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जयनारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।शहर को 21 सितम्बर को नया महापौर मिल जाएगा।सोमवार को होने वाले चुनाव के जब शाम को परिणाम सामने आ एगा तो यह तय होगा कि आखिर नगर निगम की महापौर कुर्सी पर कौन बैठेगा।लेकिन इतना तय है कि इस बार भी महापौर की कुर्सी पहली बार पार्षद बनकर जीतने वाले को ही मिलेगी। पिछले दो चुनावों से यह परम्परा चल रही है और यह तीसरा मौका होगा जब महापौर की कुर्सी एक बार फिर वहीं संभालेगा।जो पहली बार पार्षद बना।ऐसा लगता है कि यह एक प्रकार की परम्परा बनती जा रही है। बात करें 2014 के निकाय चुनाव की तो उस समय नारायण चोपड़ा पहली बार पार्षद का चुनाव लड़े और उन्हें भाजपा ने महापौर का उम्मीदवार बनाया। वे पहली बार पार्षदों के वोट से जीत हासिल कर महापौर बने।इसी तरह 2019 के चुनाव में सुशीला कंवर राजपुरोहित भी पहली बार पार्षद का चुनाव जीतकर महापौर बनी।अब इस बार भी कुछ ऐसा ही होने जा रहा है।जब लगातार तीसरी बार महापौर का पद वहीं पार्षद संभालेगा। जो पहली बार जीतक र निगम पहुंचा है।यानि अनिल कल्ला,डॉ सुरेन्द्र सिंह शेखावत और नवरतन डागा। इन तीनों ने पार्षदी का पहली बार ही चुनाव लड़ा है।दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने फिर से महापौर के रूप में अपनी पहली पसंद पहली बार जीतकर आएं पार्षद की रखी।अब इतना तो तय है कि महापौर कोई भी बने।बनेगा वहीं जो पहली बार पार्षद बना है।
2014 में शुरू हुई यह परम्परा
वैसे तो 2008 में बीकानेर को नगर निगम का दर्जा मिल गया था।उस समय तत्कालीन सभापति मकसूद अहमद को बतौर महापौर प्रमोट किया गया।उसके बाद जब 2009 में पहली बार निगम के चुनाव हुए तो कांग्रेस सरकार ने सीधे महापौर का चुनाव करवाया।इस चुनाव में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भवानी शंकर शर्मा ने गोपाल गहलोत को चुनाव में मात देकर निर्वाचित महापौर बने।2014 में भाजपा सरकार ने महापौर के सीधे चुनाव प्रक्रिया में बदलाव करते हुए पार्षदों के द्वारा ही महापौर चुनने का नियम बना दिया। जिसमें नारायण चौपड़ा को पहली बार चुनाव लड़वाया और वे चुनाव जीत महापौर के पद पर आसीन हुए।इसी प्रकार 2019 में सुशीला कंवर राजपुरोहित भी पहली बार वार्ड 14 से पार्षद का चुनाव जीत पहली महिला महापौर बनी। कुल मिलाकर बीकानेर नगर निगम में यह परम्परा इस बार भी निभती दिख रही है।
जोड़-तोड़ भाजपा की आस,कांग्रेस को पूरा विश्वास
इस बार के निगम चुनाव में जहां कांग्रेस को 12 साल के बनवास के बाद निगम में पूर्ण बहुमत मिला है।वहीं भाजपा बहुमत से करीब 14 सीटें पीछे रह गई है।ऐसे में बिना बहुमत के भाजपा ने महापौर चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारकर चुनाव जीतने की रणनीति पर मंथन शुरू किया है।ऐसे में भाजपा जोड़ तोड़ की राजनीति पर आस लगाएं बैठी। भाजपा रणनीतिककारों का मानना है कि वे निर्दलीयों व कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग करवाकर अपना बोर्ड बनाने में कामयाब हो जाएंगे।जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस को इस बात का पूरा विश्वास है कि भाजपा अपने इस मिशन में कामयाब नहीं हो पाएगी।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्रॉस वोटिंग की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।अगर ऐसा होता है तो फिर ये दोनों ही दलों में देखने को मिल सकता है।वैसे सूत्र यह भी बता रहे है कि कांग्रेस व भाजपा के बीच सीधा मुकाबला ही होगा।निर्दलीय उम्मीदवार कही न कही कांग्रेस के पक्ष में अपना पर्चा उठा सकते है।यदि निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में रह जाते है तो मुकाबला रोचक होगा।ऐसे में जिसको ज्यादा वोट मिलेंगे।महापौर का ताज उसके सिर सजेगा।
अंतरात्मा की आवाज पर सियासी संग्राम
उधर भाजपा महापौर प्रत्याशी के अंतरात्मा से वोट की अपील पर सियासी संग्राम शुरू हो गया है।कांग्रेस ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि बीकानेर की जनता ने अंतरात्मा की आवाज सुनकर ही वोट किया और कांग्रेस को पूर्ण बहुमत दिया है।ऐसे में भाजपा जनता के इस जनादेश का अपमान कर रही है।पार्षद मनोज विश्नोई व पार्षद प्रतिनिधि सुभाष स्वामी ने सोशल मीडिया पर विडियो जारी कर कहा है कि सिद्धान्तों की बात करने वाले भाजपा के महापौर प्रत्याशी अब अंतरात्मा को जागृत कर वोट की अपील कर रहे है।वे पहले कहां चले गये थे।जब दस साल बीजेपी का बोर्ड था और जनता समस्याओं के निस्तारण के लिये त्राही त्राही कर रही थी।निगम में जिस प्रकार का भ्रष्टाचार था।उस समय उनकी जुबान क्यों नहीं निकली।आज अंतरात्मा की अपील कर क्या सिद्ध करना चाहते है।जनता ने अपनी अंतरात्मा से कांग्रेस पर विश्वास जताया है।इसलिए वे जनता के जनादेश का मान सम्मान करें।