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तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निगम के महापौर का चुनाव आगामी 21 सितम्बर को होने वाला है।80 सदस्यों वाले बोर्ड में 27 सीटें जीत कर भाजपा बहुमत से काफी दूर है।भाजपा के पास बहुमत न होने के बावूजद उलटफेर के दावे कर रही है।कांग्रेस के अनिल कल्ला के सामने भाजपा पार्षद डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत दमखम ठोंक रहे हैं। इस बीच शनिवार को भाजपा ने बाड़ेबंदी कर रखे गए निर्दलीय पार्षदों का एक फोटो और शुक्रवार रात वीडियो प्रसारित कर एकता का संदेश देने का प्रयास किया।भाजपा प्रत्याशी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से ये फोटो व वीडियो जारी किए हैं।शहर के बाशिंदों ने चुनाव के बाद पहली बार अपने निर्दलीय निर्वाचित पार्षदों का दीदार किया है।गौरतलब है कि गत 9 सितम्बर को मतदान सम्पन्न होने के बाद से भाजपा-कांग्रेस ने अपने सभी उम्मीदवारों को अज्ञातवास में शिफ्ट कर दिया था।14 तारीख को आए परिणाम में जो पराजित हुए,उन्हें घर के लिए रवाना कर दिया और विजयी पार्षद अब भी अज्ञातवास में ही रह रहे हैं।

रिसोर्ट में आए नजर
भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद और निर्दलीय पार्षद एक रिसोर्ट में पार्टी नेताओं के साथ दिखाई दिए हैं।भाजपा ने महापौर पद के उम्मीदवार का समर्थन करने का दावा करते हुए निर्दलीय पार्षदों को दर्शाया है।भाजपा प्रत्याशी की ओर से जारी यह फोटो अब चर्चा का विषय बन गई है। जिसमें नौ पार्षदों का दावा किया जा रहा है। जबकि इसमें बैठे एक शख्स भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष विक्रम सिंह है।वहीं एक निर्दलीय शुभकरण गहलोत भी नजर आ रहे है।इस फोटो के जारी होने के साथ ही सोशल मीडिया पर जंग सी शुरू हो गई है।लोगों ने अनेक रिपोटर्स की ओर से अपने फेसबुक अकाउंट पर डाली इस फोटो पर कमेंट करते हुए विक्रम सिंह का जिक्र तो किया ही है।साथ ही सेव के चुनाव चिन्ह से जीतने वाले शुभकरण को भी आड़े हाथों लिया है। लोगों ने इस फोटो पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सेव के भाव बढ़ गये और सेव मंहगी हो गई।

महापौर की कुर्सी दूर की कौड़ी
भाजपा प्रत्याशी डॉ.सुरेंद्र सिंह शेखावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जीत का दावा किया है।पोस्ट में कहा गया है कि निर्दलीय पार्षदों ने उनके नेतृत्व में विश्वास जताते हुए बीजेपी के पक्ष में मतदान करने का निर्णय लिया है।तस्वीर सामने आने के बाद मेयर चुनाव के सियासी समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।राजनीतिक जानकारों की माने तो उनका कहना है कि हालांकि सियासी गणित कुछ और ही कह रहा है।भाजपा अगर सभी निर्दलीयों को भी शामिल कर ले तो भी भाजपा के लिए महापौर की कुर्सी दूर की कौड़ी है,क्योंकि कांग्रेस के पास पहले से ही स्पष्ट बहुमत है और वह बोर्ड बनाने की स्थिति में है।कुछ राणनीति कारों का मानना है कि भाजपा में भी सैंधमारी की पूरी संभावना है। ऐसे में भाजपा का बोर्ड स्वप्न बाग सा प्रतीत होता है।