
तहलका न्यूज,बीकानेर। बीकानेर में औद्योगिक विकास की बड़ी बड़ी बातें की जाती है। एसी के कमरों में बैठकर जिले के आलाधिकारी व्यापारियों के साथ औद्योगिक विकास के पंख लगाने के दावे भी करते है। लेकिन हकीकत इससे खासी दूर है। जिसका जीता जागता उदाहरण करणी रीको इ ंडस्ट्री एरिया है। जहां गंदे पानी के रूप में विकास की गंगा बह रही है। इसका बड़ा कारण यहां टूटा गंदले पानी का नाला है। जो न केवल व्यापारियों के लिये बल्कि यहां रहने वाले श्रमिकों के लिये भीा जी का जंजाल बनता जा रहा है। हालात यह है कि नाले के क्षतिग्रस्त होने से गंदा पानी चारों ओर फैल गया है,जिससे पूरे क्षेत्र में संडाध और बदबू का वातावरण बना हुआ है। सड़कों पर फैले गंदे पानी के कारण न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है,बल्कि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी हुई है। जगह-जगह जलभराव के चलते वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से समस्या बनी हुई है,लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है। जाम नालियों और गंदे पानी के जमाव से डेंगू,मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नागरिकों का कहना है कि समय रहते सफाई नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फैक्ट्रियां का जमा होता है गंदला पानी
इस क्षेत्र में मिठाई की फैक्ट्रियां होने के कारण टूटे नाले में जमा पानी बदबू के कारण आसपास के लोगों का जीना मुहाल कर रखा है। इस पानी में पॉलिथिन व अन्य कचरा जमा हो जाता है। जिसके कारण मच्छरों की भरमार है। मजे की बात तो यह है कि सड़क की खुदाई के चलते आसपास की फैक्ट्री में श्रमिकों व कामगारों का प्रवेश तक मुश्किल हो चला है। जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही है।कई बार शिकायत भी की गई लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि रिको प्रशासन की ओर से फैक्ट्री संचालकों की ओर से साधन सुविधाओं के नाम पर किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गई है। जबकि भूखंड खरीद के समय सभी सुविधाओं की राशि जमा करवाई जाती है।
यह उठाई है मांग
उद्योग क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों और आसपास के व्यापारियों ने प्रशासन से मांग की है कि टूटे हुए नाले की शीघ्र मरम्मत कराई जाए और क्षेत्र में सफाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए,ताकि लोगों को राहत मिल सके। यह समस्या न केवल स्वास्थ्य के लिए खतरा बन रही है, बल्कि औद्योगिक गतिविधियों को भी प्रभावित कर रही है। दबे स्वरों में कुछ व्यापारियों ने तो यहां तक कह दिया कि बीछवाल उद्योग संघ बना होने के बाद भी इस समस्या की ओर उनका ध्यान नहीं जा रहा है।
