तहलका न्यूज,बीकानेर।नगर निकाय चुनाव के वार्ड आरक्षण की लॉटरी का पर्चा जैसा ही आज खुला।कई दावेदारों का सपना भी धुल सा गया। नगर निकाय चुनाव की आरक्षण लॉटरी ने कई दावेदारों के चुनावी अरमानों पर पानी फेर दिया। जिस वार्ड को लेकर महीनों से तैयारियां चल रही थीं,लॉटरी में उसका वर्ग बदलते ही पूरा गणित बिगड़ गया।कहीं दावेदारों की उम्मीदों पर ब्रेक लगा तो कहीं नए चेहरों के लिए सियासी दरवाजे खुल गए।अब बदले आरक्षण के बीच टिकट की दौड़ और चुनावी समीकरण दोनों दिलचस्प हो गए हैं।अब ऐसे दावेदारों को या तो अपना वार्ड बदलना पड़ेगा या फिर चुनाव से दूरी बनाने को मजबूर होना पड़ेगा।निकाय चुनाव की घोषणा और अनारक्षित महापौर की लॉटरी निकलने के बाद शहर में चर्चा जोर शोर से होने लगी कि इस दफा चुनावी समर जोरदार होगा। ऐसे में कांग्रेस और भाजपा से महापौर बनने की उम्मीद लगाएं बैठे लोगों ने अंदरखाने में तैयारियां भी शुरू कर दी थी। सोशल मीडिया पर भी भाजपा की ओर से महावीर रांका,मोहन सुराणा,नारायण चौपड़ा,अखिलेश प्रताप सिंह,विजय आचार्य सरीखे नामों की चर्चा होने लगी तो कांग्रेस की ओर से मकसूद अहमद,दिलीप बांठिया,वल्लभ कोचर,कमल कल्ला,हजारी देवड़ा जैसों के नाम पर मंथन के दौर चले। इतना ही नहीं कई दावेदारों ने तो अपना टिकट मानो फाइनल समझ कर वार्डों में जनसंपर्क और विकास कार्य करवाने भी शुरू कर दिए।लेकिन सोमवार को जैसे ही वार्ड की आरक्षण की लॉटरी खुली।वैसे ही कई दावेदारों की किस्मत की चॉबी मानो अनलॉक हो गई। यहीं नहीं दावेदारों के चेहरों की हवाएं उड़ गई। लॉटरी की पर्चियों के साथ ही सोशल मीडिया पर अब नये दावेदारों ने अपने को प्रत्याशी मानकर पोस्टर संग्राम शुरू कर दिया।
महापौर तो गयो………..
जिला कलक्टर सभागार में उस समय लोग भौचक्के रह गये जब एक वार्ड से महापौर के प्रबल दावेदार की आरक्षण लॉटरी में वार्ड ओबीसी का हो गया।इस पर एक विधायक ने तपाक से हंसकर कहा महापौर तो गयो…….! उनकी इस बात पर भाजपा जिलाध्यक्ष ने भी ठहाके लगाते हुए विधायक की बात का समर्थन सा किया।वहां चर्चा वार्ड 28 की थी।जिसकी लॉटरी भी दो बार खुली।ओबीसी की लॉटरी के दौरान 16 वार्डों की जगह 17 पर्चियां खुलने पर 28 नंबर वार्ड की पर्ची पहले ओबीसी वर्ग से खुल गई तो सभी ने मानो राहत की सांस ली।इस पर प्रशासन को गलती का अहसास होने पर दुबारा पर्ची खोली गई तो दुबारा यह वार्ड ओबीसी महिला के खाते चला गया। इस पर विधायक के मुंह से निकल पड़ा महापौर तो गयो……! हालांकि वहां बैठे लोग इसके मायने क्या निकालते लेकिन भाजपा जिलाध्यक्ष इस बात को समझ गई कि विधायक का इशारा आखिर किस ओर है।
पर्ची प्रक्रिया पर सवालिया निशान
कुछ युवा नेताओं ने पर्ची प्रक्रिया पर सवालिया निशान उठाया है। उनका मानना है कि पर्ची निकालने में पारदर्शिता नहीं रही। ओबीसी की जब 16 पर्चियां निकल गई तो प्रशासन के अधिकारियों को 17 वीं पर्ची के वार्ड का नाम ओपन नहीं करना चाहिए था। ऐसे में नाम ओपन कर दुबारा यह पूछना की आप कहें तो इस प्रक्रिया को पुन: कर लिया जाएं। यह भी गलत है। निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुसार उसे पुन:ही करना चाहिए था। इसमें यहां बैठे जनप्रतिनिधियों को पूछने की जरूरत ही नहीं थी। इसको लेकर संभवत ये युवा नेता कोर्ट की शरण ले सकते है।
राजनीतिक असर
कई वार्डों में पुराने समीकरण बदल गए हैं;ऐसे वार्डों में अब पारंपरिक मुकाबला बदलकर नए प्रतिद्वंद्वियों के बीच होगा. महिला आरक्षण के प्रवर्तन से कई स्थानों पर महिलाओं के लिए प्रत्यक्ष भागीदारी के रास्ते खुल गए हैं,जिससे स्थानीय नेतृत्व में बदलाव की उम्मीद है।नए आरक्षित वर्गों के लागू होने पर दलों और स्थानीय नेता-समर्थकों की रणनीतियाँ बदलनी पड़ेंगी;कुछ की टक्कर कमजोर होगी तो कुछ के लिए मौके बनेंगे। बताया जा रहा है कि अब 2014 में पार्षद रहे पूर्व पार्षद भी चुनावी मैदान में उतरने की योजना बना रहे है।कुछ ने तो अपने पोस्टर भी सोशल मीडिया पर जारी कर दिए है।
अब क्या होगा
आरक्षण सूची जारी होने के बाद राजनीतिक दल,स्थानीय निजी समर्थक और संभावित प्रत्याशी अगले कुछ सप्ताह में नए समीकरणों के अनुसार उम्मीदवार तय करने और प्रचार-प्रसार की रणनीति पर काम शुरू कर देंगे। निकाय चुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद पूरी तैयारियों और उम्मीदवारों की फाइनल सूची से क्षेत्रीय राजनीति की तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।
