





अधूरे पड़े प्रोजेक्ट व प्रस्ताव ठंडे बस्ते में,विकास की बाट जो रही योजनाएं,शहर की समस्याएं बनी है जी का जंजाल
जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।चाहे सरकार की घोषणा हो या जिला प्रशासन की बैठकें।अगर उनकी क्रियान्वित समय पर हो जाएं तो न तो जनता की नाराजगी झेलनी पड़े और न ही विकास के रथ का पहिया रूके।पर कहते है कि बातें है बातों का क्या।जी हां कुछ ऐसा ही बीकानेर की जनता के साथ होता है।यहां से चुनाव लडऩे वाले नेता तथा चुनाव लड़ चुके नेता। मंत्री अथवा जिम्मेदारी के पद पर बैठने के बाद उन घोषणाओं को अमीलीजामा पहनाने में लापरवाही बरतते है। जिसका खामियाजा आमजन को ही भोगना पड़ता है।बीकानेर के ऐसे कई प्रोजेक्टस है,जो मुंगेरी लाल के हसीन सपनों से कम नहीं है।राज्य स्तरीय स्वाधीनता दिवस समारोह बीकानेर में होने जा रहा है।जिसके लिये मुख्यमंत्री आज बीकानेर आ रहे है।ऐसे में आमजन को इस बात की आस बंधी है कि शायद अधूरे पड़े विकास को पंख लग सकते है।ऐसे में आमजन न केवल भाजपा सरकार के समय की बजट की घोषणाएं पूरी होने की आस लगाएं बैठे है।बल्कि कुछ नई उम्मीदों से बीकानेर की कायाकल्प का सपना भी संजोए हुए है।
ठंडे बस्ते में पुलिस कमिश्नरेट के प्रस्ताव
प्रदेश में डबल इंजन की सरकार बनने के बाद भी बीकानेर में विकास के पंख लगने की उम्मीदें जगी थी।किन्तु ऐसे कई प्रस्ताव है जो अब ठंडे बस्ते में है।इसमें से एक पुलिस कमिश्नर प्रणाली भी शामिल है।जिसको लेकर दो साल पहले प्रस्ताव बनाकर कर सेटअप भी तैयार कर लिया गया था।परन्तु अभी तक इसे मूर्तरूप नहीं दिया जा सका है।बताया जा रहा है कि दो साल पहले भाजपा सरकार बनने के साथ ही अधिकारियों ने इस पर काम कर पूरा सेटअप तैयार कर लिया है।प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय को भेज दिए हैं और विधानसभा के दौरान इसकी घोषणा की उम्मीद जताई जा रही थी।लेकिन दो बजट सत्र निकल गये।न तो इन प्रस्तावों को मंजूरी मिली और न ही इसको धरातल पर उतारा जा सका।
ये योजनाएं आज भी जो रही है विकास की बाट
बीकानेर में मिनी फूड पार्क की स्थापना,शोभासर और बीछवाल में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जलाशय के आसपास के क्षेत्र को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किए जाएंगे।मेजर पूर्ण सिंह सर्किल से म्यूजियम सर्किल होते हुए हल्दीराम प्याऊ तक तथा पूगल फांटा से आरओबी तक की रोड को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की योजना,सार्दुलगंज योजना में सी ब्लॉक के पास ट्रेफिक पार्क विकसित करना,अवैध डेयरियों की समस्या के लिए गोपालन नगर की स्थापना,विभिन्न सर्किलों को रोड सेफ्टी के मानकों के मद्देनजर सर्किलों की डिजायन का पुनर्गठन जैसी अनेक योजनाएं है जो आज बीडीए की फाइलों में भोलाराम का जीव बनी हुई है।बीडीए के अधीन करीब 40 हजार बीघा गोचर भूमि,जिसमें 188 खसरों का उल्लेख है,उसे वापस राजस्व रिकॉर्ड में गोचर भूमि के रूप में दर्ज करने,राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रोक लगाने के लिए कठोर खेजड़ी बचाओ एक्ट बनाने,ग्रामीण क्षेत्र के जीर्ण-शीर्ण उपस्वास्थ्य केंद्रों के जीर्णोद्धार के लिए बजट की समस्या,स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त दवाइयां उपलब्धता,नोखा में जिला अस्पताल और श्रीडूंगरगढ़ में ट्रॉमा सेंटर शुरू क रने की मांग,जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी,पीबीएम अस्पताल यूरोलॉजी,एसएसबी,एमसीएच और जनाना वार्ड का जीर्णोद्धार और दवाईयों के लिये 200 करोड़ का स्थाई फंड,इसके अलावा हार्ट हॉस्पिटल में बाईपास सर्जरी की सुविधा शुरू करने,ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और जर्जर विद्यालय भवनों के जीर्णोद्धार एवं पुनर्निर्माण के लिए बजट की उपलब्धता का इंतजार भी जिलेवासियों को है।
2024 में बीकानेर विकास प्राधिकरण बना
भाजपा सरकार आने के बाद 2024 में नगर विकास न्यास को बीकानेर विकास प्राधिकरण का दर्जा मिला। इसके बाद बोर्ड की महज तीन बैठकें पिछले दो वित्तिय वर्ष में हुई है। इसमें 9 मार्च 2026 को तत्कालीन अध्यक्ष नम्रता वृष्णि की अध्यक्षता में बीकानेर विकास प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में शहर के विकास का करोड़ों रूपये का रोडमैप और मास्टर प्लान का अनुमोदन किया गया।21 जनवरी 2026 की बोर्ड बैठक में कुल 18 प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया,जिसमें इनमें आवासीय समेत तीन नई योजनाओं,जयनारायण व्यास कॉलोनी व सादुलगंज को निगम को सौपने,जोड़बीड़ योजना में विभिन्न विकास कार्यों,विभिन्न सार्वजनिक भवनों के किराए में बढ़ोतरी,योजनाओं में आरक्षित दरों को संशोधित,निगम व प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार के विभाजन एवं अनुकंपा नियुक्ति के साथ-साथ विभिन्न प्रस्तावों का अनुमोदन,टाउन हॉल,रवीन्द्र रंगमंच,अम्बेडकर भवन आदि के किराया दरों में भारी बढ़ोतरी,राजाशाही पट्टे व खांचा भूमि अब निगम के दायरे में पत्थर मंडी से लगते बाईपास रोड़ व घड़सीसर रोड के मध्य प्राधिकरण की भूमि पर वेयरहाउस योजना का अनुमोदन,नाल बड़ी में नाल हवाई अड्डे के समीप जैसलमेर-गंगानगर बाईपास रोड पर प्राधिकरण के स्वामित्व की करीब 10 हेक्टेयर भूमि पर इंटीग्रेटेड टाउनशिप योजना का अनुमोदन जैसे अहम फैसले लिए गए।27 अप्रैल 2026 नगरीय विकास विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में प्राधिकरण की विशेष समीक्षा बैठक हुई।
खिलाडिय़ों के लिये महज सपना ही है खेल गांव
विगत पांच साल पहले तत्कालीन नगर विकास न्यास के अध्यक्ष जिला कलक्टर नमित मेहता की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया था कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए नगर निकास न्यास द्वारा बीकानेर में खेल गांव का निर्माण करवाया जाएगा। इसमें सभी प्रकार के खेलों की गतिविधियां हो सकेंगी।युवाओं के लिए सुविधाओं वाला खेल गांव और मल्टी पर्पज स्टेडियम बनाने का निर्णय लिया गया।इसके लिए कि समीदेसर या जोड़बीड़ में संभावनाएं तलाशी जाने की बातें होनी लगी।नगर विकास न्यास तो बीकानेर विकास प्राधिकरण के रूप में पदोन्नत हो गया। परन्तु खिलाडिय़ों के खेल गांव का सपना अब भी सपना बना हुआ है।इतना ही नहीं नाइट टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना भी खटाई में पड़ गई।
ये समस्या बनी है जी का जंजाल
सीएम का ध्यान शहर की समस्या की ओर भी दिलाना चाहेंगे।जिसमें 2023 में प्रधानमंत्री के दौरे के समय बैरिकेडिंग के लिए खोदे गए गड्ढों को मुख्यमंत्री के दौरे से पहले खानापूर्ति के तौर पर भरा जा रहा है।शहर की टूटी सड़कें,शहर में गंदे पानी की समस्या,स्वीकृत 16 पानी की टंकियों का काम शुरू नहीं होने तथा आवारा पशुओं और पब्लिक पार्क क्षेत्र में बंदरों के आतंक,बीकेईएसएल द्वारा एमओयू के अनुसार मेंटेनेंस नहीं होने,ट्रांसफॉर्मरों की तारबंदी नहीं होने,वीसीआर के नाम पर आमजन में भय की स्थिति,बिजली कटौती और नए मीटरों से जनता परेशान है।एफआरटी टीमों की संख्या 30 से घटाकर चार किए जाने से बिजली के फॉल्ट समय पर ठीक नहीं हो पा रहे हैं।वहीं पूरा शहर सफाई,सड़क,चिकित्सा अव्यवस्था,बेपटरी ट्रेफिक व्यवस्था से भी आमजन परेशान है।यहां बैठे अधिकारियों द्वारा समस्याओं की सुनवाई नहीं करना बड़ी विडम्बना है।
