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तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निगम चुनाव के नतीजे सोमवार को आएंगे।लेकिन इन नतीजोंं से पहले दोनों ही राजनीतिक दल अपना मेयर बनाने के लिये हरसंभव प्रयास में जुट गये है।मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी जोड़-तोड़ शुरू हो गया है। जिसके चलते कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने पार्षद प्रत्याशियों को एक साथ रखा है।ये होटल-रिसोर्ट सियासी ‘किले बन गये है।कांग्रेस के 78 प्रत्याशी बीकानेर के नोखा रोड स्थित एक होटल में रखा है तो भाजपा के प्रत्याशी जोधपुर रोड़ स्थित एक होटल में ठहराएं गये है।दोनों प्रमुख दलों की ओर से अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ मेयर चुनाव की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस इसे बाड़ेबंदी मानने से इनकार कर रही है।

कांग्रेस बोली- बाड़ेबंदी नहीं,प्रशिक्षण शिविर
कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी और मेयर पद के दावेदार माने जा रहे अनिल कल्ला ने कहा कि पार्टी ने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी नहीं की है,बल्कि प्रशिक्षण शिविर चल रहा है।उनके अनुसार इस बार कांग्रेस ने कई नए चेहरों को टिकट दिया है।इन प्रत्याशियों को पार्टी की रीति-नीति और मेयर चुनाव की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है।प्रत्याशियों को यह भी बताया जा रहा है कि मेयर चुनाव में किस तरह वोटिंग करनी है और पार्टी के विचार को किस तरह आगे बढ़ाना है।कांग्रेस के सभी 78 प्रत्याशी फिलहाल एक साथ हैं और पार्टी के आला नेताओं के संपर्क में हैं।

रोज होटल पहुंच रहे कल्ला-मेघवाल
कांग्रेस प्रत्याशियों के साथ संवाद के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला भी रोज होटल पहुंच रहे हैं।वे प्रत्याशियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और चुनावी रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं।शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल और पूर्व शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत भी प्रत्याशियों से मिलने होटल पहुंच रहे हैं।यहां वे महापौर चुनने की रणनीति पर भी मंथन कर रहे है।संभावित नामों को टटोला जा रहा है।

भाजपा ने भी संभाले अपने 78 प्रत्याशी
दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने 78 पार्षद प्रत्याशियों को एक साथ रखा है। भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को जोधपुर रोड स्थित एक रिसोर्ट में रखा गया है।पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों का नेतृत्व कर रहे हैं,जबकि बीकानेर पूर्व क्षेत्र के प्रत्याशी शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के नेतृत्व में हैं।दोनों क्षेत्रों के प्रत्याशियों को एक ही स्थान पर रखा गया है।भाजपा में मेयर पद के लिए नाम तय करने का फैसला संगठन स्तर पर होने की बात कही जा रही है। पार्टी जिस प्रत्याशी के नाम पर फैसला करेगी, भाजपा के सभी पार्षद प्रत्याशियों को उसी के पक्ष में मतदान करना होगा।

नतीजों से पहले मेयर की तैयारी
नगर निगम बोर्ड में बहुमत के साथ मेयर बनाने के लिए दोनों दल अभी से अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने में जुट गए हैं।चुनाव परिणाम आने के बाद मेयर पद के लिए होने वाली वोटिंग में एक-एक पार्षद का वोट महत्वपूर्ण होगा।ऐसे में नतीजों से पहले ही दोनों दलों की ओर से प्रत्याशियों को साथ रखना और पार्टी लाइन के अनुसार मतदान की तैयारी कराना सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोबाइल से लेकर लोकेशन… हर कदम पर नजर
चुनाव परिणाम से पहले प्रत्याशियों की आवाजाही और आपसी संपर्क को लेकर दोनों प्रमुख दल बेहद सतर्क बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो प्रत्याशियों को समूह में रखा गया है और उनके ठहरने के स्थान को गोपनीय रखा जा रहा है। मोबाइल फोन के इस्तेमाल और बाहरी लोगों से स ंपर्क को लेकर भी निगरानी की चर्चा है। दरअसल,इस बार कई वार्डों में निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।ऐसे में यदि किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अचानक बढ़ सकती है। यही संभावना राजनीतिक दलों की चि ंता बढ़ा रही है।परिणाम आने के बाद महापौर पद के लिए बहुमत जुटाने की कवायद में एक-एक पार्षद महत्वपूर्ण हो सकता है।मतदान के बाद शुरू हुई इस कवायद को परिणाम से पहले संभावित राजनीतिक सेंधमारी से बचाव के तौर पर देखा जा रहा है।स्थानीय निकाय चुनावों में अक्सर मतदान और परिणाम के बीच का समय सबसे अधिक राजनीतिक हलचल वाला रहता है। इस दौरान जीत-हार के अनुमान, निर्दलीयों से संपर्क और बहुमत के आंकड़े को लेकर अंदरखाने बातचीत शुरू हो जाती है।मतदान केंद्रों से निकल चुके प्रत्याशी अब मतगणना तक होटल-रिसोर्ट के ‘सियासी किलों में रहेंगे या कब बाहर आएंगे,इसे लेकर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन इतना तय है कि ईवीएम में फैसला बंद होने के बावजूद सत्ता की असली बाजी अभी बाकी है।