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तहलका न्यूज,बीकानेर।निकाय चुनाव की लोकसूचना जारी होने के साथ ही बीकानेर नगर निगम सहित पांच पालिकाओं के वार्डों में नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है।चुनावी कार्यक्रम शुरू होने के बाद राजनीतिक दलों और दावेदारों में हलचल तो दिखाई दे रही है,लेकिन नामांकन के पहले दिन जिले में इसका असर नामांकन केंद्रों पर नजर नहीं आया।सुबह 10.30 बजे से दोपहर 3 बजे तक रिटर्निंग अधिकारी और सहायक रिटर्निंग अधिकारी अपने-अपने केंद्रों पर मौजूद रहे।चुनाव प्रक्रिया के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी।अधिकारी नामांकन पत्र जमा कराने वाले प्रत्याशियों का इंतजार करते रहे,लेकिन पहले दिन बड़ी संख्या में पर्चे जमा नहीं हुए।कई दावेदार नामांकन पत्र लेने जरूर पहुंचे।उन्होंने चुनाव से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया की जानकारी भी ली,लेकिन नामांकन दाखिल करने वालों की संख्या न के बराबर रही।इसकी सबसे बड़ी वजह राजनीतिक दलों की ओर से टिकट का ऐलान नहीं होना माना जा रहा है।भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों में टिकट को लेकर दावेदारों की नजर पार्टी की सूची पर टिकी है।हर वार्ड में कई नेता और स्थानीय कार्यकर्ता टिकट की दौड़ में हैं।ऐसे में अधिकतर दावेदार पहले यह साफ होने का इंतजार कर रहे हैं कि पार्टी किसे अधिकृत प्रत्याशी बनाती है।

अंतिम तिथि के बाद बदल जाएगी तस्वीर
नामांकन प्रक्रिया के बीच 28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश रहेगा।इसका सीधा मतलब है कि उम्मीदवारों के पास नामांकन दाखिल करने के लिए 29 और 31 अगस्त के दो प्रमुख दिन ही बचेंगे।यही दो दिन चुनावी गतिविधियों के लिहाज से सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहने वाले हैं।बीकानेर नगर निगम में 80 वार्ड हैं और इनके लिए 5 नामांकन केंद्र बनाए गए हैं।जैसे ही भाजपा और कांग्रेस की ओर से टिकटों का ऐलान होगा,इन केंद्रों पर भीड़ बढऩे की संभावना है।पार्टी के अधिकृत उम्मीदवार नामांकन दाखिल करेंगे तो टिकट की दौड़ में पीछे रह गए दावेदार भी अपना अगला कदम तय करेंगे।यही वह स्थिति होगी जहां चुनावी मुकाबला केवल भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं रहेगा।टिकट नहीं मिलने से नाराज नेता और स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले दावेदार निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतर सकते हैं।राजनीतिक दलों के लिए यही सबसे बड़ी चुनौती होगी। किसी वार्ड में पार्टी से टिकट नहीं मिलने वाला मजबूत दावेदार अगर निर्दलीय के तौर पर मैदान में आता है,तो वह पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के वोटों में सेंध लगा सकता है।

2019 चुनाव में निर्दलीयों का वोट शेयर पार्टियों के लिए चिंता की वजह
पिछले नगर निगम चुनाव के आंकड़े इस आशंका को और मजबूत करते हैं।वर्ष 2019 में नगर निगम में कुल 80 वार्ड थ।इन चुनावों में भाजपा ने 79 प्रत्याशी मैदान में उतारे थे,जबकि कांग्रेस ने 79 उम्मीदवारों को टिकट दिया था।इसके मुकाबले 164 निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।निर्दलीय उम्मीदवारों की असली ताकत उनके जीत के आंकड़े से ज्यादा उनके वोट शेयर में दिखाई दी।नगर निगम में निर्दलीय उम्मीदवारों को कुल वोटों में 26.46 प्रतिशत हिस्सा मिला था।जो बीजेपी 34.99 और कांग्रेस 36.07 कम था।निर्दलीय उम्मीदवारों का वोट शेयर प्रतिशत दोनों प्रमुख दलों के मुकाबले कम जरूर था,लेकिन 26.46 प्रतिशत वोट किसी भी चुनाव में छोटा आंकड़ा नहीं माना जा सक ता। खासतौर पर तब, जब कई वार्डों में जीत का अंतर कम हो।

भाजपा लगी डेमेज कंट्रोल में,भगवान का सहारा
भाजपा के आवेदनों के बाद टिकट को लेकर चल रही कसमकश के बीच टिकट वितरण के बाद कही बगावत न हो जाएं।इसको लेकर भाजपा ने पहले ही डेमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है।इसको लेकर प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने मोर्चा संभालते हुए शिव पार्वती भवन में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में मां करणी की कसम भाजपा कार्यकर्ताओं को दिलाई।इस दौरान उन्होंने पार्टी के कार्यकर्ताओं व टिकट मांगने वालों को मजबूती से पार्टी उम्मीदवार के साथ खड़े रहने की बात भी कही।सम्मेलन में दिलाई इस कसम का विडियो सोशल मीडिया पर भी जमकर वायरल हो रहा है।भाजपा उपाध्यक्ष के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में टिकट वितरण के बाद नाराजगी से रोकने की कवायद माना जा रहा है।