तहलका न्यूज,बीकानेर।एक ओर तो केन्द्र सरकार अपने शासनकाल के 12 वर्षों का जश्न मना रही है और देश के अलग अलग हिस्सों में अनेक आयोजन किये जा रहे है।वहीं दूसरी ओर लगातार बढ़ रही मंहगाई की मार ने आमजन की कमर तोड़ दी है।जिसके चलते हर वस्तुओं की कीमतों में उछाल से आमजन प्रभावित हो रहा है।ऐसे में ईंटों के दामों में असामान्य एवं अत्यधिक वृद्धि ने आमजन के जीवन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है।विगत लगभग 15-20 दिनों के भीतर ईंटों के मूल्य में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि होना न केवल बाजार की स्वाभाविक स्थिति के विपरीत है,बल्कि यह स्पष्ट रूप से कृत्रिम कमी उत्पन्न कर मुनाफाखोरी की ओर संकेत करता है। बताया जा रहा है कि जो ईंटें हाल ही तक भट्टे पर लगभग चार हजार रुपये प्रति हजार के आसपास उपलब्ध थीं,वही आज पांच हजार पांच सौ रुपये या उससे अधिक में बेची जा रही हैं,जिससे आम नागरिक के लिए अपने घर का निर्माण करना अत्यंत कठिन हो गया है।लोगों का मानना है कि यह स्थिति केवल आर्थिक समस्या नहीं,बल्कि सामाजिक असमानता को भी बढ़ावा देने वाली है,क्योंकि मध्यम एवं निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए मकान बनाना जीवन का एकमात्र बड़ा सपना होता है। ऐसे में इस प्रकार की अनियंत्रित मूल्यवृद्धि उनके इस सपने को समाप्त करने की ओर अग्रसर है।विशेष रूप से यह भी परिलक्षित हो रहा है कि 30 जून तक ईंट-भट्टों को बंद रखने के आदेश के कारण बाजार में आपूर्ति बाधित हुई है,जिसका लाभ उठाकर कुछ भट्टा संचालक मनमाने तरीके से कीमतें बढ़ा रहे हैं और आम उपभोक्ता का शोषण कर रहे हैं।साथ ही,अनेक स्थानों पर यह भी देखा जा रहा है कि ईंटों की बिक्री बिना विधिवत बिल के की जा रही है,नकद लेनदेन को प्राथमिकता दी जा रही है तथा वस्तु एवं सेवा कर और आयकर के नियमों का संभावित उल्लंघन हो रहा है।इस प्रकार की प्रवृत्तियां न केवल सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाती हैं,बल्कि बाजार व्यवस्था को भी असंतुलित करती हैं और ईमानदार व्यापारियों के लिए भी अनुचित प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करती हैं।

विगत वर्ष जारी हुआ था आदेश
गत वर्ष राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने भट्टा संचालन को लेकर नया आदेश जारी किया था।इसमें प्रदूषण का हवाला देते हुए बताया गया था कि राज्य में ईंट-भट्टों का संचालन अब वर्ष में सिर्फ छह माह तक हो सकेगा। इसके तहत भट्टों के संचालन की अवधि अब एक जनवरी से तीस जून तक की गई है।इसके बाद इनको बंद करने का आदेश जारी किया गया है। इससे पहले इनका संचालन नौ महीने तक होता था।नए नियमों के तहत भट्टा संचालकों को जिग-जैग तकनीक को अपनाना होगा। यह ऐसी विधि है जिसमें हवा के प्रवाह को टेढ़ी-मेढ़ी दिशा में ले जाने के लिए ईंटों को एक खास तरीके से लगाया जाता है। अलग डिजाइन की चिमनी भी तैयार की जाती है।साथ ही ईंट पकाने को लेकर अलग- अलग स्ट्रक्चर भी बनाए जाते हैं। इससे भट्टों के संचालन में प्रदूषण का स्तर घटता है।साथ ही इस तकनीक को अपनाने पर ईंट की गुणवत्ता में सुधार आने की संभावना है।बता दें कि राजस्थान में चलने वाले ईंट भट्टे 30 जून बाद बंद हो जाएंगे।छह माह तक यहां वीरानी छाई रहेगी।इसके बाद जो भी ईंट-भट्टा चलता मिलेगा,उसके खिलाफ राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल तय मापदंड के अनुसार जुर्माना लगाएगा। प्रदेश में करीब 5 हजार तथा भीलवाड़ा जिले में 250 से अधिक ईंट भट्टे संचालित हैं।ये ईंट-भट्टे अब एक जुलाई से 31 दिसंबर तक बंद रहेंगे। इनका संचालन एक जनवरी से ही हो सकेगा।आरपीसीबी का पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह बड़ा कदम है।पहले ईंट भट्टों का संचालन नौ माह होता था। प्रदेश में पांच हजार से अधिक ईंट भट्टे हैं। इन भट्टों में उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश तथा बिहार समेत अन्य राज्यों से हजारों श्रमिक काम करने आते है।नए नियम से श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा।

एनजीटी की करनी होगी पालना
एनजीटी ने 24 जनवरी 2024 को बड़े समूहों में चल रहे ईंट भट्टों को नियंत्रित करने का आदेश दिया था।इसके बाद ईंट भट्टा संघों ने खुद प्रदूषण नियंत्रण के लिए फायरिंग अवधि सीमित करने का प्रस्ताव रखा। 22 जनवरी 2025 को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आदेश जारी कर 30 जून के बाद भट्टे नहीं चलाने के आदेश दिए।इसके तहत पूरे प्रदेश में नियम लागू होगा।यानी 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक भट्टों की फायरिंग पूरी तरह बंद रहेगी।

श्रमिकों पर संकट
जिले के ईंट भट्टों में हजारों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। इनमें से अधिकतर प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर होते हैं,जो पूरे साल ईंट भट्टों पर निर्भर रहते हैं। अब संचालन अवधि कम करने से इन मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। बारिश के दौरान मजदूर अपने घर लौटते जो दीपावली के बाद ही वापस आते है। लेकिन अब यह समय घटकर मात्र छह माह रह जाएगा।

क्या कहते है जानकार
अधिवक्ता हनुमान प्रसाद शर्मा का कहना है कि यह परिस्थिति स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि वर्तमान व्यवस्था में प्रभावी निगरानी एवं नियंत्रण का अभाव है। यदि समय रहते इस पर ठोस एवं कठोर कार्रवाई नहीं की गई,तो यह समस्या और अधिक विकराल रूप धारण कर सकती है तथा आमजन के लिए आवास निर्माण एक असंभव कार्य बन जाएगा।इसको लेकर सीएम तत्काल संज्ञान लेते हुए आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जाए। ईंटों के दामों को नियंत्रित करने हेतु प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए,भट्टों की बंदी के आदेश पर व्यावहारिक पुनर्विचार किया जाए ताकि आपूर्ति संतुलित बनी रहे,तथा उन सभी भट्टा संचालकों एवं विक्रेताओं के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए जो कालाबाज़ारी या कर चोरी में संलिप्त पाए जाएँ। साथ ही, संबंधित विभागों द्वारा व्यापक स्तर पर निरीक्षण एवं जाँच अभियान चलाकर बाजार में पारदर्शिता एवं अनुशासन स्थापित किया जाए।