तहलका न्यूज,बीकानेर। जिले में चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध के बावजूद धड़ल्ले से इसके उपयोग ने जिला प्रशासन की सतर्कता की पोल खोल दी है। जिसके चलते एक मासूम के जिन्दगी की डोर कट गई। आठ साल के नौनिहाल की दर्दनाक मौत से पूरा क्षेत्र सदमें मेें है। जानकारी मिली है कि उदासर गांव निवासी विराट (8) पुत्र किशनलाल अपने माता-पिता और बहन के साथ शादी के लिए शॉपिंग के लिये बाइक पर बीकानेर जा रहा था। देशनोक थाना क्षेत्र में ओवरब्रिज से नीचे उतरते समय चाइनीज मांझे से एक 8 साल के मासूम की गर्दन की कट गई। घाव इतना गहरा था कि सांस लेने की नस तक कट चुकी थी। परिजन लहूलुहान हालत में बच्ची को हॉस्पिटल लेकर पहुंचे,लेकिन तब तक मासूम की मौत हो चुकी थी।मृतक का परिवार देशनोक क्षेत्र में रहकर ईंट भ_े पर मजदूरी करता है।

10 अप्रेल को ही जिला कलक्टर ने दिए थे निर्देश
जिला कलक्टर निशांत जैन ने एक आदेश निकालकर इसकी बिक्री पर पाबंदी लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि कोई भी दुकानदार या व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया,तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 223 के तहत कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस और प्रशासन की विशेष टीमें बाजारों और गोदामों में औचक निरीक्षण करेंगी। जिला कलेक्टर ने बीकानेर के जागरूक नागरिकों और अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को सुरक्षित पतंगबाजी के लिए प्रेरित करें और केवल पारंपरिक सूती धागे का ही उपयोग सुनिश्चित करें,ताकि त्योहार की खुशियाँ किसी हादसे में न बदलें।

हकीकत इससे परे
प्रशासन ने प्रतिबंध तो लगा दिया,लेकिन धरातल पर उसकी क्रियान्विति नजर नहीं आ रही। बाजार में धड़ल्ले से बिक रहा चाइनीज मांझा जानलेवा साबित हो रहा है और लोगों को लहूलुहान कर रहा है। आए दिन होने वाले इस प्रकार की घटनाओं के बावजूद प्रशासन चाइनीज मांझे की बिक्री पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। अब सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। चाइनीज मांझा बेचते हुए पकड़े जाने पर दुकानों को तत्काल सीज किया जाए। साथ ही यदि कोई व्यक्ति इसकी बिक्री की सूचना देता है और वह सही पाई जाती है तो उसे इनाम देकर प्रोत्साहित किया जाए तो आमजन को भी इसके खिलाफ जागरूक और सक्रिय करेंगे।

हर साल औसत 200 लोग घायल

ये सब तब हो रहा जब बीकानेर में पांच सालों में चाइनीज मांझों से घायल और मरने वालों की संख्या दिनों दिन बढ़ रही है। पांच सालों में अकेले पीबीएम अस्पताल में चाइनीज मांझे से घायल होकर 900 से 1000 लोग पहुंचे हैं। 2024 में एक ही दिन में करीब 250 लोग मांझे से घायल हुए थे। हर साल औसत 200 लोग घायल होते हैं। 3 लोगों की तो मौत तक हो गई। सबसे ज्यादा चोट नाजुक गर्दन पर लगती है जिससे घायलों की जान पर बन आती है। चेहरे और हाथों में भी कट लगते हैं। इसीलिए प्रशासन ने रोक लगाई थी मगर प्रशासन सिर्फ रोक लगाकर इतिश्री कर लेता है। क्योंकि अब अखातीज आने वाली है इसलिए पतंगबाज ऐसे मांझे को खरीदने में लग गए। संबंधित क्षेत्र के पुलिस थानों को बेचने वालों की पूरी खबर होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से नहीं होती है। नतीजन न केवल बेजुबान बल्कि राहगीर भी मौत के शिकार हो रहे है।

एक युवक हुआ घायल
चाइनीज मांझे के चलते एक युवक भी गंभीर रूप से घायल हुआ है। पता चला है कि लालाणी व्यासों के चौक निवासी हितेश व्यास मुरलीधर व्यास कॉलोनी से अपने घर की ओर जा रहा था कि भाटों के बास से पहले चांइनीज मांझे की चपेट में आ गया। जिससे उसकी गर्दन कट गई और खून बहने लगा। इस दौरान वह बाइक से नीचे भी गिर गया। तत्काल उसे अस्पताल ले जाया गया।