उसी फर्म का है,जिससे भूखंड लिया है।बीडीए की खामी ये है कि 90-ए की अनुमति देने के बाद भी ये क्रॉस चेक नहीं करते कि जो वादे कॉलोनी के लिए किए गए वो पूरे हुए या नहीं।