जय नाराययण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।विरासत की राजनीति हमेशा से चर्चा का विषय रही है।कई बार परिवार के नाम पर इसकी आलोचना की जाती रही है।वहीं एक तर्क यह भी है कि जो लोग राजनीति में हैं,अगर उनके बच्चे राजनीति में आकर काबिलियत दिखाना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है? ऐसे ही कुछ युवा उम्मीदवार अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव मैदान में उतरे है।इनमें से कई उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की तो कई को हार का सामना करना पड़ा। इतना ही नहीं कुछ प्रत्याशी तो ऐसे है,जिनके सामने अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने की चुनौती भी है। अगर वे राजनीतिक सफर की पहली सीढ़ी भी पार करने में सफल नहीं हो पाएं तो उनके राजनीतिक सफर पर ब्रेक लग सकता है।हम बात कर रहे है निकाय चुनाव में विभिन्न वार्डों से चुनाव लड़ रहे ऐसे प्रत्याशियों की जिनकी जीत और हार उनके राजनीतिक भविष्य को तय करेगी। इनमें कई नेता ऐसे है,जो संगठनात्मक स्तर पर काम कर प्रदेश स्तर पर अपनी छवि बना चुके है और विधानसभा का टिकट मांगते मांगते पार्षद के चुनाव में उतरे है।लेकिन उनको इस चुनाव में भी अपनों से चुनौती ज्यादा मिल रही है।
राजनीति की पीढ़ी को आगे बढ़ाने की मशक्कत
शहर के 80 वार्डों के चुनावों में सबसे ज्यादा हॉट सीट व चर्चा का केन्द्र वार्ड 73 बना है।जहां पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला कांग्रेस के प्रत्याशी है तो दूसरी तरफ भाजपा के उपाध्यक्ष दीपक पारीक मैदान में है।पारीक के पिता स्व लक्ष्मीनारायण पारीक लूणकरणसर से इनलो के उम्मीदवार रहे थे। ऐसे में इन दोनों ही युवा नेताओं के पास राजनीति की पीढ़ी को आगे वढ़ाने के लिये मशक्कत करनी पड़ रही है। इन दोनों ही प्रत्याशियों को छात्र संघ जीवन से अपनी राजनीति की शुरूआत करने वाले रामपुरिया कॉलेज के पूर्व अध्यक्ष व पूर्व पार्षद दिनेश उपाध्याय व एनएसयूआई से नेतागिरी में प्रवेश कर संगठन में अनेक पदों पर रहने वाले आनंद जोशी से कड़ी चुनौती झेलनी पड़ रही है। ऐसे में अब दोनों प्रमुख पार्टियों के प्रत्याशियों के लिये इस चुनाव को जीतने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
निर्दलियों के चक्रव्यूह में फंसे भाजपा-कांग्रेस के युवा नेता
मजे की बात तो यह है कि विधानसभा चुनावों में अपनी दावेदारी करने वाले अनेक युवा नेता निर्दलियों के चक्रव्यूह में इस तरह फंस गये है कि उनकी नैया पार लगने पर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है।इनमें भाजपा के पैनल प्रवक्ता सुरेन्द्र सिंह शेखावत,पूर्व पदाधिकारी डॉ भगवान सिंह मेडतिया,संजय आचार्य,भूपेन्द्र शर्मा,अशोक प्रजापत,किशोर आचार्य,नवरतन डागा,दिलीप बांठिया,राकेश विश्नोई,पूर्व मंत्री महबूब अली की पोत्री अजमा नाज,पूर्व विधायक नंदलाल व्यास के दत्तक पुत्र प्रकाश व्यास प्रमुख है।जो अलग अलग वार्डों से प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार है।इन सभी नेताओं को अपनों से जीतना खतरा है,उतना ही खतरा निर्दलियों से है।इनकी जीत हार इनका राजनीतिक भविष्य तय करेगी।अगर ये जीतते है तो ये पार्टी की दूसरी पीढ़ी के रूप में आगे काम करेंगे और अगर ऐसा नहीं होता तो इनके भविष्य पर सवालिया निशान भी लग सकता है।फिलहाल 9 तारीख को इस बात का फैसला जनता करेगी कि आखिर कौनसा युवा नेता बीकानेर के राजनीतिक भविष्य को जयपुर या दिल्ली के गलियारों तक लेकर जाएगा।
