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तहलका न्यूज,बीकानेर।एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया,राजस्थान चैप्टर के वार्षिक सम्मेलन के वैज्ञानिक कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार को बीकानेर में आधुनिक लेजर सर्जरी एवं एंडोस्कोपी के लाइव डेमोंस्ट्रेशन के साथ हुई। कार्यक्रम का आयोजन एस.पी.मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम अस्पताल के सर्जरी विभाग द्वारा बीकानेर सर्जन्स सोसायटी के सहयोग से किया जा रहा है।कार्यक्रम की शुरुआत पीबीएम अस्पताल के गोल पार्क में मोरिंगा (सहजन) औषधीय पौधे के पौधारोपण तथा पीबीएम अस्पताल परिसर में प्रिंस विजय सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई।इसके बाद लाइव सर्जिकल वर्कशॉप में पाइल्स,फिस्टुला,फिशर,पायलोनाइडल साइनस एवं वैरिकोज वेन्स के कुल 20 जटिल एवं चयनित मामलों का आधुनिक लेजर एवं मिनिमल एक्सेस तकनीक से ऑपरेशन तथा लाइव डेमोंस्ट्रेशन किया गया।इसका उद्देश्य युवा सर्जनों को नवीनतम तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना रहा।अपर जीआई एंडोस्कोपी का लाइव प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण डॉ.एस.के.गोयल,कोटा तथा डॉ.राकेश SMS मेडिकल कॉलेज,जयपुर द्वारा किया गया।लेजर पायलोनाइडल साइनस सर्जरी का प्रदर्शन डॉ.सोनाली आला,अग्रोहा, हरियाणा द्वारा किया गया।वैरिकोज वेन्स की लेजर सर्जरी डॉ.प्रदीप पंवार,जोधपुर एवं डॉ.हेमेन्द्र शर्मा,फोर्टिस जयपुर द्वारा प्रदर्शित की गई।पाइल्स सर्जरी का लाइव प्रदर्शन डॉ.जया माहेश्वरी,जयपुर द्वारा किया गया।Complicated फिस्टुला का ऑपरेशन डॉ.विवेक शर्मा,अजमेर द्वारा किया गया।वर्कशॉप में राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञ सर्जनों ने जटिल मामलों की सर्जरी एवं नवीनतम मिनिमल एक्सेस तकनीकों का प्रदर्शन किया।युवा सर्जनों ने इन प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष देखकर आधुनिक सर्जिकल तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं को समझा।दोपहर के भोजन के बाद AI in Healthcare विषय पर एक इंटरैक्टिव कार्यशाला आयोजित की गई।इसका संचालन डॉ.मयंक,आगरा ने किया।कार्यशाला में प्रतिभागियों के साथ संवादात्मक तरीके से चर्चा की गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग नई चिकित्सा शोध परियोजनाओं,शोध-आधारित विश्लेषण तथा मरीजों के उपचार संबंधी निर्णयों में किस प्रकार किया जा सकता है।प्रतिभागियों ने AI के व्यावहारिक उपयोग,संभावनाओं और चिकित्सा क्षेत्र में इसके बढ़ते महत्व पर सक्रिय रूप से चर्चा की।वरिष्ठ प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष,सर्जरी विभाग तथा आयोजन सचिव ASIRAJ 2026, डॉ.मनोहर एल.दवाँ ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य अनुभवी सर्जनों के अनुभव एवं नवीनतम तकनीक को युवा सर्जनों तक पहुंचाना है,ताकि आधुनिक,कम चीरे वाली एवं मरीज-केंद्रित सर्जिकल सेवाओं को और बढ़ावा दिया जा सके।उन्होंने कहा कि AI जैसी उभरती तकनीकों का समावेश चिकित्सा शिक्षा,शोध और मरीजों के बेहतर उपचार निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
3-4 अक्टूबर को होगी दो दिवसीय POCUS वर्कशॉप
एस.पी.मेडिकल कॉलेज एवं पी.बी.एम.अस्पताल के निश्चेतन विभाग तथा ISA सिटी ब्रांच के संयुक्त तत्वावधान में 3 एवं 4 अक्टूबर को दो दिवसीय पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड वर्कशॉप का आयोजन किया जाएगा।कार्यशाला का आयोजन पी.बी.एम.अस्पताल परिसर स्थित ओ.टी.‘ए’ ब्लॉक के सेमिनार हॉल में होगा।निश्चेतन विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला की आयोजन अध्यक्ष डॉ.कांता भाटी ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य डॉक्टरों को मरीज के बिस्तर पर ही अल्ट्रासाउंड के माध्यम से त्वरित जांच,सही निदान और गंभीर मरीजों के बेहतर उपचार के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल प्रदान करना है।कार्यशाला का मुख्य विषय“संभावनाओं को देखना,निदान में सुधार और गंभीर मरीजों की देखभाल में बदलाव है।कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।इनमें आर्टेमिस हॉस्पिटल,गुरुग्राम के डॉ.जीतेंद्र शर्मा,एम्स जोधपुर के डॉ.सादिक मोहम्मद एवं डॉ.राकेश कुमार,एम्स नई दिल्ली के डॉ.मृत्युंजय कुमार तथा एम्स बठिंडा के डॉ.गोपाल कृष्ण जालवाल शामिल हैं।
व्यावहारिक प्रशिक्षण पर रहेगा विशेष जोर
वर्कशॉप में प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं,बल्कि हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से अल्ट्रासाउंड का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया जाएगा। इसमें हृदय,फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं की अल्ट्रासाउंड जांच सहित गंभीर मरीजों के आकलन में POCUS के विभिन्न उपयोगों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।पॉइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड एक ऐसी पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड तकनीक है,जिसके माध्यम से चिकित्सक मरीज के पास ही तुरंत आवश्यक जांच कर सकते हैं।विशेष रूप से गंभीर और आपातकालीन मरीजों में इससे बीमारी की स्थिति को जल्दी समझने और समय पर उपचार शुरू करने में मदद मिलती है।
आपातकालीन परिस्थितियों पर विशेष सत्र
कार्यशाला में क्राइसिस मैनेजमेंट और सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण भी आयोजित किया जाएगा।इसमें आपातकालीन परिस्थितियों के लाइव प्रदर्शन एवं व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से चिकित्सकों को संकट की स्थिति में त्वरित निर्णय लेने और मरीज का बेहतर प्रबंधन करने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।इसमें विभिन्न क्लीनिकल विभागों के रेजिडेंट डॉक्टरों की भागीदारी रहेगी।कार्यशाला को एस.पी.मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ.सुरेन्द्र वर्मा एवं पी.बी.एम. अस्पताल अधीक्षक डॉ.बी.सी.घीया का मार्गदर्शन प्राप्त है।दोनों ने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी हैं।कार्यशाला के सफल आयोजन में डॉ.सोनाली धवन,डॉ.कीवी मंतन तथा वर्कशॉप को-ऑर्डिनेटर डॉ.सत्यप्रकाश एवं डॉ.जिनेश सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।