कौन पहनेगा मोतियों का हार,कौन होगा नौका पर सवार
तहलका न्यूज,बीकानेर।निकाय चुनाव में रैलियों,जनसंपर्क और बैठकों में भले ही हाई-स्पीड 5 जी नेटवर्क,एआई,इंस्टाग्राम रील्स और ड्रोन कैमरे देखने को मिले,लेकिन जब आम मतदाता बैलेट बॉक्स के सामने पहुंचेगा,तो उसे कोई स्मार्टफोन,लैपटॉप, टैबलेट या इलेक्ट्रिक स्कूटर नजर नहीं आएगा। बल्कि गांवों-कस्बों की पुरानी चौपाल,दादी-नानी की रसोई और गुजरे जमाने की सादगी ईवीमी व बैलेट पेपर आम मतदाओं को याद दिलाएगी।मारवाड़ी में एक कहावत है जिण री जड़ गहरी,उण रो भरोसो भारी….कुछ इसी सोच के साथ इस बार निकाय चुनाव में देसी चीजां देसी भरोसो को आधार बनाकर निर्दलियों को चुनाव चिन्हों का आवंटन किया जाएगा।आयोग की की ओर से निगम चुनाव में चुनाव चिन्हों की जारी ताजा सूची में डिजिटल इंडिया की चकाचौंध के बीच एक बार फिर मिट्टी,विरासत और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े देसी प्रतीक झलक दिखाई है।
देसी चीजां,देसी भरोसो
निर्दलीय प्रत्याशियों को आवंटित होने वाले 40 चुनाव चिन्हों में अलमारी,चप्पलें,सेव,कोट,गुब्बारा,चारपाई,चूडिय़ों,मिक्सी,फ्रॉक,बाल्टी,रेफ्रिजरेटर,लिफाफा,टेलीविजन,फव्वारा,टेलीफोन,फूलगोभी,गैस चूल्हा,जंजीर,टॉफिया,चक्की, साइकिल पंप,अंगूर,आरी,हरी मिर्च,स्कूल का बस्ता,हाथ गाड़ी,मोतियों का हार,पेन्सिल डिब्बा,बेंच,तकिया,आदमी व पाल युक्त नौका,बिजली का खंभा,बक्सा,बांसुरी,ईंटें,कैंची,हारमोनियम,सिलाई की मशीन,आइसक्रीम,जूता जैसे सामान शामिल हैं।
तीखी हरी मिर्च और साइकिल पंप को भी मिली जगह
सिर्फ इतना ही नहीं,रसोई और सब्जी मंडी का भी इस पूरी सूची में जबरदस्त दखल देखने को मिल रहा है।मतपत्र पर इस बार फूलगोभी,मीठे अंगूर, तीखी हरी मिर्च,हाथगाड़ी,लाल ईंट,फव्वारा,साइकिल पंप और पाल वाली नाव जैसे प्रतीक भी अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराएंगे।बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल,कांग्रेस का हाथ का पंजा,बहुजन समाज पार्टी का हाथी,मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी का हथौड़ा-हंसिया और तारा,आम आदमी पार्टी का झाड़ू और नेशनल पीपुल्स पार्टी का किताब चिन्ह रहेगा।इसके अलावा राजस्थान की मान्यता प्राप्त क्षेत्रीय पार्टियों में हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी यानी आरएलपी का चुनाव चिन्ह बोतल और भारत आदिवासी पार्टी यानी बीएपी का चुनाव चिन्ह धनुष-बाण रहेगा।
कैसे बांटे जाते हैं चुनाव चिह्न ?
चुनाव आयोग की चुनाव चिन्हों के आवंटन की आधिकारिक प्रक्रिया क्या होती है,चलिए बताते हैं आपको-नामांकन दाखिल करते समय हर निर्दलीय प्रत्याशी को आयोग की मुक्त सूची में से अपनी पसंद के तीन चुनाव चिन्हों का विकल्प वरीयता क्रम यानी पहली,दूसरी और तीसरी प्राथमिकता के आधार पर फॉर्म में भरना होता है।नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की समय सीमा खत्म होने के बाद निर्वाचन अधिकारी चिन्हों का आवंटन करते हैं।अगर किसी एक चुनाव चिन्ह पर केवल एक ही प्रत्याशी ने पहली प्राथमिकता जताई है,तो वो चिन्ह सीधे उसे मिल जाता है। लेकिन अगर एक ही प्रतीक पर दो या दो से ज्यादा उम्मीदवार पहली प्राथमिकता का दावा करते हैं,तो विवाद सुलझाने के लिए निर्वाचन अधिकारी सभी प्रत्याशियों या उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पारदर्शी तरीके से लॉटरी निकालते हैं।जिस प्रत्याशी का नाम लॉटरी में निकलता है,उसे वो प्रतीक दे दिया जाता है और बाकी प्रत्याशियों को उनकी अगली प्राथमिकताओं या उपलब्ध बचे हुए मुक्त चिन्हों में से प्रतीक आवंटित किए जाते हैं।
