तहलका न्यूज,बीकानेर।12 साल के अंतराल के बाद निगम में अपना बोर्ड बनाने वाली कांग्रेस अभी महापौर बनने का जश्न मना ही रही थी कि उसकी यह खुशियों में उस समय खलल पड़ गया। जब मंगलवार को हुए उप महापौर के चुनाव में भाजपा ने उनसे जीती हुई बाजी छीन ली। आज हुए उप महापौर के चुनाव में भाजपा के पंकज गहलोत ने कांग्रेस की नसीमा बानो को दो मतों से मात देकर भाजपा में नई जान फूंक दी और महापौर के हार का कर्ज उतार दिया।बताया जा रहा है कि कांग्रेस के प्रत्याशी को 38 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी 40 वोट लेने में कामयाब रहे।उनके जीत की घोषणा के साथ ही निगम परिसर व बाहर समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।भाजपा व उनके समर्थकों ने पंकज की जीत को कार्यकर्ता की जीत बताया।
कांग्रेस कार्यकर्ता-नेता स्तब्ध
इस जीत के बाद कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता स्तब्ध रह गये है।बताया जा रहा है कि परिणाम आने के बाद कांग्रेस के पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला,महापौर अनिल कल्ला,जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल,पूर्व अध्यक्ष यशपाल गहलोत, शिवलाल गोदारा,गुलाम मुस्तफा,अब्दुल मजीद खोखर सहित अनेक नेताओं को इस प्रकार के परिणाम की उम्मीद नहीं थी। जिसके चलते उनके चेहरे उतर गये।
महापौर-उप महापौर में हुई क्रॉस वोटिंग
राजनीतिक जानकारों की माने तो दोनों ही चुनावों में क्रॉस वोटिंग की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।महापौर के चुनाव में जहां भाजपाईयों व कांग्रेसजनों ने एक दूसरे के खिलाफ क्रॉस वोट डाले तो उप महापौर चुनाव में भी कांग्रेस की ओर से क्रॉस वोट किये गये है।इतना ही नहीं ये भी जानकारी सामने निकल कर आ रही है कि अल्पसंख्यक समाज भी गुलाम मुस्तफा बाबू भाई के टिकट को लेकर अडियल रवैये से नाराज था।जो भी हार की बड़ी वजह बना।जिसके चलते कई अल्पसंख्यक समाज के पार्षद भी क्रॉस वोट कर सकते है। उधर राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा भी है कि डॉ कल्ला के विरोधियों ने गुलाम मुस्तफा के कंधे पर बन्दूक रखकर हार का ठिकरा उन पर फोड़ दिया।
उप महापौर में दिखे भाजपा के कई नेता,कल रहे गायब
मजे की बात यह है कि महापौर और उप महापौर चुनाव में खासी भिन्नता देखने को मिली। जहां उप महापौर चुनाव में भाजपा के कई नेता प्रत्याशी के साथ खड़े दिखे। लेकिन महापौर के चुनाव में ये नेता गायब रहे।इन्होंने महापौर के चुनाव में इतनी दिलचस्पी नहीं दिखाई।वहीं आज बड़ी सक्रियता और जोश के साथ परिणाम घोषित होने के बाद नारेबाजी भी करते दिखे। कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि महापौर के चुनाव की बजाय उप महापौर चुनाव में भाजपाईयों में खासा जोश व उत्साह देखने को मिला।
गोपाल गहलोत के मास्टर स्ट्रोक से कांग्रेस को मिली मात
महापौर चुनाव की हार के बाद हताश हो चुकी भाजपा में गोपाल गहलोत ने संजीवनी दी। पता चला है कि गोपाल गहलोत ने पंकज गहलोत को उप महापौर का चुनाव प्रत्याशी घोषित करने का मास्टर स्ट्रोक खेला।उन्होंने कांग्रेस की आपसी द्धन्द्ध को आधार बनाकर मूल ओबीसी का दाव खेला। जो कामयाब हो गया। जिसके चलते भाजपा से नाराज चल रहे एक नेता के करीबी माने जाने वाले पंकज गहलोत को इसका फायदा मिला।उनके दो निर्दलीयों व कांग्रेस मित्रों से संबंधों का लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिला और वे कांग्रेस में क्रॉस वोट करवाने में सफल रहे। हाला ंकि इस पूरे चुनाव में खास तौर पर महापौर के चुनाव में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की दूरी भी चर्चा का विषय बनी रही। अंदर खाने की बात तो यह है कि जिन नेताओं ने मुंह दिखाई की रस्म निभाई वे भी दिखावे के तौर पर। परन्तु उप महापौर के चुनाव में सभी विजय प्रत्याशी के साथ दिखे।
क्रॉस वोटिंग की गुत्थी कौन सुलझाएगा?
मेयर चुनाव के बाद क्रॉस वोटिंग की गुत्थी ऐसी उलझी है जिसे कांग्रेस,भाजपा के रणनीतिकार भी नहीं सुलझा पा रहे हैं। भले ही कांग्रेस को महापौर चुनाव में 50 और उप महापौर चुनाव में 38 वोट मिले हों पर कांग्रेस के भीतर क्रॉस वोटिंग होने का दावा अभी भी किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक महापौर के चुनाव में भाजपा के सिंबल पर जीतने वाले पार्षदों ने भी कांग्रेस को वोट दिए हैं। अब सवाल ये है कि कांग्रेस से कितने पार्षदों ने क्रॉस वोंटिंग की और भाजपा खेमे से कितने पार्षद फि सले। अप्रत्याशित नतीजों के बाद भाजपा के नेता अपने खेमे से क्रॉस वोटिंग करने वालों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं। मेयर चुनाव के मतपत्रों पर नंबरिंग थी। मगर निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों ने मतपत्र िमक्स कर दिए। इसलिए ये पता लगना मुश्किल है कि किसने किसके पक्ष में वोट किया।
