तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निगम के दो साल बाद होने जा रहे महापौर चुनाव को लेकर नाम वापसी के बाद पिक्चर साफ हो गई है।कांग्रेस के पार्षद नवरतन डागा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दाखिल अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके साथ ही महापौर चुनाव में अब कांग्रेस के अनिल कल्ला और बीजेपी के डॉ.सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलेगी।सोमवार को इसके लिये वोटिंग होगी और शाम को ही यह तय हो जाएगा कि बीकानेर का अगला महापौर कौन होगा।डागा अपना नामांकन वापस लेने के लिए कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल और देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग के साथ नगर निगम पहुंचे।नामांकन वापस लेने के बाद डागा ने कहा कि उन पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं था,आलाकमान ने उनसे बातचीत कर पूरी तरह संतुष्ट किया है।उन्होंने कहा,मैं किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं,बल्कि व्यवस्था के खिलाफ था। कांग्रेस ही एकमात्र ऐसी पार्टी है जो असहमति और अपनी बात रखने को तवज्जो देती है।डागा ने कहा कि वे पहले भी कांग्रेस में थे,आज भी हैं और आगे भी रहेंगे।सर्वे में अनिल कल्ला का नाम आया तो उनका यह अधिकार बनता है।कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और शहर में कांग्रेस का ही महापौर बनेगा।मैं आजीवन कांग्रेस का रहूंगा।उन्होंने कहा अनिल उनका छोटा भाई है। मेरा किसी से व्यक्तिगत द्वेष नहीं।मेरा विरोध सिस्टम के खिलाफ था और मैंने अपने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपनी बात रखी।उनके सन्तुष्टिपूर्ण जबाब के बाद मैनें अपना नामांकन वापस ले लिया है।इससे पहले गुरुवार को नवरतन डागा का कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में दाखिल नामांकन जांच के दौरान खारिज हो गया था।इसके बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में बने रहने का फैसला किया था।
डोटासरा से मुलाकात के बाद बनी बात
नामांकन वापसी से पहले नवरतन डागा की कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात हुई थी।इसके बाद डागा के नामांकन वापस लेने की चर्चाएं तेज हो गई थीं।अब नामांकन वापसी के बाद माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व और डागा के बीच बातचीत के बाद सहमति बनी।कांग्रेस शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल ने कहा कि पार्टी को पूरा विश्वास था कि नवरतन डागा अपना नामांकन वापस ले लेंगे।वहीं देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग ने कहा कि उन्होंने पहले ही मीडिया के सामने कहा था कि डागा अपना पर्चा वापस ले लेंगे।
डॉ. कल्ला का अधिकारियों पर सीधा प्रहार
पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी.कल्ला ने कहा कि कुछ अधिकारी सत्ता के दुरुपयोग का जरिया बन रहे हैं।अगर किसी अधिकारी को राजनीति ही करनी है,तो पद से इस्तीफा देकर खुलेआम सियासत के मैदान में उतरे।चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्षद को नोटिस दिए जाने पर उन्होंने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया।परिवारवाद के आरोपों पर कल्ला ने दो टूक कहा,मेरे अलावा मेरे परिवार से कभी किसी ने चुनाव नहीं लड़ा।अब अगर किसी सदस्य ने लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ लिया,तो कोई जुर्म नहीं कर दिया। बीकानेर से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस पूरी तरह एक है।”
शहर अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल का दावा—बनाएंगे बोर्ड
लोकतांत्रिक तरीके से हुआ फैसला: शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल ने कहा कि महापौर पद का नाम केवल डॉ कल्ला की मर्जी से नहीं,बल्कि पीसीसी चीफ द्वारा सभी पार्षदों से ‘वन-टू-वन’ रायशुमारी के बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया से तय हुआ है।परिवार में जन्म लेना कोई अपराध नहीं है।मेघवाल ने कहा कि चुनाव से पहले ही जीत के दावे करने वाली भाजपा को जनता ने आइना दिखा दिया है।अब वे जोड़तोड़ कर लोकतंत्र का अपमान कर रहे हैं,जबकि पूर्व में जब दो बार भाजपा का बोर्ड बना था,तब कांग्रेस ने कभी ऐसा नहीं किया।उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस 42 से अधिक वोट हासिल कर 101 प्रतिशत नगर निगम में अपना बोर्ड बनाने जा रही है।
21 सितंबर को होगा महापौर चुनाव
नगर निगम में महापौर पद के लिए 21 सितंबर को मतदान होना है।कांग्रेस ने अनिल कल्ला को अपना अधिकृत प्रत्याशी बनाया है,जबकि बीजेपी की ओर से डॉ.सुरेंद्र सिंह शेखावत मैदान में हैं।नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनावी मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट हो गई है। नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस ने 42 सीटें,बीजेपी ने 27 सीटें जीती हैं। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक आरएलपी के पार्षद हैं। भाजपा के पास पर्याप्त बहुमत नहीं होने के बाद भी जहां भाजपा प्रत्याशी और समर्थक इस बात का दावा कर रहे है कि वे निगम में तीसरी बार बोर्ड बनाने में कामयाब होंगे।किन्तु ऐसा प्रतीत होता नजर नहीं आ रहा है।वहीं कांग्रेस इस बात को लेकर आश्वस्त है कि वे बहुमत से ज्यादा का आंकड़ा जुटाकर अपना मेयर बना लेगी।
