जय नारायण बिस्सा
तहलका न्यूज,बीकानेर।निगम चुनाव में इस बार मुकाबला केवल राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के बीच नहीं होगा,बल्कि बदले आरक्षण के बाद हर वार्ड में नया चुनावी गणित देखने को मिलेगा।वार्डों के आरक्षण की तस्वीर साफ होने के साथ ही संभावित प्रत्याशियों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।लंबे समय से चुनावी मैदान में सक्रिय कई चेहरों के समीकरण बदल गए हैं,वहीं कुछ नए दावेदारों के लिए रास्ता खुल गया है।ऐसे में इस बार चुनाव में किसी एक बड़े चेहरे की लोकप्रियता से ज्यादा वार्ड स्तर की पकड़,व्यक्तिगत संपर्क और मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता निर्णायक साबित होने के आसार हैं।वार्डों में आरक्षण की स्थिति सामने आने के बाद संभावित प्रत्याशियों ने नए सिरे से रणनीति बनाने पर मजबूर होना पड़ा है।जिन वार्डों में आरक्षण बदला है,वहां पिछले चुनाव में सक्रिय रहे कई नेताओं और दावेदारों को अब दूसरे विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं।वहीं आरक्षित वर्ग के नए चेहरों के लिए राजनीतिक पारी शुरू करने का अवसर बना है।सबसे बड़ी दिक्कत सामान्य वर्ग के नेताओं के सामने है।जो महापौर का पद अनारक्षित आने पर खुश हुए थे लेकिन वार्डों के आरक्षण की लॉटरी निकलने के बाद मायूस हो गए हैं।शहर के अदरूनी वार्डों में सामान्य वर्ग की बहुलता वाले वार्ड या तो ओबीसी या महिला वर्ग के लिए आरक्षित हो गए।ऐसे में सबकी निगाहें चुनिंदा वार्डों पर टिक गई हैं।भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने-अपने वार्ड में ऐसे प्रत्याशी उतारने की होगी,जो स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ रखते हों।
टिकट में जीतने की क्षमता सबसे बड़ी कसौटी
निकाय चुनाव में विधानसभा या लोकसभा चुनाव की तरह केवल पार्टी की लहर पर निर्भर रहना मुश्किल होता है।वार्ड चुनाव में मतदाता प्रत्याशी को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं।यही कारण है कि इस बार दोनों प्रमुख दल टिकट वितरण में स्थानीय समीकरणों के साथ जीतने की क्षमता को प्राथमिकता दे सकते हैं।कई वार्डों में पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं के साथ नए दावेदार भी टिकट की दौड़ में हैं।ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने जातीय एवं सामाजिक समीकरण, कार्यकर्ताओं की सक्रियता,प्रत्याशी की छवि और वार्ड में उसकी पकड़ के बीच संतुलन साधने की चुनौती रहेगी।टिकट कटने या मनपसंद उम्मीदवार नहीं मिलने की स्थिति में असंतोष भी सामने आ सकता है।
16 में सबसे कम,9 में सबसे ज्यादा मतदाता
उधर 20 अगस्त तक जारी मतदाता सूची में सबसे कम मतदाता 16 नंबर वार्ड के है। जहां 2901 के करीब मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। वहीं 9 नंबर वार्ड मतदाताओं की श्रेणी से सबसे बड़ा वार्ड है। जहां 9960 मतदाता है। इसके अलावा दो वार्ड ओर है,जहां नौ हजार से ज्यादा वोटर है। इसमें एक 62 नंबर वार्ड है और दूसरा 78 वार्ड है। वहीं तीन वार्ड आठ हजार से ज्यादा मतदाता वार्ड है।
वार्ड नं मतदाता
1 4083
2 7289
3 5525
4 6948
5 5606
6 5933
7 5384
8 6803
9 9960
10 5248
11 6237
12 5088
13 6983
14 6786
15 3890
16 2901
17 6969
18 5281
19 4051
20 4323
21 5201
22 6088
23 7066
24 3644
25 6326
26 4993
27 6492
28 5524
29 7970
30 3937
31 5704
32 6889
33 5219
34 7276
35 4895
36 6234
37 5399
38 7769
39 4568
40 3945
41 4763
42 3957
43 6671
44 5162
45 4724
46 6596
47 7606
48 8526
49 6702
50 5920
51 4319
52 8952
53 7115
54 3392
55 7714
56 5874
57 6626
58 5764
59 5498
60 5337
61 5786
62 9633
63 7267
64 6468
65 5800
66 4690
67 6781
68 6249
69 5152
70 4047
71 5313
72 6276
73 4683
74 8723
75 6027
76 4388
77 7996
78 9017
79 5308
80 7564
ये वार्ड पूर्व में और ये पश्चिम में
नगर निगम के 80 वार्डों में 41 वार्ड पूर्व के है।जबकि 39 वार्ड पश्चिम के है।जो पश्चिम के वार्ड है,उसमें 1 से 4,17 से 27,41 से 46,55 से 63,71 से 76,78 से 80 वार्ड है।वहीं 5 से 16,28 से 40,47 से 54,64 से 70 और 77 नंबर वार्ड पूर्व विधानसभा क्षेत्र में है।
