तहलका न्यूज,बीकानेर। प्रयोगशाला सहायक भर्ती–2018 में फर्जीवाड़े,कूटरचित दस्तावेजों और बैकडोर नियुक्तियों का दायरा अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहा,बल्कि इसके तार सीधे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें निदेशालय, राजस्थान,जयपुर के शीर्ष तंत्र से जुड़ते नजर आ रहे हैं।राजस्थान संपर्क पोर्टल (परिवाद सं. ज्965) के अनुस्मारक और राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (एसओजी -एसआईटी) को सौपी गई शिकायत में परिवादी किशन गोपाल छंगाणी (सहायक लैब टेक्नीशियन,सीएचसी पाँचू) ने सनसनीखेज खुलासे करते हुए पूरे महकमे में सक्रिय भर्ती सिंडिकेट/गैंग की पोल खोल दी है।बिना कोर्ट याचिका वालों को सितंबर 2023 में बांटी नियुक्तियांशिकायत और अनुस्मारक में निदेशालय स्तर पर हुए सबसे बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए आरोप लगाया गया है कि निदेशालय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवायें,राजस्थान,जयपुर ने नियमों और विधिक प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर पूरी तरह आंखों पर पट्टी बांधकर काम किया।राजस्थान उच्च न्यायालय (जयपुर एवं जोधपुर खंडपीठ) में जिन अभ्यर्थियों ने कोई याचिका तक दर्ज नहीं करवाई थी,उन्हें भी मिलीभगत के चलते सितंबर 2023 में गुपचुप तरीके से नियमित नियुक्तियां दे दी गईं।पूरे प्रदेश में फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्रों,कूटरचित अनुबंधों और बैकडोर एंट्री कराने वाली एक संगठित ‘भर्ती गैंग’ सक्रिय है,जिसे निदेशालय से लेकर जिला स्तर के जिम्मेदार अधिकारियों का खुला संरक्षण प्राप्त है।
अब संयुक्त निदेशक बनकर दबा रहे फाइलें
एसओजी को दिए गए पुख्ता साक्ष्यों के अनुसार वर्ष 2018 (मई/जून) में जब विवादित अनुभव प्रमाण-पत्र (क्रमांक 5283,दिनांक 28/0 6/2018) जारी हुआ,उस समय वर्तमान संयुक्त निदेशक स्वयं सीएमएचओ बीकानेर के पद पर काबिज थे।उस दौरान जब विभाग के साथ कोई अनुबंध ही नहीं था,तो बिना एग्रीमेंट और बिना सर्विस ब्रेक का अनुभव प्रमाण-पत्र किस आधार पर जारी किया गया और 29/06/2018 को सत्यापन क्रमांक 6381 दे दिया गया?अब वही अधिकारी संयुक्त निदेशक की कुर्सी पर बैठकर अपने ही पुराने कारनामों और दोषी कार्मिकों को बचाने के लिए फाइलों को दबाने और जांच को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
फर्जी सील और गायब हस्ताक्षरों के पुख्ता साक्ष्य एसओजी को सुपुर्द
रिकॉर्ड के पृष्ठ संख्या 08 और 13 पर संलग्न 3-पृष्ठीय अनुबंध में कार्मिक (प्रथम पक्षकार) के हस्ताक्षर ही नहीं हैं।प्रथम पक्षकार के स्थान पर सीएचसी पाँचू के तत्कालीन कनिष्ठ विशेषज्ञ व प्रभारी ने खुद ही हस्ताक्षर कर दिए,जिससे यह अनुबंध कानूनी रूप से शून्य है।फर्जी मुहर व हस्ताक्षर भिन्नता पृष्ठ 05 पर निजी संस्था के नियुक्ति पत्र में डिस्पैच/रेफरेंस नंबर और मुहर नदारद है,जबकि पृष्ठ 06 के प्रमाण-पत्र में हस्ताक्षरों में स्पष्ट भिन्नता है।दोषी जांच दल को संरक्षण: इन स्पष्ट कूटरचित दस्तावेजों के बावजूद सीएमएचओ व संयुक्त निदेशक कार्यालय के दस्तावेज जांच दल और सी एचसी पाँचू के तत्कालीन प्रभारी पर आज तक कोई दंडात्मक कार्यवाही नहीं की गई।
“रिटायरमेंट का फर्जी बहाना बनाकर रफा-दफा करने का प्रशासनिक षड्यंत्र”
संयुक्त निदेशक कार्यालय द्वारा यह दलील देकर फाइल बंद करने का प्रयास किया गया कि ‘तत्कालीन संयुक्त निदेशक डॉ.एच.एस.बरार 31.01.2022 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं,अत: सहयोग संभव नहीं है’,जिसे परिवादी ने प्रशासनिक लीपापोती करार दिया है। परिवादी का कहना है कि किसी अधिकारी के रिटायर होने से सरकारी पत्रावलियां,डिस्पैच रजिस्टर और नोटशीट नष्ट नहीं होते।बिना रिकॉर्ड मिलान के मामले को ‘लोकहित’ की आड़ में रफा-दफा करना खुद एक गंभीर अपराध है।
नामजद एफआईआर की सीधी चेतावनी
परिवादी ने संपर्क पोर्टल और एसओजी को दी गई शिकायत में मांग की है कि निदेशालय जयपुर,सीएमएचओ एवं संयुक्त निदेशक कार्यालय में दस्तावेजों का फर्जी सत्यापन/जांच करने वाले और अपात्रों को नियुक्तियां बांटने वाले सभी अधिकारियों व कार्मिकों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा नियमों के तहत तुरंत कठोर अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्यवाही की जाए।सितंबर 2023 में बिना कोर्ट याचिका के दी गई संदिग्ध नियुक्तियों और कूटरचित अनुबंधों के पूरे नेक्सस की निष्पक्ष उच्चस्तरीय आपराधिक जांच करवाई जाए।
अवैध दबाव या समझाइश पर दर्ज होगी आपराधिक एफआईआर
परिवादी ने सख्त वैधानिक चेतावनी दी है कि यदि प्रकरण को दबाने के लिए चिकित्सा विभाग बीकानेर या निदेशालय के किसी भी अधिकारी/अधीनस्थ द्वारा परिवादी, उसके परिवार या मित्रों पर किसी भी प्रकार का मानसिक/प्रशासनिक दबाव बनाने या ‘समझाइश’ का दुस्साहस कि या गया,तो इसे आपराधिक धमकी मानते हुए संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता के तहत सक्षम थाने में व्यक्तिगत नामजद एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी और पूरे सिंडिकेट को कोर्ट के कटघरे में खड़ा किया जाएगा।इस पूरे प्रकरण की विस्तृत शिकायत मय दस्तावेजी साक्ष्य प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य),महानिदेशक,महानिदेशक,जिला कलक्टर एवं पुलिस अधीक्षक बीकानेर को आवश्यक कानूनी कार्यवाही हेतु भेजी जा चुकी है।
