तहलका न्यूज,बीकानेर।‘साहब,10 हजार नकद ले लो और सिर्फ आधार कार्ड दे दो’-बीकानेर की गली-मोहल्लों में घूम रहे दुकानदारों और एजेंटों का ये झासा सैकड़ों गरीब परिवारों को बर्बाद कर रहा है।आसान किस्तों पर मोबाइल, एसी,टीवी दिलाने वाली बड़ी फाइनेंस कंपनियों के नाम पर शहर में ‘फंडिंग’ का अवैध मकडज़ाल फैल चुका है। इसमें उपभोक्ता को न तो सामान मिलता है,न पैसा। मिलता है सिर्फ किस्तों का बोझ और रिकवरी एजेंटों का आतंक।ये एजेण्ट दुकानदार और फाइनेंस एजेंट मजदूर,रिक्शा चालक,घरेलू काम करने वाली महिलाओं को टारगेट करते हैं। उन्हें तुरत 8-10 हजार नकद देने का लालच दिया जाता है।फिर आधार,पैन लेकर बजाज फाइनेंस,एचडीबी, एचडीएफसी,टीवीएस क्रेडिट जैसी कंपनियों से 40-60 हजार का एसी्रफ्रिज या एलईडी फाइनेंस करवा लिया जाता है।फाइनेंस होते ही शोरूम से सामान दुकानदार अपने कब्जे में ले लेता है। उपभोक्ता को सिर्फ नकद थमा दिया जाता है।वही सामान दुकानदार बाजार में 70 प्रतिशत रेट पर बेच देता है। 2-3 महीने बाद जब ई एमआई बाउस होती है तो फाइनेंस कंपनी का रिकवरी विभाग एक्टिव हो जाता है।तब गरीब को पता चलता है कि 10 हजार के चक्कर में 50 हजार + ब्याज उसके सिर पर चढ़ चुका है। बताया जा रहा है कि कोटगेट,नत्थूसर गेट,गंगाशहर,मुरलीधर व्यास कॉलोनी के कुछ मोबाइल एससी शोरूम इस गैंग में शामिल बताए जा रहे हैं।पुलिस सर्विलांस शुरू कर चुकी है।
वसूली के नाम पर गुंडागर्दी,रिश्तेदार भी नहीं बचे
किस्त टूटते ही कंपनियां लोकल लेवल पर ‘डीआरए’ के नाम पर आवारा लड़कों को हायर करती हैं।इनके पास न तो डीआरए लाइसेंस होता है,न कंपनी का आई कार्ड।ये सीधे घर पर धावा बोलते हैं और घर की महिलाओं के सामने गाली-गलौज,बच्चों को स्कूल से उठा ले जाने की धमकी तक देते है। इतना ही नहीं ससुराल,मायके,ऑफिस में फोन कर बदनाम करने से बाज नहीं आते।मजे की बात तो यह है कि ये आवारा रिकवरी एजेण्ट कोई टाइम नहीं देखते सुबह हो या देर रात घर के बाहर बाइक खड़ी करके हॉर्न बजाने जैसी हरकतें करते है। साथ ही ‘पुलिस केस होगा,जेल जाओगे,सिविल खराब कर देंगे’बोलकर मानसिक तनाव भी देते है।पिछले महीने गंगाशहर में एक रिक्शा चालक ने रिकवरी एजेंटों की धमकी से तंग आकर जहर खा लिया था। समय पर पीबीएम पहुंचाने से जान बची।
क्या कहते है आरबीआई के नियम
ये आरबीआई की ओर से ऋण नियमों के तहत स्पष्ट लिखा गया है कि उपभोक्ता की निजता भंग नहीं कर सकते। वहीं संडे/छुट्टी के दिन विजिट बैन है। किसी भी ऋण संस्था के एजेण्ट के पास उसका आई कार्ड होना अनिवार्य है। घर आने से पहले कॉल कर अपॉइंटमेंट लेना जरूरी जैसे नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस-प्रशासन का कहना
‘फंडिंग आरबीआई के नियमों के तहत धोखाधड़ी है। आईपीसी 420, 406 के साथ-साथ उगाही की धारा 384 भी लगेगी। हमने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि रिकवरी एजेंट अगर बदतमीजी करे तो तुरंत 112 पर कॉल करें। दुकानदार और एजेंट दोनों गिरफ्तार होंगे।’धमकी की कॉल रिकॉर्ड करें। नजदीकी थाने में एफआईआर कराएं। आरबीआई के पोर्टल पर 5 मिनट में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें। कंपनी पर 1 लाख तक जुर्माना लग सकता है।
एक्सपर्ट की राय
सीए मुकेश मोदी कहते हैं,’कोई भी फाइनेंस कंपनी आपको प्रोडक्ट के बदले कैश नहीं देती।अगर कोई दुकानदार ‘कैश फंडिंग’ ऑफर करे तो 100 प्रतिशत फ्रॉड है। सिविल स्कोर एक बार खराब हुआ तो 7 साल तक कोई लोन नहीं मिलेगा। 10 हजार के लालच में जिंदगी खराब न क रें।’सिविल कोर्ट में मेंटल हैरेसमेंट के लिए 5 लाख तक का हर्जाना क्लेम कर सकते हैं।अगर आपके मोहल्ले में कोई ‘फंडिंग वाला’ घूम रहा है तो उसका वीडियो बनाकर नजदीक पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करें।
