तहलका न्यूज,बीकानेर।जैसे जैसे निकाय चुनाव में नामांकन भरने की तिथि नजदीक आ रही है।वैसे वैसे दोनों राजनीतिक दलों में विरोध झेलना पड़ रहा है।जिसकी बड़ी वजह वार्डों के आरक्षण के बाद पार्टियों द्वारा टिकटों के वर्गीकरण के अनुरूप प्रत्याशी घोषित नहीं करना है।बताया जा रहा है कि यहीं कारण है कि नगर निकाय चुनाव को लेकर भाजपा और कांग्रेस ने टिकट वितरण की रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।दोनों ही दल कई वार्डों में प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक करने के बजाय सीधे अधिकृत प्रत्याशी को चुनाव चिन्ह यानी सिंबल देने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।इसके उपरान्त भी बीकानेर में कई ऐसे वार्ड है। जहां कार्यकर्ता व टिकटधारी खुलकर पार्टी के खिलाफ विरोध कर रहे है। कुछ वार्डों में बाहरी उम्मीदवार को आधार बनाकर तो कही सामान्य वार्ड में अन्य वर्ग को टिकट देने तो कही समाज विशेष की उपेक्षा के चलते कार्यकर्ताओं ने रोष जताया। पता चला है कि इनमें कई तो पूर्व पदाधिकारी और कई वर्तमान अधिकारी शामिल है।हालात यह है कि पदाधिकारियों ने इस्तीफे तक सौंप दिए है।
इन वार्डों में सामने आया विरोध
जानकारी मिली है कि भाजपा के अधिकृत रूप से घोषित नहीं हुए प्रत्याशियों में वार्ड 1,2,12,13,20,22,26,30,38,43,52,62,74,75 में विरोध के समाचार है।इसमें वार्ड 2 में खुलकर तो विरोध सामने नहीं आया है।लेकिन शेष वार्डों में भाजपाईयों ने खुलकर आक्रोश जताया है। वार्ड 38 में सामान्य सीट पर ओबीसी समाज को टिकट देने का विरोध है। तो अन्य सीटों पर पैराशूट उम्मीदवार का पैमाना बताया जा रहा है। वहीं वार्ड 29 में विश्नोई समाज की उपेक्षा का भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष ने विडियो जारी कर रोष जताया है। उन्होंने जिलाध्यक्ष पर स्वयं चुनाव लडऩे,अपने ड्राइवर को टिकट दिलाने जैसे गंभीर आरोप लगाये है।कांग्रेस में भी कुछ ऐसे ही हालात है।जहां पार्टी द्वारा टिकट नहीं देने को लेकर अपने पदाधिकारियों से अनबन बनी हुई है। पता चला है कि वार्ड 67 की टिकट वितरण को लेकर नाराजगी जताते हुए फड़बाजार मंडल के अध्यक्ष पद से अंजुल अली मुगल इस्तीफा तक दे दिया।इधर वार्ड 22 के सामान्य वर्ग की सीट पर एससी वर्ग के कार्यकर्ता को टिकट देने पर रोष जताया। तो 71 में भी विरोध की स्थिति बनी हुई है।
पहली सूची को लेकर दिन भर चर्चा
पहली प्रत्याशी सूची को लेकर आज दिनभर चर्चा बनी रही। पार्टी नेताओं का कहना है कि हर वार्ड को लेकर बारीकी से चर्चा की जा रही है और कार्यकर्ताओं की राय भी सुनी जा रही है।लेकिन दूसरी तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि नेताओं ने झूठे आश्वासन देकर टिकट चाहने वालों को भ्रम में रखा और नेताओं से नजदीकी रखने वालों,धनाढ्यों और बिकाऊ को टिकट दिए है।एक कार्यकर्ता ने तो एक पूर्व पार्षद का नाम लेते हुए कहा कि पिछले निकाय चुनाव में निर्दलिय जीतकर लाखों रूपये भाजपाईयों से लिए और उनको वोट बेच दिया।आज उसी बिकाऊ को टिकाऊ व जीताऊ समझकर टिकट दे दिया।
