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तहलका न्यूज,बीकानेर।निकाय चुनाव में महापौर व उप महापौर के लिये हुई क्रॉस वोटिंग का मामला अब ज्यादा ही तूल पकड़ता जा रहा है।दोनों ही दलों के हारे हुए प्रत्याशी अपने ही पार्षदों की परतें उतारने में लगे है। तो वहीं इस मामले में अपना नाम जबरन घसीटने को लेकर कांग्रेसी पार्षद मनोज विश्नोई ने सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम मुस्तफा के उस बयान पर पलटवार किया है। जिसमें उन्होंने संघी विचारधारा के लोगों को टिकट देने की बात कही। विश्नोई ने सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि इसके लिये उन्हें मुस्तफा से किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं।आज जो मुस्तफा समाज के नाम पर इतना अर्नगल माहौल पैदा कर रहे है।क्या वे दूध के धुलें हुए है।उनकी विधानसभा चुनाव से पहले की सोशल मीडिया की पोस्ट देखे। जिन्होंने कांग्रेस के खिलाफ कितना जहर घोला है। वो चुनाव लड़े तो कांग्रेस जीवत रहती है और हम लड़े तो कांग्रेस मर जाती है।आज वे हिन्दु-मुस्लिम की बात कर दोनों समाजों में दरार पैदा कर रहे है।उन्होंने कहा कि अगर वे संघी विचारधारा के होते तो पिछली बार 20-20 लाख रूपये में पार्षद बिके और सुशीला कंवर को वोट दिया था। लेकिन मैनें ऐसा नहीं किया।मैं निर्दलीय होने के बाद भी कांग्रेस के साथ खड़ा रहा।विश्नोई ने राजनीतिक रोटियां सेकने के लिये समाज को न बांटने की अपील मुस्तफा से की।

लड़ाई कांग्रेस में थी,दोषारोपण दूसरों पर क्यों
विश्नोई ने कहा कि लड़ाई कांग्रेस में थी। फिर दोषारोपण दूसरे पर क्यों। जब एक नाम पर अल्पसंख्यक वर्ग ही सहमत नहीं। इतना ही नहीं जावेद पडिहार,अब्दुल वाहिद,नसीम बानो के नाम पर अल्पसंख्यक समाज के पार्षद ही सहमत नहीं थे। कोई किसी का विरोध कर रहा था तो कोई कि सी का। वहीं एससी वर्ग भी इस की पैरवी की कि अनेक बार अल्पसंख्यक समाज को सभापति,महापौर,न्यास अध्यक्ष व उप महापौर जैसे पद दिये जा चुके है तो इस बार उनके समाज को मौका दिया जाना चाहिए।ऐसी परिस्थिति में कांग्रेस की आपसी कलह हार का कारण बन गई।उन्होंने कहा कि एक पार्षद नोटा को वोट देकर चला गया तो दूसरे का खारिज हो गया।जो पार्षद पांच छ:हजार वोटों को साधकर जीता है। उससे ऐसी गलती होना।यह चिंतन की बात है ना कि समाज की आड़ में दोषारोपण।

पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं,36 कोम की
पार्षद विश्नोई ने कहा कि पार्टी के जो लोग आज समाज के नाम पर नेतागिरी कर रहे है।वो अपने ही कांग्रेसी पार्षद प्रत्याशियों को हराने में लगे थे।इतना ही नहीं कई वार्डों में अल्पसंख्यक समाज के लोग पार्टी प्रत्याशी के सामने खड़े रहे। उनको बैठाने में समाज कहां चला गया था।किसी कमजोर वर्ग के अल्पसंख्यक समाज के लोगों के साथ परेशानी में ये नेता कहां थे। ये पार्टी किसी एक वर्ग की नहीं बल्कि 36 कोम की है।इस प्रकार बिना प्रमाण के एक दूसरे के उपर आरोप-प्रत्यारोप लगाना कांग्रेस को कमजोर करने की हरकत है।

मेरे पास दोनों दलों के सबूत
विश्नोई ने इस बात का दावा किया है कि जो विश्वासघात की बात कर रहा है। वे कितने पाक साफ है,इसके सबूत मेरे पास है। कांग्रेस के ही नहीं भाजपा के नेताओं के सबूत में मेरे पास है।जरूरत पडऩे पर वे सभी सबूत पेश करने की क्षमता रखता हूं।मेरा प्रेस वार्ता करने का उद्देश्य बस इतना ही है कि जो दोषी लोग साफ बनकर घूम रहे है।वो चुप बैठे है।लेकिन मुझ पर बेवजह इल्जाम लगाया जा रहा है।विश्नोई ने कहा कि वे वक्त आने पर प्रदेश नेतृत्व व जनता के सामने सबूत रख देंगे।उन्होंने कहा कि अगर मुझे किसी प्रकार के पद और रूपयों का लालच होता तो महापौर व उप महापौर चुनाव में खुलकर विपक्षी दल का विरोध नहीं करता।नोटिस मिलने के बाद भी मैं खुलकर बोला।मैं दबाव में नहीं आया। जो आएं उनको बुखार तक चढ़ गया।बातों ही बातों में उन्होंने पूर्व महापौर पर भी तंज कसते हुए कईयों को हराने की बात कही।