तहलका न्यूज,बीकानेर।चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में प्रशासनिक मनमानी और कागज़ी बाजीगरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है,जिसने पूरे सरकारी तंत्र की ईमानदारी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रयोगशाला सहायक भर्ती-2018 से जुड़े किशन गोपाल छंगाणी का यह प्रकरण अब महज एक विभागीय लापरवाही नहीं रहा,बल्कि राजस्थान सरकार के सम्पर्क पोर्टल के माध्यम से सीधा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के द्वार पर पहुंच चुका है।पीडि़त ने संभागीय आयुक्त को ई-मेल के जरिए सारे पुख्ता और प्रमाणित दस्तावेज भेजकर इस पूरे घालमेल की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच करवाने और दोषी अधिकारियों पर तुरंत अनुशासनात्मक व कानूनी कार्यवाही की पुरजोर मांग की है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो तलाशेगी सच!
​इस पूरे मामले में सबसे बड़ा और तीखा सवाल सरकारी आंकड़ों की रहस्यमयी ‘गणित’ पर खड़ा होता है।जो अनुभव प्रमाण-पत्र समय के साथ बढऩा चाहिए था,वह विभाग की पत्रावलियों में घटकर आधा कैसे हो गया?​दिनांक 28/06/2018 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा किशन गोपाल छंगाणी को अनुभव प्रमाण-पत्र जारी किया गया,जिसे संयुक्त निदेशक ने 29/06/2018 को बाकायदा सत्यापित किया।इसमें उनका कुल अनुभव 04 वर्ष 10 माह 22 दिन प्रमाणित था और लिखा गया था कि देय पारिश्रमिक बिलों से इसका मिलान सही पाया गया है।वर्ष 2026 का ‘यू-टर्न’: सूचना के अधिकार (आरटीआई) की प्रथम अपील संख्या: 392050088756709 के निर्णय के बाद जब 1 6/06/2026 को सूचना दी गई,तो उसके साथ संलग्न पांचू के पत्र 9 जून में यह अनुभव घटकर महज 01 वर्ष 10 माह 27 दिवस (01 अप्रैल 2014 से 28 फरवरी 2016 तक) रह गया! आखिर बीकानेर चिकित्सा विभाग के किस अधिकारी ने 4 साल से अधिक के प्रमाणित अनुभव को 1 साल 10 महीने में बदल दिया? क्या यह सीधे तौर पर अभिलेखों में हेराफेरी और कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार करने का संगीन मामला नहीं है,जिसकी जांच अब भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को गहराई से करनी होगी?

​प्रशासनिक विसंगतियां जो भ्रष्टाचार की ओर इशारा
पूर्व में समाचार पत्रों में यह बात उजागर हो चुकी है कि छंगाणी के नियुक्ति पत्र में न तो कोई प्रेषण संख्या है और न ही संदर्भ संख्या। विभाग जवाब दे कि बिना इन बुनियादी कडिय़ों के सरकारी तंत्र में नियुक्तियां कैसे और किसके संरक्षण में की जा रही थीं?अनुबंध खत्म,तो सेवाएं अनवरत क्यों ली गईं? संयुक्त निदेशक ने 05/06/2025 को राज्य नोडल अधिकारी (मुख्यमंत्री नि:शुल्क जाँच योजना, जयपुर) को पत्र लिखकर माना कि अनुबंध केवल ‘एक बार’ ही दिया गया था। वहीं,सहायक निदेशक लोक सेवाएं (प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग,बीकानेर) ने 25/04/2025 को सीएमएचओ बीकानेर से कड़ा सवाल पूछा है कि “अनुबंध की अवधि व्यतीत हो जाने के उपरांत भी किस आधार पर छंगाणी की सेवाएं अनवरत रूप से ली गईं?”

​स्थायी कर्मचारी के दस्तावेज ‘गायब’ करने का संगीन आरोप
पीडि़त छंगाणी का साफ कहना है कि वह बिना किसी समझौते और बिना किसी सेवा-भंग के राजस्थान सरकार के स्थायी कर्मचारी के रूप में सेवाएं दे रहे थे।लेकिन विभाग के रसूखदार अधिकारियों ने उनके ‘स्थायी कर्मचारी’ होने से जुड़े अहम दस्तावेजों को कथित तौर पर गायब क र दिया,ताकि उन्हें जबरन संविदाकर्मी साबित किया जा सके।

​भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और संभागीय आयुक्त की रडार पर विभाग के जि़म्मेदार
​मामला सम्पर्क पोर्टल के जरिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में दर्ज होने के बाद से ही बीकानेर चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ-पा ंव फूलने लगे हैं।सरकारी अभिलेख कक्ष से अहम पत्रावलियों का गायब होना और एक ही कर्मचारी के दो अलग-अलग अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करना सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।​अब स्थानीय समाचार पोर्टलों और समाचार चैनलों के माध्यम से पीडि़त ने संभागीय आयुक्त बीकानेर से न्याय की गुहार लगाई है। देखना यह है कि सम्पर्क पोर्टल,भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और संभागीय आयुक्त की त्रिकोणीय रडार पर आने के बाद बीकानेर का यह बड़ा महकमा अपने गुनाहों को कब तक छुपा पाता है? क्या पीडि़त छंगाणी को न्याय मिलेगा या पत्रावलियां दबाने का खेल बदस्तूर जारी रहेगा?