तहलका न्यूज,बीकानेर। अपने आप को अनुशासित पार्टी कहने वाली भारतीय जनता पार्टी कितनी अनुशासित है। इसकी बानगी पिछले दो दिनों से देखने को मिल रही है। जब देश के गृहमंत्री अमित शाह,मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व पार्टी के प्रदेश मुखिया मदन राठौड़ सहित दो केन्द्रीय मंत्रियों सहित प्रभारी मंत्री के तय आयोजनों से पार्टी की रीढ़ कहे जाने वाले मंडल अध्यक्षों की दूरी रही। पिछले दो दिनों से एक भी आयोजन में भाजपा का एक भी मंडल अध्यक्ष का न दिखना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पता चला है कि इस प्रकार की चर्चा ने विपक्ष को बैठे बिठाएं मुद्दा दे दिया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा के मंडल अध्यक्ष अपने ही पार्टी के एक पदाधिकारी की बेहुदा हरकत से नाराज है। जिसके विरोध स्वरूप उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के महत्वपूर्ण दौरे से अपनी दूरी बना ली। हालांकि हो सकता है पार्टी इसे अनुशासनहीनता माने। पर इसके पीछे की वजह संगठन में महत्वपूर्ण पद पर बैठा पदाधिकारी है। जिसकी वजह से ऐसे हालात बने। सूत्र बताते है कि दो दिन पहले मुक्ता प्रसाद मंडल अध्यक्ष को पार्टी के एक पदाधिकारी ने गालियां निकाल दी। मीडिया प्रकोष्ठ से जुड़े इस पदाधिकारी ने इस गलती की माफी मांगने की बजाय मंडल अध्यक्ष को ओर भला बुरा कह डाला। जिसके बाद यह रार बढ़ती चली गई और सभी मंडल अध्यक्षों ने इसे अपनी प्रतिष्ठा पर कुठाराघात मानते हुए पार्टी के सभी कार्यक्रमों में नहीं जाने का फैसला किया।
ये होती है मंडल अध्यक्ष की भूमिका
अगर पार्टी के संविधान की माने तो भारतीय जनता पार्टी में ‘मंडल अध्यक्ष’ की भूमिका संगठन की रीढ़ के समान होती है। वे अपने निर्धारित भौगोलिक क्षेत्र (मंडल) में पार्टी और जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच सीधा सेतू होते हैं। उनका मुख्य कार्य पार्टी की विचारधारा का प्रसार करना और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करना है।शीर्ष नेतृत्व (जिला और प्रदेश) की नीतियों,योजनाओं और निर्देशों को निचले स्तर (कार्यकर्ता ओं और जनता) तक पहुंचाना।पार्टी द्वारा आहूत रैलियों,अभियानों,धरनों या जनसंपर्क कार्यक्रमों (जैसे डोर-टू-डोर कैंपेन) का अपने क्षेत्र में सफ ल नेतृत्व करना।चुनाव के दौरान चुनावी क्षेत्रों में रैलियों, जनसंपर्क और मतदान (वोटिंग) प्रक्रिया की सूक्ष्म स्तर पर निगरानी और प्रबंधन क रना। इतना अहम काम होने के बाद भी सोशल मीडिया के प्रकोष्ठ के एक पदाधिकारी द्वारा मंडल अध्यक्ष को गाली गलौच कर बेइज्जत करना पार्टी के अनुशासन को दर्शाता है। मजे की बात तो यह है कि पिछले 24 घंटे में न तो प्रदेशाध्यक्ष ने इस बात की सुध ली और न ही जिलाध्यक्ष ने। ऐसे में मंडल अध्यक्ष अपने आप को असहाय समझने लगे है। वे दंबी जुबां में अपने ही संगठन को कोसते नजर आएं।
क्या कमजोर जिलाध्यक्ष के कारण बनी ऐसी स्थिति
राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा जोर शोर से होने लगी है कि भाजपा जिलाध्यक्ष एक महिला होने के कारण इस स्थिति को संभाल नहीं पाई। इतना ही नहीं चर्चा यह भी हो चली है कि उनका अपने पदाधिकारियों पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं है। जिसके चलते अपनी अपनी ढफली अपना अपना राग वाली स्थिति बनी हुई है। उनके ईदगिर्द घूमने वाले चंद पदाधिकारियों के कारण मंडल अध्यक्षों व अन्य पदाधिकारियों की उपेक्षा अनेक बार हो चुकी है। फिर भी वे जहर का घूंट पीकर रह जाते है।
अब होगी कोई कार्रवाई
भाजपा के मीडिया प्रकोष्ठ के पदाधिकारी की ओर से मंडल अध्यक्ष के साथ गाली गलौच की इस घटना पर हालांकि भाजपाईयों ने तो चुप्पी साध रखी है। पर बीकानेर में पिछले दो दिनों से बैठे प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ इस पर कोई कार्रवाई करेंगे या उन्हें इस बात की भनक तक नहीं लगने दी गई है। उनको जिस तरह जिलाध्यक्ष मंडली ने घेर रखा है। शायद प्रदेशाध्यक्ष इस बात से अनभिज्ञ भी हो सकते है। फिलहाल अनुशासन वाली पार्टी के मुखिया क्या अब किसी कार्रवाई की स्थिति में होंगे या नहीं। ये देखने वाली बात होगी।
